बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला : जेल गए बाबू, अब पटवारी संभालेंगे रिकॉर्ड रूम

Aishwarya Dwivedi | Aug 16, 2026, 09:44 IST
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बिलासपुर तहसील में 17 करोड़ के सर्पदंश घोटाले की जांच से कर्मचारियों में डर है। स्टाफ की कमी के बाद अब पटवारी को बंद पड़े रिकॉर्ड रूम का प्रभार सौंपा गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बिलासपुर तहसील कार्यालय में सर्पदंश मुआवजा राशि में बड़ा घोटाला हुआ है।
  • इस मामले में 17 करोड़ रुपए से अधिक का फर्जीवाड़ा सामने आया है।
  • पुलिस और प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई से तीन लिपिक जेल जा चुके हैं।
  • जांच के डर से कई अन्य कर्मचारी दफ्तर आने से बच रहे हैं।
  • अब कामकाज संभालने के लिए पटवारी को रिकॉर्ड रूम का प्रभार मिला है।

मुआवजा घोटाले से सहमा दफ्तर

बिलासपुर तहसील कार्यालय में इन दिनों भारी हड़कंप मचा हुआ है। सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच का डर कर्मचारियों पर साफ दिख रहा है। कार्रवाई के खौफ से दफ्तर में कर्मचारियों की भारी कमी हो गई है। प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।



हाल ही में युक्तीयुक्तकरण प्रक्रिया के तहत पांच शिक्षक अपने मूल विभाग लौट गए। वहीं मुआवजा घोटाले में तीन लिपिक पहले ही जेल जा चुके हैं। बाकी बचे कई कर्मचारी दफ्तर से नदारद चल रहे हैं। इस वजह से कार्यालय का पूरा ढर्रा चरमरा गया है।



बंद पड़ा था रिकॉर्ड रूम

कर्मचारियों की कमी के कारण रिकॉर्ड रूम पिछले एक माह से बंद था। दरवाजे पर ताला लटके होने से जरूरी दस्तावेज नहीं निकल पा रहे थे। आम जनता और वकील प्रमाण पत्रों के लिए चक्कर काट रहे थे। रोजमर्रा का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ था।



समस्या को देखते हुए उप संभागीय मजिस्ट्रेट (SDM - Sub Divisional Magistrate) मनीष साहू ने पहल की। उन्होंने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर कर्मचारियों की मांग की। उन्होंने व्यवस्था बनाने के लिए नए स्टाफ की तुरंत तैनाती का अनुरोध किया था।



पटवारी को मिला प्रभार

कलेक्टोरेट से निर्देश मिलने के बाद तहसील कार्यालय को 4 नए लिपिक मिल गए हैं। इसके साथ ही रिकॉर्ड रूम की चाबी अब पटवारी को दी गई है। पटवारी को प्रभार मिलने से बंद कमरे का ताला दोबारा खुल सका है।



अब जमीन का नामांतरण और बटांकन का काम आसान होने की उम्मीद है। लोग नक्शा, खसरा और बी-1 की प्रमाणित प्रतियां आसानी से ले सकेंगे। वकीलों और आम नागरिकों को इससे बड़ी राहत मिलने की संभावना है।



17 करोड़ का फर्जीवाड़ा

तहसील दफ्तर के कर्मचारी सर्पदंश मुआवजा राशि की जांच से सहमे हुए हैं। इस मामले में 17 करोड़ रुपए से ज्यादा के फर्जीवाड़े का आरोप है। लगातार हो रही गिरफ्तारियों के कारण दफ्तर में सन्नाटा पसरा रहता है।



जांच की आंच तेजी से आगे बढ़ रही है। कई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। इस वजह से तहसील का प्रशासनिक काम कई दिनों से अटका पड़ा था। अब नए कर्मचारियों से उम्मीद जगी है।



FAQ

  1. बिलासपुर तहसील कार्यालय में रिकॉर्ड रूम का प्रभार किसे सौंपा गया है?
    उत्तर: बिलासपुर तहसील कार्यालय में रिकॉर्ड रूम का प्रभार एक पटवारी को सौंपा गया है। कर्मचारियों की कमी और रिकॉर्ड रूम बंद होने के कारण यह कदम उठाया गया है। इससे आम जनता को जमीन से जुड़े दस्तावेज आसानी से मिल सकेंगे।
  2. बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला कितने रुपये का है?
    उत्तर: बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला 17 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े का है। इसमें फर्जी दस्तावेज बनाकर मुआवजा राशि का आहरण किया गया था। मामले की जांच तेजी से जारी है।
  3. बिलासपुर तहसील कार्यालय में कामकाज क्यों प्रभावित हुआ था?
    उत्तर: घोटाले की जांच के डर से कई कर्मचारी दफ्तर से नदारद थे और 3 लिपिक जेल चले गए थे। इसके अलावा 5 शिक्षक अपने मूल विभाग लौट गए थे। इस वजह से कर्मचारियों की भारी कमी हो गई थी।

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