बिलासपुर रेल मंडल के 56 स्टेशनों पर बंद पड़े टॉयलेट, उगीं झाड़ियां

Aishwarya Dwivedi | Aug 18, 2026, 12:04 IST
बिलासपुर रेल मंडल शौचालय विवाद
बिलासपुर रेल मंडल के 56 स्टेशनों पर 24-24 लाख में बने टॉयलेट 5 साल से बंद हैं। संचालन का ठेका न मिलने से बिना इस्तेमाल ही इनकी उम्र पूरी हो गई।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बिलासपुर रेल मंडल के 56 स्टेशनों के बाहर बने टॉयलेट बंद पड़े हैं।
  • ये टॉयलेट 24-24 लाख रुपए की भारी लागत से बनाए गए थे।
  • संचालन के लिए ठेकेदार न मिलने से इन पर ताले लटके रहे।
  • बिना इस्तेमाल हुए ही इनकी पांच साल की उम्र पूरी हो चुकी है।
  • रखरखाव न होने से अब कई जगहों पर टॉयलेट टूटने लगे हैं।

लाखों खर्च, शौचालय बने बेकार

बिलासपुर रेल मंडल के ग्रामीण इलाकों में स्थिति बहुत खराब है। स्टेशनों के बाहर लाखों रुपए खर्च करके टॉयलेट बनाए गए थे। मकसद यह था कि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। स्थानीय लोगों को भी इस सुविधा का फायदा मिलना तय हुआ था।



लेकिन देखरेख के अभाव में सारे टॉयलेट ताले में बंद रहे। पांच साल बीत जाने के बाद भी इनका इस्तेमाल नहीं हो सका। अब इन शौचालयों के आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। कुछ जगहों पर यह ढांचे पूरी तरह टूटकर खराब हो रहे हैं।



करोड़ों का बजट हुआ बेकार

इन शौचालयों को खास प्री फेब्रिकेटेड तकनीक से बनाया गया था। पारंपरिक ईंट और सीमेंट की जगह इस सामग्री का इस्तेमाल हुआ। इस तकनीक से बने शौचालयों की कुल उम्र 5 साल होती है। साल 2018-19 में इनका निर्माण कार्य पूरा कराया गया था।



समय सीमा पूरी होने के कारण अब ये किसी काम के नहीं रहे। निर्माण के बाद एक भी दिन इनका ताला नहीं खोला जा सका। सार्वजनिक पैसे का ऐसा नुकसान देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं।



छोटे स्टेशनों पर ज्यादा समस्या

यह पूरा निर्माण कार्य एसईसीएल (SECL – South Eastern Coalfields Limited) के सीएसआर (CSR – Corporate Social Responsibility) फंड से हुआ था। साल 2019 में रेल मंत्रालय को इसके लिए बजट मिला था। देशभर के 529 स्टेशनों में ऐसे शौचालय तैयार किए गए थे।



लेकिन ग्रामीण और छोटे स्टेशनों पर संचालन की योजना विफल रही। खोंगसरा जैसे स्टेशन पर जंगल के बीच यह शौचालय बना दिया गया। बेलगहना स्टेशन के बाहर बना टॉयलेट भी पूरी तरह वीरान पड़ा है।



उसलापुर स्टेशन के भीतर रेलवे का अपना टॉयलेट चालू है। इसलिए बाहर बना यह ढांचा बिना सफाई के बदबू मार रहा है। अकलतरा और चांपा जैसे स्टेशनों पर भी ठेकेदार नहीं मिल सके।



यात्रियों की भारी आवाजाही के बाद भी ताले नहीं खुल पाए। एजेंसी न मिलने से यह पूरी योजना ठप होकर रह गई। अब जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।



FAQ

  1. एसईसीएल का फुल फॉर्म क्या है और इसका मुख्यालय कहाँ है?
    एसईसीएल का फुल फॉर्म 'साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड' (South Eastern Coalfields Limited) है। यह कोल इंडिया की एक सहायक कंपनी है और इसका मुख्यालय बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में स्थित है।
  2. सीएसआर फंड (CSR Fund) क्या होता है?
    सीएसआर का मतलब 'कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी' (Corporate Social Responsibility) होता है। इसके तहत देश की बड़ी कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा समाज सुधार, स्वच्छता और शिक्षा जैसे कार्यों में खर्च करना अनिवार्य होता है।
  3. बिलासपुर रेल मंडल किस रेलवे जोन के अंतर्गत आता है?
    बिलासपुर रेल मंडल 'दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे' (SECR - South East Central Railway) जोन के अंतर्गत आता है। इस जोन का मुख्यालय भी बिलासपुर में ही है।

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