छत्तीसगढ़ में अब व्याख्याता और प्राचार्य नहीं बन पाएंगे DEO, शासन ने बदली व्यवस्था
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में डीईओ के पद पर सुधार, व्याख्याता और प्राचार्य नहीं होंगे नियुक्त
- स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुधार के लिए नया कैडर बनेगा
- डीईओ पद के लिए अब केवल प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी होंगे चयन
- व्याख्याता और प्राचार्य के डीईओ बनने से भ्रष्टाचार बढ़ने की संभावना
- डीईओ पदों के लिए सुधार की शुरुआत बलौदा बाजार, जशपुर और खैरागढ़ से होगी
NEWS IN DETAIL
Raipur। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में बड़े प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक और अहम फैसला लिया गया है। अब से व्याख्याता और प्राचार्य को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर, एक विशेष कैडर तैयार किया जाएगा, जिससे केवल प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी ही डीईओ बनाए जाएंगे। यह निर्णय विभाग की कार्यशैली और प्रशासनिक गुणवत्ता में सुधार के लिए लिया गया है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
राज्य में पिछले कुछ दशकों से यह परंपरा रही है कि व्याख्याता और प्राचार्य को डीईओ की जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन 25 साल बाद भी छत्तीसगढ़ में डीईओ का कोई स्थायी कैडर नहीं बन सका है। इस प्रणाली के कारण, कई बार प्रशासनिक अनुभव के अभाव में अधिकारी विभागीय जिम्मेदारियों को ठीक से निभाने में असमर्थ होते हैं। इसके परिणामस्वरूप, प्रशासनिक अनियमितताएँ और भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है।
वर्तमान व्यवस्था में यह देखा गया है कि शिक्षक अपनी पदोन्नति के लिए पैसे देते हैं और फिर डीईओ बनते हैं। इस प्रक्रिया के कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। जब इन्हें जिला शिक्षा अधिकारी की कुर्सी मिलती है, तो यह अक्सर अपने खर्चे को पूरा करने के लिए विभागीय नियमों का उल्लंघन करते हैं।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश
राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इसे गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि विभाग में सुधार के लिए अधिकारियों से डीईओ के लिए एक विशेष कैडर बनाने की योजना तैयार करने को कहा गया है। उनके अनुसार, यह कदम प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा ताकि शिक्षा विभाग में गड़बड़ियों को रोका जा सके।
हालांकि, यह भी सत्य है कि विभागीय भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। भ्रष्टाचार की जड़ें शिक्षा विभाग में बहुत गहरी हैं, लेकिन उम्मीद की जाती है कि प्रशासनिक रूप से प्रशिक्षित अधिकारी इसे बेहतर तरीके से नियंत्रित करेंगे।
शिक्षा विभाग में सुधार के प्रयास
मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे लोगों को ही डीईओ के पद पर नियुक्त किया जाए, जिनका प्रशासनिक अनुभव हो। इससे पहले, 2015 में व्यापम द्वारा एडिशनल बीईओ की भर्ती की गई थी, जिसमें कई लोग अब बीईओ के पद तक पहुँच चुके हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव उन्हें डीईओ पद पर बेहतर कार्य करने की क्षमता प्रदान करेगा।
कब से लागू होगा यह नया सुधार?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नई व्यवस्था की शुरुआत जल्द ही होने वाली है। फिलहाल, जिन तीन जिलों में डीईओ के पद खाली हैं—बलौदा बाजार, जशपुर और खैरागढ़—इनकी सूची तैयार की जा रही है। इसके बाद, जब अगले सुधार कार्यक्रम को लागू किया जाएगा, तब यह नया व्यवस्था पूरी तरह से लागू हो जाएगी।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग के प्रशासनिक सुधार के इस कदम से न केवल भ्रष्टाचार में कमी आएगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार होगा। विभागीय गड़बड़ियों पर काबू पाना और प्रशासनिक रूप से सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति से स्कूल शिक्षा का स्तर बेहतर हो सकता है।