महिला CHO से अनुचित स्पर्श के आरोप, CMHO सस्पेंड; बस्तर भेजे गए
महिला CHO से अशोभनीय टिप्पणी और अनुचित स्पर्श के आरोप आखिरकार बेमेतरा के CMHO डॉ. अमृतलाल रोहलेडर पर भारी पड़ गया। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। शासन के आदेश में महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ अमर्यादित व्यवहार और अनुचित स्पर्श की शिकायत का साफ जिक्र है। जांच के बाद इन आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया। निलंबन के साथ ही उनका नया मुख्यालय बस्तर संभाग के जगदलपुर में तय कर दिया गया है।
शासन की जांच में क्या निकला?
स्वास्थ्य विभाग के 15 सितंबर के आदेश के मुताबिक डॉ. रोहलेडर के खिलाफ CHO के साथ गाली-गलौज और अभद्र भाषा के इस्तेमाल की शिकायत की गई थी। महिला CHO के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी और अनुचित स्पर्श किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी।
मामले की जांच संचालक स्वास्थ्य सेवाएं और बेमेतरा कलेक्टर के स्तर से कराई गई। जांच के दौरान संबंधित महिला स्वास्थ्य कर्मियों और दूसरे कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। जांच रिपोर्ट में अनुचित भाषा के इस्तेमाल और अनुचित स्पर्श से जुड़े आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए।
आरोप सही मिले तो शासन ने गिराई गाज
जांच अधिकारी ने डॉ. रोहलेडकर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। शासन के आदेश में कहा गया है कि जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर रहते हुए इस तरह का व्यवहार छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के अनुरूप नहीं है और इसे गंभीर कदाचरण माना गया है। इसके बाद CMHO को तत्काल निलंबित कर दिया गया।
बेमेतरा से सीधे जगदलपुर अटैच
निलंबन के बाद डॉ. रोहलेडकर का मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, जगदलपुर यानी बस्तर संभाग तय किया गया है। आदेश में कहा गया है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। यानी बेमेतरा CMHO की कुर्सी ही नहीं गई, बल्कि निलंबन अवधि में उनका प्रशासनिक ठिकाना भी बस्तर कर दिया गया।
18 अगस्त को सड़क पर उतरे थे CHO
यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। CMHO के खिलाफ शिकायतों को लेकर CHO संघ पहले ही मोर्चा खोल चुका था। 18 अगस्त को बेमेतरा में बड़ा प्रदर्शन किया गया। संघ के मुताबिक 12 से 15 जिलों से करीब 1000 से 1200 CHO और NHM अधिकारी-कर्मचारी इसमें शामिल हुए थे।
कर्मचारियों ने कचहरी चौक से रैली निकाली और कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़े। सिग्नल चौक के पास पुलिस ने रैली रोक दी। इसके बाद संघ के 10 प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।
जांच तक CMHO हटाने की मांग
प्रदर्शन के दौरान संघ ने साफ कहा था कि जांच पूरी होने तक CMHO को पद से हटाया जाए। तर्क था कि शिकायतकर्ता और गवाह उसी प्रशासनिक सिस्टम में काम करते हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए अधिकारी को पद से अलग रखना जरूरी है।
संघ ने यह मांग भी रखी थी कि CMHO के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को जांच में शामिल नहीं किया जाए। उस समय संघ ने शासन-प्रशासन को कार्रवाई के लिए समय दिया था और मांग पूरी नहीं होने पर “काम बंद-कलम बंद” आंदोलन की चेतावनी दी थी।
अब निलंबन से मिली बड़ी राहत
CHO संघ ने निलंबन को कर्मचारियों की गरिमा और महिला सुरक्षा से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि अब निगाह आगे होने वाली विभागीय कार्रवाई पर रहेगी।
शासन के आदेश में फिलहाल आरोपों को सही बताया गया है। इसलिए मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया के बाद ही अंतिम स्थिति साफ होगी। फिलहाल बेमेतरा CMHO पद से हटाए जा चुके हैं और निलंबन अवधि में उनका ठिकाना जगदलपुर कर दिया गया है।अगर चाहें तो इसी खबर के लिए 3 लाइन का ज्यादा चौंकाने वाला प्रोमो भी बना सकता हूं।
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