महिला मोर्चा का प्रभार पुरुष के हाथ, बीजेपी के नारी शक्ति मॉडल पर सवाल

Arun Tiwari | Aug 31, 2026, 22:27 IST
महिला मोर्चा का प्रभार पुरुष के हाथ
छत्तीसगढ़ बीजेपी ने सात मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा की है। महिला मोर्चा की जिम्मेदारी सुभाष तिवारी को मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष इसे बीजेपी के नारी शक्ति मॉडल से जोड़ रहा है। वहीं जनजाति मोर्चे में शिरीष अग्रवाल की नियुक्ति भी चर्चा में है।

Raipur : छत्तीसगढ़ बीजेपी ने अपने सात मोर्चों के नए प्रभारियों की घोषणा कर दी है, लेकिन इस सूची में एक नियुक्ति सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी ने महिला मोर्चा की जिम्मेदारी सुभाष तिवारी को सौंप दी है। यानी जिस मोर्चे का नाम ही महिलाओं के राजनीतिक संगठन, नेतृत्व और सशक्तिकरण से जुड़ा है, उसकी संगठनात्मक कमान एक पुरुष नेता के हाथ में दे दी गई है। सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि बीजेपी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की बात कर रही है। यह कैसा नारी शक्ति मॉडल है जिसमें पुरुष के हाथ में प्रभार है। क्या बीजेपी के पास इस पद के लिए कोई योग्य महिला ही नहीं है।



ये बने हैं प्रभारी

बीजेपी प्रदेश संगठन की ओर से जारी सूची में युवा मोर्चा का प्रभारी वैभव बैस, महिला मोर्चा का प्रभारी सुभाष तिवारी, किसान मोर्चा का प्रभारी पूनम चंद्राकर को बनाया गया है। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के लिए लखनलाल साहू, अनुसूचित जनजाति मोर्चे के लिए शिरीष अग्रवाल, अनुसूचित जाति मोर्चे के लिए डॉ. गुलाब टिकरिहा और अल्पसंख्यक मोर्चे के लिए मनोज जैन को जिम्मेदारी दी गई है।



ये है नारी शक्ति मॉडल

लेकिन सवाल सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं है। सवाल बीजेपी के उस बड़े राजनीतिक नैरेटिव का है, जिसमें पार्टी लगातार नारी शक्ति, महिला सशक्तिकरण और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को प्रमुखता से पेश करती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेता मंचों से महिलाओं को नेतृत्व में आगे लाने की बात करते हैं। महिला मतदाताओं को बीजेपी की राजनीति का एक मजबूत आधार भी माना जाता है। ऐसे में महिला मोर्चे के प्रभारी के तौर पर किसी महिला की जगह पुरुष नेता की नियुक्ति स्वाभाविक रूप से चर्चा और सवालों को जन्म देती है। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठ सकता है कि क्या छत्तीसगढ़ बीजेपी में महिला मोर्चे को संगठनात्मक दिशा देने के लिए कोई सक्षम महिला नेता नहीं मिली? अगर महिला मोर्चा महिलाओं को राजनीति और संगठन में नेतृत्व देने का मंच है, तो उसके प्रभारी पद पर किसी अनुभवी महिला नेता को मौका क्यों नहीं दिया गया?



बात नियम की नहीं मैसेज की है

हालांकि बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में प्रभारी का मतलब मोर्चे का प्रदेश अध्यक्ष होना नहीं है। प्रभारी आमतौर पर संगठन और मोर्चे के बीच समन्वय, गतिविधियों की निगरानी और राजनीतिक मार्गदर्शन की भूमिका निभाता है। इसलिए तकनीकी रूप से किसी भी मोर्चे का प्रभारी किसी दूसरे वर्ग या समुदाय का व्यक्ति हो सकता है। लेकिन राजनीति सिर्फ तकनीकी शब्दों और संगठनात्मक नियमों से नहीं चलती, उसमें संदेश और प्रतीक भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। और यहां संदेश दिलचस्प है महिलाओं के लिए बने मोर्चे की निगरानी की जिम्मेदारी एक पुरुष के पास।



अब तर्क और कुतर्क का मौका

बीजेपी के लिए यह नियुक्ति शायद पूरी तरह सामान्य संगठनात्मक फैसला हो, लेकिन विपक्ष को इसमें राजनीतिक हमला करने का मौका जरूर मिल सकता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल यह सवाल उठा सकते हैं कि जो पार्टी महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात करती है, वह अपने महिला मोर्चे की जिम्मेदारी किसी महिला को क्यों नहीं दे सकी?


दूसरी तरफ बीजेपी यह तर्क दे सकती है कि प्रभारी और महिला मोर्चे की निर्वाचित या नियुक्त महिला पदाधिकारी की भूमिका अलग-अलग होती है। संगठन में प्रभारी का काम समन्वय और मार्गदर्शन करना होता है, जबकि मोर्चे का नेतृत्व महिला पदाधिकारियों के हाथ में रहता है। लेकिन सार्वजनिक और राजनीतिक बहस में यह बारीकी अक्सर पीछे रह जाती है और तस्वीर ज्यादा बड़ी बन जाती है। यही वजह है कि सुभाष तिवारी की नियुक्ति केवल एक संगठनात्मक आदेश भर नहीं रह गई है। यह बीजेपी के नारी शक्ति नैरेटिव और संगठनात्मक फैसले के बीच तुलना का विषय बन गई है।



आदिवासियों के प्रभारी अग्रवाल

इस सूची में एक बात और चर्चा का विषय बन गई है। जनजाति मोर्चे के प्रभार शिरीष अग्रवाल को दिया गया है। बात यह भी नियम की नहीं बल्कि इस बात की है कि क्या बीजेपी में आदिवासी नेताओं की कमी है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ बीजेपी महिला मोर्चा का प्रभारी किसे बनाया गया है?
    छत्तीसगढ़ बीजेपी ने महिला मोर्चा की जिम्मेदारी सुभाष तिवारी को सौंपी है।
  2. महिला मोर्चा के प्रभारी के तौर पर पुरुष नेता की नियुक्ति पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
    सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि महिला मोर्चा महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व और सशक्तिकरण से जुड़ा संगठन है। ऐसे में पुरुष नेता को प्रभारी बनाए जाने पर बीजेपी के नारी शक्ति मॉडल पर चर्चा हो रही है।
  3. बीजेपी संगठन में मोर्चा प्रभारी की क्या भूमिका होती है?
    मोर्चा प्रभारी का काम संगठन और मोर्चे के बीच समन्वय करना, गतिविधियों की निगरानी करना और राजनीतिक मार्गदर्शन देना होता है। यह पद मोर्चा अध्यक्ष से अलग होता है।

ये खबरें भी पढ़े...

बीजेपी के टारगेट पर देश के 25 करोड़ जेन जी,स्कूली बच्चे करेंगे मोदी के मन की बात



छत्तीसगढ़ बीजेपी जिला अध्यक्षों की संगठन से शिकायत, न मंत्री सुनते न अधिकारी



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजस्थान दौरा तय, 23,500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की राह होगी सुगम



छत्तीसगढ़ कर्मचारी संघ की मुख्य सचिव को चिट्ठी, कहा-महिला सशक्तिकरण पर ध्यान दें, व्यवसायिक संस्था की कैंटीन मंजूर नहीं



Tags:
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • छत्तीसगढ़ बीजेपी
  • बीजेपी
  • महिला सशक्तिकरण
  • नारी शक्ति