बारिश में बहे करोड़ों के बांध, चूहों का बहाना बेनकाब, नींव की कमजोरी पर उठे सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- बारिश में बह गए करोड़ों के बांध, नींव की मजबूती पर सवाल
- चूहों के बिल नहीं, कमजोर फाउंडेशन बना बांध टूटने की वजह?
- छत्तीसगढ़ में तीन बांध टूटे, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
- पानी का दबाव बढ़ा तो खुली पोल, मानकों से समझौते का आरोप
- करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं टिके बांध, जांच के घेरे में सिस्टम
रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए सिंचाई बांध बारिश के दबाव में लगातार टूट रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में एमसीबी, कोरिया और बलरामपुर जिले में तीन जल संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब इनकी मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बांध टूटने के बाद कई बार इसकी वजह पुराने निर्माण और चूहों के बिल को बताया जाता रहा है, लेकिन पड़ताल में मामला इससे अलग नजर आ रहा है। विशेषज्ञों और विभागीय जांच में बांधों की नींव की मजबूती पर सवाल उठे हैं। कई जगह फाउंडेशन को तय डिजाइन मानकों के अनुसार तैयार नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
नींव कमजोर होने से नहीं झेल पाए पानी का दबाव
किसी भी बांध की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है। निर्माण के दौरान नींव की गहराई, मिट्टी की गुणवत्ता और भराई का विशेष ध्यान रखना होता है। जानकारों के मुताबिक, कुछ जगहों पर डिजाइन लेवल तक खुदाई नहीं की गई और बेहतर गुणवत्ता वाली मिट्टी से भराई करने के बजाय स्थानीय मिट्टी का इस्तेमाल किया गया।
इसका असर यह हुआ कि तेज बारिश और पानी के दबाव में बांध कमजोर पड़ गए। लगातार पानी जमा होने से संरचना पर दबाव बढ़ा और कई जगह टूटने की स्थिति बन गई।
दस दिन के भीतर तीन बांध टूटे
छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में तीन अलग-अलग जिलों में बांध टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र में ग्राम पंचायत मसरा स्थित अमाकुंडी बांध तेज बारिश के दबाव में टूट गया। इससे आसपास के क्षेत्रों में पानी भर गया।
बलरामपुर जिले के तेतरडीह बांध का हिस्सा भी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। यह बांध जल ग्रहण मिशन के तहत बनाया गया था। बांध टूटने से किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई।
कोरिया जिले के छोटे साल्ही में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से बना बांध भी कुछ दिन पहले बह गया था। इसके निर्माण पर खर्च हुई बड़ी राशि के बावजूद संरचना के टूटने से गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
विभाग ने पुराने बांधों को बताया कारण
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अनिल खलखो का कहना है कि कई जल संरचनाएं पुरानी हो चुकी हैं और बारिश के ज्यादा दबाव के कारण क्षतिग्रस्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि बांधों की स्थिति की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में सुधार के प्रस्ताव भेजे गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद मरम्मत का काम कराया जाएगा।
चूहों के बिल वाले तर्क पर भी सवाल
बांध टूटने की घटनाओं के बाद अक्सर चूहों के बिल को कारण बताया जाता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चूहे बांधों में बिल बना देते हैं, जिससे पानी रिसने लगता है और संरचना कमजोर हो सकती है।
हालांकि मुख्य अभियंता ने भी माना कि अब तक ऐसी किसी घटना में चूहों के बिल की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बांध टूटने के वास्तविक कारणों की जांच कराई जा रही है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ सिंचाई विभाग का कहना है कि जिन बांधों और एनीकट में नुकसान हुआ है, उनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है। यदि निर्माण में किसी तरह की लापरवाही या तकनीकी कमी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
बारिश में बार-बार टूट रही जल संरचनाएं अब केवल मरम्मत का नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था का बड़ा सवाल बन गई हैं। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी यदि बांध पानी का दबाव नहीं झेल पा रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में कौन-कौन से बांध हाल ही में टूटे हैं?
एमसीबी के जनकपुर क्षेत्र का अमाकुंडी बांध, बलरामपुर का तेतरडीह बांध और कोरिया जिले का छोटे साल्ही बांध बारिश के दबाव में क्षतिग्रस्त हुए हैं। - बांध टूटने की मुख्य वजह क्या सामने आई है?
जांच में बांधों की नींव कमजोर होने, डिजाइन मानकों के अनुसार निर्माण नहीं होने और मिट्टी की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। - क्या बांध टूटने के लिए चूहों के बिल जिम्मेदार हैं?
विभाग ने चूहों के बिल की संभावना जताई थी, लेकिन अब तक किसी घटना में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक कारणों की जांच जारी है।
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