भूपेश बघेल की याचिका खारिज, अब हाईकोर्ट में चलेगा पाटन चुनाव का मुकदमा!
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल की विधायकी को चुनौती देने वाली याचिका पर अब हाईकोर्ट में मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की वह अर्जी खारिज कर दी जिसमें उन्होंने याचिका निरस्त करने की मांग की थी। दुर्ग सांसद विजय बघेल ने 2024 में यह चुनाव याचिका दायर की थी। आरोप है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले प्रचार बंद होने की अवधि में भूपेश ने रैली और रोड शो किया था। मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2026 को होगी।
क्या है पूरा मामला
2023 विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल पाटन सीट से जीते थे। उनके निर्वाचन को दुर्ग सांसद विजय बघेल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में आरोप है कि मतदान से ठीक पहले प्रचार बंद होने की अवधि में भूपेश बघेल ने पाटन क्षेत्र में समर्थकों के साथ रैली और रोड शो किया। चुनावी नारे लगवाए और वोट मांगे।
यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA - Representation of the People Act) की धारा 126 का उल्लंघन बताया गया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी याचिका के साथ पेश किया गया है।
भूपेश की दलीलें और कोर्ट का जवाब
भूपेश बघेल की ओर से 16 बिंदु पेश किए गए। उनका कहना था कि याचिका चलने योग्य नहीं है। आरोपों का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है और आचार संहिता उल्लंघन का कोई साक्ष्य नहीं दिया गया।
यह भी कहा गया कि वीडियो और ई-मेल के साथ जरूरी 65-बी (Section 65-B - Indian Evidence Act) का सर्टिफिकेट नहीं लगाया गया। रोड शो में शामिल लोगों की पहचान और भूपेश की सहमति के पुख्ता सबूत नहीं हैं।
जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने यह दलीलें नहीं मानीं। कोर्ट ने कहा कि याचिका में दिए गए तथ्य केस आगे बढ़ाने के लिए काफी हैं।
अब ट्रायल में होगा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सबूतों की कानूनी वैधता, डिजिटल सर्टिफिकेट और गवाहों की सच्चाई का फैसला शुरुआती चरण में नहीं होगा।
यह सब ट्रायल के दौरान गवाहियों और जिरह के बाद तय होगा। भूपेश बघेल ट्रायल में सबूतों की प्रामाणिकता और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की वैधता पर आपत्ति उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। 23 जून 2026 से इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी।
सुप्रीम कोर्ट भी जा चुके थे भूपेश
यह पहली बार नहीं है जब भूपेश बघेल को इस मामले में झटका लगा है। इससे पहले हाईकोर्ट से एक अर्जी खारिज होने पर वे सुप्रीम कोर्ट गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट के सामने नए सिरे से याचिका की मेंटेनेबिलिटी यानी चलने योग्यता पर आवेदन देने की छूट दी थी। इसी आदेश के तहत उन्होंने हाईकोर्ट में नई अर्जी दी थी। अब हाईकोर्ट ने उसे भी पूरी तरह खारिज कर दिया है।
विजय बघेल की याचिका में क्या है
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने 2024 में यह चुनाव याचिका दायर की थी। आरोप है कि मतदान से पहले प्रचार बंद होने की अवधि में रैली और रोड शो किया गया। याचिका में निर्वाचन शून्य घोषित करने की मांग की गई है।
FAQ
- भूपेश बघेल का आचार संहिता उल्लंघन मामला क्या है?
यह मामला 2023 विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि मतदान से पहले प्रचार बंद अवधि (साइलेंस पीरियड) के दौरान पाटन क्षेत्र में भूपेश बघेल ने रैली और रोड शो किया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस दौरान चुनावी नारे लगाए गए और वोट मांगकर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन हुआ। - भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव याचिका किसने दायर की है?
यह चुनाव याचिका दुर्ग सांसद विजय बघेल ने दायर की है, जिसमें 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। - भूपेश बघेल के निर्वाचन मामले में हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रारंभिक स्तर पर याचिका खारिज करने की मांग को अस्वीकार कर दिया है और अब मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर करने का आदेश दिया है।
ये खबरें भी पढ़ें...
भूपेश बघेल की विधायकी पर संकट! सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस, भतीजे विजय के आरोपों का क्या होगा?
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज और टीएस आमरण अनशन पर बैठे, भूपेश बघेल बोले ईंट से ईंट बजा देंगे
90 दिन में चार्जशीट नहीं तो सस्पेंशन समाप्त! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
रविशंकर महाराज बनाम CBI: फोन टैपिंग पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब