सालों के बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा बस्तर का इंद्रावती टाइगर रिजर्व, दशकों से खामोश थी वन्य जीवों की आवाज
Raipur : छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाके अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। इसी कड़ी में सकारात्मक पहल के तहत
इंद्रावती टाइगर रिजर्व को वर्षों बाद फिर से पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह कदम न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि क्षेत्र में शांति और विकास की वापसी का प्रतीक भी माना जा रहा है।
नदी किनारे बनेगा टूरिज्म विलेज
कभी वामपंथी उग्रवाद के कारण यह रिजर्व पूरी तरह से आम लोगों और पर्यटकों के लिए बंद था। सुरक्षा कारणों से न केवल पर्यटक गतिविधियां रुकी हुई थीं, बल्कि प्रशासनिक पहुंच भी सीमित हो गई थी।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों के चलते क्षेत्र में नक्सल प्रभाव काफी हद तक कम हुआ है। इसी बदलते माहौल को देखते हुए अब प्रशासन ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक और पर्यटन संभावनाओं को फिर से विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि विभाग एक व्यापक इको-टूरिज्म योजना पर काम कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के बीच संतुलन बनाना है।
इसके तहत इंद्रावती नदी के किनारे एक “टूरिज्म विलेज” विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटकों को स्थानीय आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का करीब से अनुभव मिल सकेगा।
यह है वाइल्ड वॉटर बफेलो का घर
इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। और यह लुप्तप्राय जंगली भैंसे (वाइल्ड वॉटर बफेलो) के प्राकृतिक आवासों में से एक है।
ऐसे में इस रिजर्व का फिर से खुलना पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पर्यटकों की सुविधा के लिए रिजर्व में प्रवेश के दो प्रमुख मार्ग विकसित किए जा रहे हैं।
पहला प्रवेश द्वार कुटरू–फरसेगढ़ मार्ग पर बनाया जाएगा, जबकि दूसरा मार्ग भोपालपट्टनम–माटीमार्का क्षेत्र से प्रस्तावित है। इन मार्गों के विकसित होने से पर्यटकों की पहुंच आसान होगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
आदिवासी युवा बनेंगे गाइड
वन विभाग स्थानीय युवाओं को भी इस योजना से जोड़ रहा है। माटीमार्का गांव के युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे पर्यटन गतिविधियों में भाग लेकर अपनी आजीविका को मजबूत कर सकें।
इससे न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में नक्सल खतरे में कमी आने के बाद अब पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने का काम शुरू कर दिया गया है।
इसमें ठहरने की व्यवस्था, गाइड सेवा और सुरक्षा से जुड़े इंतजाम शामिल हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व का दोबारा खुलना न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अहम है, बल्कि यह बस्तर में शांति और विकास की नई कहानी भी लिखेगा।
वर्षों तक रेड कॉरिडोर के नाम से पहचान रखने वाला यह क्षेत्र अब ग्रीन ट्रेल्स की ओर बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के पर्यटन नक्शे पर एक नई पहचान बना सकता है।
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