स्वास्थ्य सचिव कटारिया के रवैये से नाराज बृजमोहन अग्रवाल, लोकसभा में शिकायत
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कटारिया ने फोन पर उनसे रूखा व्यवहार किया। सांसद ने इसे विशेषाधिकार हनन बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की है। मामला अब लोकसभा सचिवालय तक पहुंच चुका है। सचिवालय ने केंद्र सरकार से इस पर फैक्चुअल नोट मांगा है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
सांसद बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत है कि कई महीनों से अमित कटारिया उनकी चिट्ठियों का जवाब नहीं दे रहे थे। जनहित से जुड़े मामलों पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आती थी। सांसद ने इसे एक अफसर का गैरजिम्मेदाराना रवैया बताया।
21 मई को दी गई अपनी औपचारिक शिकायत में उन्होंने लिखा कि यह रवैया संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत उनके विशेषाधिकार का हनन है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार के प्रोटोकॉल दिशा निर्देशों का उल्लंघन भी बताया।
20 मई को क्या हुआ था
20 मई की शाम यह विवाद गंभीर हो गया। सांसद के मुताबिक उन्होंने शाम 5:43 बजे मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को फोन कर शिकायत की। इसके बाद सुबोध सिंह ने अमित कटारिया को सांसद से बात करने का निर्देश दिया।
अमित कटारिया ने शाम 7:44 बजे सांसद को फोन किया। उस समय सांसद व्यस्त होने के कारण कॉल रिसीव नहीं कर सके। बाद में फुर्सत मिलते ही उन्होंने कॉल बैक किया।
सांसद की शिकायत के अनुसार इस बातचीत में कटारिया का लहजा बेहद रूखा और अपमानजनक था। उन्होंने कहा कि कटारिया ने बातचीत में अहंकारपूर्ण ढंग से जवाब दिया।
जो करना है कर लो वाला बयान
सांसद के मुताबिक इसी बातचीत में अमित कटारिया ने कहा, जो करना है कर लो। सांसद ने इसे एक वरिष्ठ IAS (IAS – Indian Administrative Service) अफसर के आचरण के खिलाफ बताया। उन्होंने इसे संवैधानिक मूल्यों और संसदीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया।
सांसद ने अपनी शिकायत में यह भी लिखा कि जब एक सांसद के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम नागरिकों के साथ रवैया कैसा होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस अफसर के खिलाफ पहले भी जनप्रतिनिधियों की शिकायतें आती रही हैं।
सांसद की मांग क्या है
बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष से मामले को नियम 227 के तहत विशेषाधिकार समिति को भेजने की मांग की है। उन्होंने अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम, 1968 के तहत भी कार्रवाई की मांग की है। यह मांग कार्मिक विभाग से की गई है।
अब मामला कहां तक पहुंचा
लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक मंत्रालय को पत्र भेजा है। सचिवालय ने अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में फैक्चुअल नोट मांगा है, ताकि इसे लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखा जा सके। सचिवालय ने यह भी पूछा है कि क्या यह नोट सांसद को भी दिया जा सकता है।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और मुख्य सचिव विकास शील का इस मामले पर फिलहाल कोई बयान सामने नहीं आया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इस विषय पर आगे कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। यह स्पष्ट नहीं है कि सांसद ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी इसकी शिकायत की या नहीं।
अमित कटारिया का विवादों से पुराना नाता
अमित कटारिया हाल ही में केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के बाद छत्तीसगढ़ लौटे हैं। प्रशासन में उनकी छवि एक सख्त अफसर की मानी जाती है। लेकिन उनका विवादों से नाता नया नहीं है।
2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बस्तर दौरे पर आए थे, तब कटारिया बस्तर कलेक्टर थे। उन्होंने प्रधानमंत्री की अगवानी धूप के काले चश्मे के साथ की थी, जिसे गरिमा के प्रतिकूल माना गया। राज्य सरकार ने तब उन्हें आचार संहिता को लेकर नोटिस जारी किया था।
FAQ
- सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने किस पर आरोप लगाया है?
सांसद ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कटारिया ने फोन पर उनसे रूखा व्यवहार किया। सांसद ने इसकी शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से की है। - MP VS IAS विवाद कब शुरू हुआ था?
यह विवाद 20 मई को फोन पर हुई बातचीत के दौरान शुरू हुआ। सांसद के मुताबिक इसी दौरान कटारिया ने विवादित बात कही। अगले दिन सांसद ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
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