सरकार की मलाई खा रहे हैं फर्जी जाति के अधिकारी, एससी-एसटी का सर्टीफिकेट बनवाकर पाई गवर्नमेंट जॉब
NEWS IN SHORT
- जाति पर उठे सवाल
- फर्जी जाति के आधार पर पाई सरकारी नौकरी
- जांच कमेटी कर रही 100 कर्मचारियों की जांच
- एससी,एसटी के जाति सर्टीफिकेट पर नौकरी
NEWS IN DETAIL
कसौटी पर 100 अधिकारियों की जाति :
छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य में 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी ऐसे पाए गए हैं जिन पर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी पाने का आरोप है।
सरकारी जांच समिति की पड़ताल में ये मामले सामने आए हैं। संबंधित कर्मचारियों के जाति प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपितों में विभिन्न विभागों के कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। जिन्होंने आरक्षण का लाभ उठाकर सरकारी सेवा में प्रवेश किया। वहीं कई कर्मचारी अदालत चले गए हैं। इन मामलों पर अदालत ने स्टे दिया है। लेकिन सरकार ने इन स्टे ऑर्डर को वैकेट करने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया है।
क्या कहती है सरकार :
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कहते हैं कि उच्च स्तरीय छानबीन समिति के सामने फर्जी प्रमाणपत्र (fake Caste certificate) के जरिए सरकारी नौकरी पाने वालों के प्रकरण सामने आए हैं। इन पर कार्यवाही और जांच चल रही है। कई लोग छानबीन समिति के आदेश के खिलाफ चले गए हैं। जहां पर उनको स्टे मिल गया है। सरकार ने स्थगन को वैकेट करने के लिए आवेदन दिया है।
इन पर फर्जी आदिवासी बनने का आरोप :
पद्म भूषण काशी, संयुक्त संचालक,नगरीय शासन
अंजना नायडू, संयुक्त संचालक, पशुपालन विभाग
कविता सोमावार, आदिवासी विभाग
एन डब्ल्यू हेनरी, एडिशनल चीफ इंजीनियर,विद्युत वितरण कंपनी
बलराम प्रसाद गोंड, कृषि विकास अधिकारी
मदनावति सेठ, प्राचार्य, स्कूल शिक्षा विभाग
कुंतिदेवी बैगा,ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी
संजय जैम्स, सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
जेपी पडवार,अतिरिक्त संचालक,गृह
अनिल कुमार बच्चन,ईई,पीएचई
इन पर फर्जी एससी बनने का आरोप :
शंकर कुमार सोनवानी,प्रबंधक,इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन
प्रकाशचंद्र रायकवाड़, रिटायर्ड सहायक संचालक,आवास एवं पर्यावरण
वासुदेव सिंह चौहान, जोन कमिश्नर,नगर पालिक निगम रायपुर
ज्योति भांटेकर, तकनीकी शिक्षा
पल्लवी मेश्राम, सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी
डॉ राजकुमार गडपायले, विषय वस्तु विशेषज्ञ,कृषि
सुखदास नाग, उप वन क्षेत्रपाल
शिखा शर्मा, प्रचार्य,उच्च शिक्षा
सिद्धार्थ मोतीराम पाटिल, रिटायर्ड रजिस्ट्रार,शिक्षा विभाग
नमिता दास, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी
अब आगे क्या :
सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है। साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में इस तरह की फर्जीवाड़ा रोकने के लिए प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक कड़ा किया जाएगा।
निष्कर्ष :
यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। बल्कि पात्र उम्मीदवारों के अधिकारों पर भी चोट पहुंचाने वाला है। लोग नौकरी पाने के लिए मेहनत करते हैं और अपात्र लोग फर्जी सर्टीफिकेट बनवाकर नौकरी पा जाते हैं। कभी दिव्यांग बनकर तो कभी आरक्षित जातियों के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर यह नौकरी पा जाते हैं। जब पता चलता है तब तक सरकारी नौकरी के कई साल निकल जाते हैं और मामला अदालत में अटक जाता है।
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