भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप चोरी : लाखों के जेवर और करोड़ों के दस्तावेज मिले
समझें क्या है पूरा मामला
Bhilai। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से लंबे समय से चल रहे संगठित स्क्रैप चोरी कांड में दुर्ग पुलिस की जांच ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है। लगातार जारी कार्रवाई में पुलिस ने ऐसे सबूत जुटाए हैं जिनसे इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक संरचना और अवैध कमाई का पैमाना सामने आने लगा है।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद करोड़ों रूपए की संपत्ति, महंगे आभूषण और निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध का नेटवर्क है।
लॉकर से मिले 50 लाख के जेवर और करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज
पुलिस जांच में सबसे अहम खुलासा मुख्य आरोपी संजय सिंह से जुड़ा सामने आया है। बताया जा रहा है कि उसके लॉकर से करीब 50 लाख रूपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और लगभग तीन करोड़ रूपए की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
इसके अलावा अन्य आरोपियों के पास से भी संपत्ति संबंधी कागजात मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक और वित्तीय जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह संपत्ति सीधे तौर पर बीएसपी से चोरी किए गए स्क्रैप की बिक्री से अर्जित की गई अवैध कमाई से जुड़ी हो सकती है।
फ्लाई डस्ट की आड़ में चलता था पूरा अवैध कारोबार
इस पूरे मामले की शुरुआत 26 मई 2026 को हुई, जब पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर हथखोज क्षेत्र में स्थित ए.के. ट्रेडर्स पर छापा मारा। जांच के दौरान ट्रकों और हाईवा वाहनों में फ्लाई डस्ट की आड़ में भारी मात्रा में बीएसपी से चोरी किया गया स्क्रैप पाया गया। इसमें लोहे की प्लेट, बीम और अन्य औद्योगिक सामग्री शामिल थी, जिसे व्यवस्थित तरीके से बाहर निकाला जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि फ्लाई डस्ट के वैध परिवहन की आड़ में चोरी का माल छिपाकर बाजार में बेचा जाता था। मौके से लगभग 250 टन स्क्रैप बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 90 लाख रूपए बताई गई है। वहीं ट्रांसपोर्ट, मशीनरी और अन्य संसाधनों को मिलाकर कुल जब्त संपत्ति 3 करोड़ 22 लाख रूपए से अधिक आंकी गई है।
फर्जी नंबर प्लेट से चल रहा था संगठित ट्रांसपोर्ट नेटवर्क
पुलिस की जांच में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है कि इस गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई जाती थीं। इसका उद्देश्य पहचान से बचते हुए स्क्रैप की अवैध ढुलाई करना था। छापेमारी के दौरान कई फर्जी नंबर प्लेट भी जब्त की गई हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। यह संकेत देता है कि गिरोह केवल चोरी तक सीमित नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित ट्रांसपोर्ट और बिक्री नेटवर्क भी संचालित कर रहा था।
यूपी तक फैला था नेटवर्क
मामले में 9 आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन मुख्य आरोपी संजय सिंह फरार चल रहा था। दुर्ग पुलिस की विशेष टीम ने उसे उत्तर प्रदेश के देवरिया क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद सात दिन की पुलिस रिमांड में उससे पूछताछ की गई, जिसमें गिरोह के अन्य सदस्यों अमित शर्मा उर्फ कैलाश शर्मा और आकाश कुमार सिंह की भूमिका सामने आई। इसके बाद इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि चोरी से प्राप्त धन को केवल खर्च नहीं किया गया, बल्कि उसे सोने-चांदी के आभूषण और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया, ताकि अवैध कमाई को वैध रूप देने की कोशिश की जा सके।
12 आरोपी गिरफ्तार, आर्थिक जांच और कुर्की की तैयारी
दुर्ग पुलिस के अनुसार अब तक इस पूरे मामले में कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच अभी भी जारी है और पुलिस का फोकस अब अवैध संपत्तियों की पहचान कर उनकी कुर्की की कार्रवाई पर है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस नेटवर्क से जुड़े और भी आर्थिक और आपराधिक पहलू सामने आ सकते हैं।
इस मामले ने न सिर्फ औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि संगठित गिरोह किस तरह बड़े संस्थानों के संसाधनों का दुरुपयोग कर आर्थिक अपराध को अंजाम दे सकते हैं।
IMP FACTS
गिरोह बीएसपी से संगठित तरीके से स्क्रैप चोरी करता था
फ्लाई डस्ट की आड़ में अवैध ट्रांसपोर्टिंग की जाती थी
मुख्य आरोपी के लॉकर से 50 लाख के जेवर मिले
करीब 3 करोड़ की अचल संपत्ति के दस्तावेज जब्त हुए
अब तक कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है
FAQ
- बीएसपी स्क्रैप चोरी मामले में क्या बड़ा खुलासा हुआ है?
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी गिरोह ने चोरी के पैसों से 50 लाख के जेवर और करीब 3 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेज खरीदे। इससे यह साफ हुआ कि यह सिर्फ चोरी नहीं बल्कि संगठित आर्थिक अपराध है। - चोरी का पूरा खेल कैसे चलाया जा रहा था?
आरोपी फ्लाई डस्ट की आड़ में बीएसपी से लोहे का स्क्रैप ट्रकों और हाईवा में बाहर निकालते थे। कागजों में इसे वैध माल दिखाकर बाजार में बेचा जाता था, जिससे लंबे समय तक यह अवैध कारोबार चलता रहा। - अब तक पुलिस ने कितनी कार्रवाई की है?
दुर्ग पुलिस ने अब तक इस मामले में कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी समेत कई लोगों की भूमिका सामने आने के बाद अब संपत्ति कुर्की और आगे की जांच तेज कर दी गई है।
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