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Photograph: (THESOOTR)
इंदौर नगर निगम के वार्ड 65 के पार्षद कमलेश कालरा फर्जी जाति सर्टिफिकेट (fake caste certificate) मामले में उलझे हुए हैं। इस मामले में अब उनके अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि वह जवाब पेश कर रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने अब इसमें फाइनल सुनवाई के लिए केस 27 फरवरी को लगा दिया है।
ओबीसी सर्टिफिकेट पर है विवाद
वार्ड क्रमांक 65 के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा सिंधी समाज से हैं। उनके पास लोहार जाति से ओबीसी का जाति सर्टिफिकेट है। कालरा के लोहार जाति सर्टिफिकेट को लेकर कांग्रेस नेता सुनील यादव ने याचिका लगाई है। इसमें कालरा के लोहार जाति सर्टिफिकेट को फर्जी बताते हुए निरस्त करने की मांग को गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष यादव ने कहा कि इसमें हमारी मांग फाइनल सुनवाई का है।
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छानबीन समिति ने दे थी क्लीन चिट
यह मामला प्रशासन से होकर भोपाल शासन स्तर पर छानबीन समिति तक गया था। इसमें कालरा को छानबीन समिति ने क्लीन चिट दे दी थी। कांग्रेस नेता सुनील यादव ने छानबीन समिति के खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए जाति सर्टिफिकेट को निरस्त करने की मांग की है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि फर्जी लोहार जाति सर्टिफिकेट मामले में उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने प्रदेश सरकार के दबाव में कालरा के पक्ष में गोलमोल जवाब देते हुए कालरा का बचाव किया है। जिससे कालरा 5 साल पूरे कर ले लेकिन कालरा के पास 2009 के पहले का कोई भी ऐसा सरकारी दस्तावेज नहीं था। ए कि वो लोहार जाति से है।
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सूचना के अधिकार में यह दिया था जवाब
वहीं आदर्श सचान युवक ने मप्र शासन पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक विभाग के पास सूचना के अधिकार के तहत बीते साल 2025 में आवेदन लगाया था। इसमें ओबीसी वर्ग में सिंधी जाति शामिल है या नहीं इसकी जानकारी मांगी थी। इसमें विभाग द्वारा जवाब दिया गया था सिंधी जाती सम्मिलित नहीं है।
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कालरा और एमआईसी मेंबर जीतू का हुआ था विवाद
उल्लेखीय है कि कमलेश कालरा उस समय चर्चा में आए थे जब एमआईसी के तत्कालीन मेंबर जीतू यादव के साथ फोन पर लंबी बहस हुई थी। इसके बाद कुछ लोगों द्वारा कालरा के घऱ पर हमला किया गया था। जिसके बाद जीतू को पार्टी से बाहर कर दिया गया।
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