11 साल बाद नसबंदी कांड में सजा, 15 मौतों का आया फैसला
News in Short
- बिलासपुर नसबंदी कांड में सर्जन डॉ. आरके गुप्ता को दोषी ठहराया गया।
- डॉ. गुप्ता को 2 साल की सजा और 25 हजार रुपए जुर्माना किया गया।
- 2014 में ऑपरेशन के बाद 15 महिलाओं की मौत और 100 से ज्यादा महिलाएं अस्पताल में भर्ती हुईं।
- जांच में चूहामार जहर (जिंक फॉस्फाइड) मिलने की आशंका जताई गई।
- 5 आरोपी दवा सप्लायर बरी हो गए, क्योंकि कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे।
News in Detail
Bilaspur. 11 साल 4 महीने के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बिलासपुर के चर्चित नसबंदी कांड में न्याय की घड़ी आ ही गई। 15 महिलाओं की दर्दनाक मौत से जुड़े इस मामले में जिला कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सर्जन डॉ आरके गुप्ता को दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा और 25 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। आरोप था कि उन्होंने महज 3 घंटे में 83 नसबंदी ऑपरेशन किए, जिसके बाद कई महिलाओं की हालत बिगड़ गई और 15 की जान चली गई।
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महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी थी
नवंबर 2014 में पेंडारी और पेंड्रा में लगे सरकारी नसबंदी शिविर में यह भयावह हादसा हुआ था। ऑपरेशन के बाद अचानक महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी, जिससे अस्पतालों में हड़कंप मच गया। 100 से ज्यादा महिलाओं को सिम्स, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया था।
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परिवार उजड़ गए
इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। कहीं मां की मौत, तो कहीं बहू और बेटियों के चले जाने से परिवार उजड़ गए। शुरुआत में ऑपरेशन में लापरवाही और सेप्टीसीमिया को कारण बताया गया, वहीं बाद में दवा सिप्रोसिन में चूहामार जहर (जिंक फॉस्फाइड) मिलने की आशंका ने मामले को और गंभीर बना दिया।
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पांच आरोपी बरी
मामले की जांच के बाद पुलिस ने सर्जन समेत दवा सप्लायर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के चलते महावर फार्मा और कविता फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े 5 आरोपियों को बरी कर दिया गया। अब इस फैसले के साथ एक दशक से ज्यादा पुराना यह मामला कानूनी रूप से अपने निष्कर्ष पर पहुंच गया है। लेकिन उन परिवारों के जख्म आज भी ताजा हैं, जिन्होंने इस लापरवाही में अपनों को खो दिया था।