बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला : 3 बाबू गिरफ्तार, 7 तहसीलदारों को नोटिस

Umeshwari Baghel | Jul 28, 2026, 15:50 IST
बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला
बिलासपुर के सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा मामले में तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। राजस्व विभाग ने तीनों को निलंबित कर दिया है। पुलिस जांच में कई कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका खंगाली जा रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बिलासपुर सर्पदंश कांड में तीन कर्मचारी गिरफ्तार
  • मुआवजा फर्जीवाड़े की जांच में तहसील पर शिकंजा
  • फर्जी क्लेम मामले में राजस्व विभाग की बड़ी कार्रवाई
  • सर्पदंश मुआवजे के खेल में कई नाम जांच के घेरे में
  • बिलासपुर घोटाले में बाबुओं पर गिरी निलंबन की गाज

Bilaspur। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। मामले में अब बिलासपुर तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तारी के बाद राजस्व विभाग ने तीनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया है।



जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरिराम राठौर शामिल हैं। पुलिस ने तीनों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय सहित पूरे राजस्व विभाग में हलचल बढ़ गई है। वहीं कर्मचारी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।



सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच का दायरा बढ़ा

बिलासपुर में सर्पदंश से मौत के मामलों में मिलने वाले सरकारी मुआवजे में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा राशि स्वीकृत कराने का प्रयास किया।जांच में सामने आया कि मुआवजा प्रकरणों की प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही और अनियमितता हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और धीरे-धीरे इसमें जुड़े लोगों की भूमिका सामने आने लगी। अधिकारियों के अनुसार जांच अभी शुरुआती दौर में है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जीवाड़े की पूरी प्रक्रिया कैसे चल रही थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।



पहले भी हो चुकी है कई लोगों की गिरफ्तारी

इस मामले में पुलिस इससे पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान गोविंद विश्वकर्मा, वकील खांडेकर और डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। पुलिस अब सभी आरोपियों के बीच संबंधों और उनकी भूमिका की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फर्जी मुआवजा प्रकरण तैयार करने से लेकर राशि स्वीकृत कराने तक किस स्तर पर गड़बड़ी हुई। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



सात अन्य कर्मचारियों के बयान होंगे दर्ज

जांच आगे बढ़ाने के लिए पुलिस तहसील कार्यालय से जुड़े सात अन्य कर्मचारियों के बयान भी दर्ज करेगी। इन कर्मचारियों से मुआवजा प्रकरणों की प्रक्रिया और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बयानों के बाद मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी कर्मचारी या अधिकारी ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की या फिर किसी दबाव में काम किया।



सात तहसीलदारों को भी भेजा गया नोटिस

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सात तहसीलदारों को भी नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों से सर्पदंश मुआवजा प्रकरणों से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगा गया है। नोटिस जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने इसका विरोध किया है। संघ का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बिना पर्याप्त जांच के दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। संघ ने वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।



लिपिक संघ ने जताई नाराजगी

तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद लिपिक संघ भी विरोध में उतर आया है। सोमवार को संघ के नेतृत्व में कर्मचारियों ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि राजस्व कर्मचारियों पर लगातार कार्रवाई से विभाग में डर का माहौल बन गया है। संगठन का आरोप है कि पूरी जांच पूरी होने से पहले ही कर्मचारियों को आरोपी बनाया जा रहा है। लिपिक संघ ने मांग की है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच हो और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन निर्दोष कर्मचारियों को परेशान न किया जाए।



सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी

कर्मचारी संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन को आगे बढ़ा सकते हैं। संघ ने सामूहिक अवकाश जैसे कदम उठाने की भी बात कही है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई जांच के आधार पर ही की जाएगी।



तहसील कार्यालय में बढ़ी चिंता

लगातार हो रही गिरफ्तारियों और नोटिस की कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल है। कर्मचारियों को आशंका है कि जांच का दायरा बढ़ने के साथ और लोगों से भी पूछताछ हो सकती है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। वहीं इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी का पता लगाया जा सके।



पुलिस जांच जारी, आगे और कार्रवाई संभव

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी। जांच में अगर किसी अन्य कर्मचारी, अधिकारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा मामला अब बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले दिनों में इसमें और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



FAQ

  1. बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
    पुलिस ने बिलासपुर तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों—गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरिराम राठौर-को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। राजस्व विभाग ने तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया है।
  2. इस घोटाले में जांच का दायरा कितना बढ़ चुका है?
    पुलिस ने सात तहसीलदारों को नोटिस जारी किया है और तहसील कार्यालय के सात अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले गोविंद विश्वकर्मा, वकील खांडेकर और डॉ. प्रियंका सोनी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है।
  3. कर्मचारी संगठनों का इस कार्रवाई पर क्या रुख है?
    लिपिक संघ और छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया है और चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो सामूहिक अवकाश और आंदोलन जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

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