ओबीसी आरक्षण केस में 13 फीसदी होल्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अंतरिम राहत पर फैसला गुरुवार को

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण केस में सुप्रीम कोर्ट ने 13 फीसदी होल्ड के रिजल्ट को अनहोल्ड करने पर सुनवाई की। फैसला गुरुवार को होगा, जबकि अंतिम फैसला 18 मार्च को होगा।

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Sanjay Gupta
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Supreme Court said on 13 percent hold in OBC reservation case, decision on interim relief on Thursday

Photograph: (the sootr)

INDORE.मध्यप्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण केस में बुधवार18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें एक अहम निर्देश दिया गया है। ओबीसी वेलफेयर कमेटी और मप्र शासन की ओर से अंतरिम राहत मांगी गई है। यानी कि ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी मानते हुए 13 फीसदी होल्ड रिजल्ट को अनहोल्ड किया जाए। इस मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसपर गुरुवार को सुनवाई कर फैसला करेंगे। ओबीसी आरक्षण केस पर अंतिम बहस और फैसला 18 मार्च को भी करने की बात सुप्रीम कोर्ट ने कही। 

इस तरह हुई बहस शुरू

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस पी नरसिम्हा और जस्टिस ओलको अराधे की बेंच में यह सुनवाई हुई। इसमें पहले बात हुई कि इसे टाप ऑफ लिस्ट 18 मार्च को सुनेंगे और इसमें छत्तसीगढ़ मुद्दे को पहले सुना जाएगा। वह हो गया तो मप्र का भी तय हो जाएगा। लेकिन इस पर ओबीसी वेलफेयर कमेटी अधिवक्ता वरूण ठाकुर ने पुरानी बात कही कि 6 साल से मामला अटका है। नियुक्ति पाए हुए लोग इंतजार कर रहे हैं। कम से कम अंतरिम राहत दी जाए, जैसे की छत्तीसगढ़ पर दी गई है। 

इस पर अनारक्षित वर्ग ने ली आपत्ति

इस पर अनारक्षित वर्ग के अधिवक्ता अमन लेखी. शंकर नारायण, शंकर जैन तीनों ने विरोध किया। इन्होंने कहा कि मप्र और छत्तीसगढ़ का मामला अलग है। छत्तीसगढ़ में रिजल्ट आ गया और नियुक्ति दे दी गई है, लेकिन मप्र में ऐसा नहीं हुआ है। मप्र शासन से नियुक्त विशेष अधिवक्ता नटराजन द्वारा भी इसमें अंतरिम राहत देने की मांग की गई। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले अंतरिम राहत पर सुनवाई करते हैं। इसे गुरुवार 19 फरवरी को 101 नंबर पर सुनेंगे। वहीं फाइनल सुनवाई 18 मार्च को की जाएगी। 

क्या होगा असर

साल 2022 में मप्र शासन ने 87-13 फीसदी का फार्मूला लागू किया था। इसके बाद से ही मप्र में पीएससी और ईएसबी दोनों की हर भर्ती में 13 फीसदी पदों का रिजल्ट होल्ड है।

पीएससी में राज्य सेवा परीक्षा 2019 से ही यह पद होल्ड है। वहीं ईएसबी ने जनवरी 2023 से यह फार्मूला लागू कर दिया और पदों को होल्ड कर दिया। यदि अंतरिम राहत में 13 फीसदी का तय होता है तो यह रिजल्ट फिर अनहोल्ड हो सकेंगे। इसमें एक लाख से ज्यादा उम्मीदवार और हजारों पद उलझे हुए हैं। 

भर्ती  विज्ञापन में आरक्षण 27 फीसदी

एमपी में 27 फीसदी आरक्षण कमलनाथ सरकार के समय लागू हुआ लेकिन इसके बाद से ही केस चल रहा है। हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी जिसमें 14 फीसदी से ज्यादा ओबीसी आरक्षण पर रोक है। हालांकि हर भर्ती में मप्र आरक्षण एक्ट को लागू किया जाता है जिसके तहत 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण है।

अब यह 13 फीसदी पद किसके खाते में जाते हैं इस पर सभी की नजरें हैं। ओबीसी वेलफेयर कमेटी और मप्र शासन ओबीसी की बात कर रही है कि 27 फीसदी आरक्षण हो और यह पद ओबीसी के पास जाएं, वहीं अनारक्षित वर्ग 50 फीसदी आरक्षण की अधिकतम सीमा के संवैधानिक बेंच के फैसले का हवाला देकर यह पद उनके पाले में देने की मांग कर रहे हैं। 

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