बिलासपुर नगर निगम का खेल, नियमों के खिलाफ 12 इमारतें वैध
बिलासपुर नगर निगममें अवैध निर्माणों को नियमित (वैध) करने के खेल में नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया है। नगर निगम द्वारा ऐसे भवनों का भी राजीनामा कर राहत दे दी गई है, जिन्हें सामान्य तौर पर नियमित किया ही नहीं जा सकता था। इस पूरी प्रक्रिया में जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है, वहीं शासन को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले छह महीनों में निगम ने 10 से अधिक बड़े भवनों का राजीनामा किया है, जिससे करीब एक करोड़ रुपए का राजस्व मिला है, लेकिन नियमों की अनदेखी से शहर के भविष्य को खतरे में डाल दिया गया है।
बिना फायर ऑडिट के चल रहे नर्सिंग होम और अस्पताल
जांच और शिकायतों के घेरे में सबसे ज्यादा व्यावसायिक भवन, अस्पताल और नर्सिंग होम हैं। शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय इलाकों में स्वीकृत नक्शे से बिल्कुल अलग हटकर निर्माण कर लिया गया है:
सीजी अस्पताल (गौरव पथ) : साल 2022 में मिली अनुमति के बाद यहां बिना स्वीकृति के एक अतिरिक्त फ्लोर (मंजिल) तान दिया गया। इतना ही नहीं, एक ही स्वीकृति पर दो अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं।
शराफ ईएनटी अस्पताल (गौरव पथ) : यहां नियमों के विपरीत स्टिल्ट पार्किंग की जगह का उपयोग अस्पताल के संचालन के लिए किया जा रहा है, जिससे मरीजों और आने-जाने वालों के लिए पार्किंग का संकट खड़ा हो गया है।
वर्मा नर्सिंग होम व न्यू जनता हॉस्पिटल (तिफरा) : ये दोनों अस्पताल आवासीय भवन की अनुमति लेकर व्यावसायिक तौर पर धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं।
जीना सीखो लाइफ केयर (व्यापार विहार) : केवल व्यावसायिक अनुमति लेकर इस भवन को तीन मंजिल तक खींच दिया गया है और अस्पताल चलाया जा रहा है।
यूनिक नर्सिंग होम (तेलीपारा) : नगर निगम की बिना किसी मंजूरी के इस इमारत में अतिरिक्त निर्माण कार्य कर लिया गया।
विनोबा नगर के दो नर्सिंग होम : यहां फरवरी 2024 में स्वीकृत नक्शे के विपरीत 3 मीटर की जगह सिर्फ डेढ़ मीटर खुली जगह छोड़ी गई है और तय अनुमति से अधिक मंजिलें बना ली गई हैं।
नेहरू नगर में नियमों की धज्जियां उड़ाकर बना कॉम्प्लेक्स
नियमों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला नेहरू नगर से भी सामने आया है। यहां एक भवन मालिक को जी+2 (दो मंजिला) भवन और 33 फीसदी हिस्से में टेंट हाउस संचालन की अनुमति दी गई थी। लेकिन स्वीकृत नक्शे को पूरी तरह दरकिनार कर पूरे भवन का व्यावसायिक उपयोग करते हुए जी+4 (चार मंजिला) निर्माण कर लिया गया। इस इमारत के चारों तरफ कोई ओपन स्पेस (खुली जगह) नहीं छोड़ी गई है और सामने सड़क चौड़ीकरण के लिए तय जमीन भी दबा दी गई है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
जानकारों का साफ कहना है कि जिन भवनों में पार्किंग नहीं है, जरूरी खुली जगह नहीं है, या तय सीमा से ज्यादा ऊंचाई पर निर्माण कर लिया गया है, उन्हें नियमित करना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
बड़ी लापरवाही : यदि इन व्यस्त अस्पतालों या व्यावसायिक भवनों में कभी आग लगती है या कोई अन्य आपदा आती है, तो राहत और बचाव कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। नियमों के मुताबिक, जहां सेटबैक और खुली जगह न हो या स्वीकृत उपयोग बदलकर अवैध निर्माण किया गया हो, वहां राजीनामा की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जा सकती।
शपथ पत्र के भरोसे छोड़ी जा रही कमियां
इस पूरे मामले पर जब भवन अधिकारी अनुपम तिवारी से सीधे सवाल किए गए, तो उन्होंने नियमों के उल्लंघन पर अजीब दलीलें दीं।
सवाल : विनोबा नगर के नर्सिंग होम का नियमों के खिलाफ राजीनामा क्यों हुआ?
जवाब : नहीं, नियमों के तहत ही राजीनामा किया गया है।
सवाल : सामने 3 मीटर की जगह छोड़नी थी, लेकिन कम छोड़ी गई है?
जवाब : वहां स्टिल्ट पार्किंग दी गई है, इसलिए मामला राजीनामे के दायरे में आता है।
सवाल : जूना बिलासपुर के भवन में पार्किंग नहीं है, फिर राजीनामा कैसे हुआ?
जवाब : भवन मालिक ने शपथ पत्र दिया है कि वह दुकान हटाकर वहां पार्किंग बनाएगा।
अधिकारियों के इन दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है। चंद रुपयों के राजस्व के चक्कर में शहर की सुरक्षा और मास्टर प्लान को दांव पर लगा दिया गया है।
निष्कर्ष
बिलासपुर में नियमों को ताक पर रखकर अवैध व्यावसायिक भवनों और अस्पतालों को वैध करना शहर की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ है। चंद रुपयों के राजस्व के लिए बिना पार्किंग और फायर ऑडिट वाली इमारतों को नियमित करना भविष्य में किसी बड़ी आपदा को आमंत्रण देने जैसा है, जिसकी जवाबदेही प्रशासन की होगी।
FAQ
- नगर निगम में 'राजीनामा' (Compounding) या नियमितीकरण क्या होता है?
उत्तर: जब कोई भवन मालिक स्वीकृत नक्शे से थोड़ा हटकर या बिना अनुमति के अवैध निर्माण कर लेता है, तो नगर निगम नियमों के तहत तय जुर्माना (Compounding Fee) लेकर उस निर्माण को वैध घोषित कर देता है। इसे ही आम बोलचाल में 'राजीनामा' या नियमितीकरण कहते हैं। - सुरक्षा के लिहाज से 'फायर ऑडिट' (Fire Audit) क्यों जरूरी है?
उत्तर: किसी भी बहुमंजिला या व्यावसायिक इमारत (विशेषकर अस्पतालों) में आग लगने की स्थिति में बचाव और राहत कार्य कैसे होंगे, इसकी जांच को फायर ऑडिट कहते हैं। बिना फायर ऑडिट के इमारतों को वैध करना बेहद खतरनाक होता है क्योंकि इससे आपातकाल में जान-माल का बड़ा खतरा बढ़ जाता है। - भवन निर्माण नियमों में 'सेटबैक' (Setback) और 'ओपन स्पेस' का क्या महत्व है?
उत्तर: किसी भी इमारत को बनाते समय उसके चारों तरफ और मुख्य सड़क के सामने कुछ खाली जगह छोड़नी अनिवार्य होती है, जिसे सेटबैक या ओपन स्पेस कहते हैं। यह जगह भविष्य में सड़क चौड़ीकरण, वेंटिलेशन, और भूकंप या आग जैसी आपदाओं के समय एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के मूवमेंट के लिए जरूरी होती है।
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