छत्तीसगढ़ में सीमेंट-स्टील के दाम बेकाबू, गैस का संकट, 90% निर्माण कार्य हुआ ठप
NEWS IN SHORT
- गैस आपूर्ति में कमी और खाड़ी युद्ध का असर छत्तीसगढ़ पर।
- निर्माण सामग्री के दाम 20-25% तक बढ़े।
- प्रदेश में 90% डामरीकरण कार्य ठप होने की स्थिति में।
- गैस संकट से कई रोलिंग मिल, मिनी स्टील प्लांट, आयरन यूनिट प्रभावित।
- ठेकेदारों ने सरकार से टेंडर रेट रिवाइज करने की मांग की।
NEWS IN DETAIL
निर्माण कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक
छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्यों की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। गैस आपूर्ति में कमी और खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के प्रभाव ने अब सीधे तौर पर राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
सीमेंट, स्टील, डामर, बिजली वायर सहित कई निर्माण सामग्रियों की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी (cement price hike) दर्ज की गई है। इसके चलते निर्माण लागत करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है और कई परियोजनाएं ठप पड़ने की कगार पर पहुंच गई हैं।
सड़क निर्माण पर सबसे ज्यादा असर
प्रदेश में सबसे ज्यादा असर सड़क निर्माण परियोजनाओं पर देखने को मिल रहा है। बिटुमेन (डामर) की भारी कमी के कारण अधिकांश निर्माण एजेंसियां काम रोकने को मजबूर हैं। जिन ठेकेदारों के पास पहले से डामर का स्टॉक उपलब्ध है, वही सीमित स्तर पर काम कर पा रहे हैं, जबकि नई परियोजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं।
निर्माण सामग्री के दामों में भारी उछाल
पिछले दो महीनों में निर्माण सामग्री की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- स्टील: 55,000 रूपए/टन से बढ़कर 65,000 रूपए/टन
- सीमेंट: 270 रूपए से बढ़कर 340 रूपए प्रति बोरी
- बिटुमेन: 50,000 रूपए से बढ़कर 84,000 रूपए प्रति टन
इसके अलावा गिट्टी, टाइल्स और अन्य सामग्री भी महंगी हो गई हैं, जिससे कुल निर्माण लागत लगातार बढ़ रही है।
गैस संकट से उद्योगों का उत्पादन प्रभावित
गैस सिलेंडर की कमी ने मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल और स्पंज आयरन इकाइयों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कटिंग और वेल्डिंग जैसे जरूरी कार्य बाधित हो रहे हैं। उद्योग संचालकों के अनुसार उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के महासचिव मनीष धुप्पड़ ने बताया कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन और गिर सकता है।
ब्लैक मार्केट में दोगुनी कीमत पर गैस सिलेंडर
गैस की कमी का फायदा कालाबाजारी करने वाले उठा रहे हैं।
- सामान्य कीमत: लगभग 2100 रूपए
- ब्लैक मार्केट कीमत: 4000-5000 रूपए
उद्योगों को मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।
150 रोलिंग मिल और 120 स्टील प्लांट संकट में
प्रदेश में लगभग 150 रोलिंग मिल, 120 मिनी स्टील प्लांट, 70 स्पंज आयरन इकाइयां गैस संकट के कारण प्रभावित हो रही हैं। कई इकाइयों को सीमित स्तर पर उत्पादन करना पड़ रहा है।
ठेकेदारों ने उठाई रेट रिवाइज की मांग
निर्माण लागत में वृद्धि के चलते ठेकेदारों ने सरकार से टेंडर रेट संशोधित करने की मांग की है। उनका कहना है कि पुराने रेट पर काम करना घाटे का सौदा बन गया है।कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने चेतावनी दी है कि राहत नहीं मिली तो निर्माण कार्य पूरी तरह बंद हो सकते हैं।
बड़े प्रोजेक्ट भी हो रहे प्रभावित
महंगाई (CG inflation) और सामग्री की कमी का असर बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी साफ दिख रहा है। स्टेशन से सद्दाणी दरबार एक्सप्रेस-वे रिन्यूअल (17 करोड़) शुरू नहीं हो पा रहा कचना ओवरब्रिज लागत 1.60 करोड़ से बढ़कर 2.30 करोड़
आगे क्या
सरकार यदि जल्द गैस आपूर्ति सामान्य करने और निर्माण सामग्री की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाती है तो स्थिति में सुधार संभव है। साथ ही टेंडर रेट रिवाइज और एस्केलेशन क्लॉज के प्रभावी उपयोग से ठेकेदारों को राहत मिल सकती है और रुकी परियोजनाएं दोबारा गति पकड़ सकती हैं।
निष्कर्ष
गैस संकट और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने छत्तीसगढ़ के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को गंभीर चुनौती दी है। सड़क निर्माण से लेकर बड़े प्रोजेक्ट्स तक प्रभावित हो रहे हैं। यदि समय रहते ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो विकास कार्यों की गति लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है।
ये खबरें भी पढ़ें...
मिडिल ईस्ट में तनाव: भारत की खुदरा महंगाई दर 3.4% तक पहुंची, जानें किस राज्य में सबसे अधिक Dearness
पीथमपुर में फूटा मजदूरों का गुस्सा, महंगाई के आगे सैलरी कम, तीन कंपनियों में काम ठप