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आज, 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी को 27% आरक्षण देने से जुड़ा केस फिर से सुना जाएगा। पिछली सुनवाई के बाद ओबीसी के वकीलों ने आरोप लगाया था कि सरकारी वकील कोर्ट में नहीं आए थे। हालांकि, सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि उनके वकील मौजूद थे। अब आज की सुनवाई में सरकार और ओबीसी के वकील कोर्ट में अपने-अपने तर्क रखेंगे।
बता दें कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक मिनट की सुनवाई हुई थी। इसके बाद ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। कांग्रेस और बीजेपी एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए नजर आए थे।
ओबीसी वेलफेयर सोसाइटी के आरोपों और कांग्रेस के बीजेपी सरकार पर निशाना साधने के बाद यह मामला बड़ा विवाद बन गया है। अब सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट में आखिर क्या हुआ, और इस सुनवाई ने आगे क्या मोड़ लिया? आइए, हम आपको बताते हैं…
कांग्रेस सरकार ने 27% OBC आरक्षण दिया, लेकिन BJP सरकार उसे सही तरह से लागू करने में पूरी तरह फेल साबित हुई ।
— Arun Subhashchandra Yadav (@MPArunYadav) February 4, 2026
जब सर्वदलीय बैठक में OBC हक पर सबकी सहमति थी, फिर भी सरकार के वकील जानबूझकर तारीख पर तारीख क्यों मांग रहे हैं ?
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद बहानेबाज़ी जारी है ।
मप्र… pic.twitter.com/z6tacNUOUG
जानें क्या हुआ था 29 जनवरी की सुप्रीम सुनवाई में
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस विजय विश्नोई की कोर्ट में यह केस 106वें नंबर पर लगा था। इसमें ओबीसी की तरफ से वरिष्ठ वकील अनूप चौधरी ने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि एक्ट लागू होना चाहिए इस पर रोक नहीं है।
- इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आज सुनवाई नहीं हो सकेगी है। (आज का मतलब 29 जनवरी)
- अधिवक्ता चौधरी ने कहा कि हम केवल अंतरिम राहत चाहते हैं कि एक्ट लागू हो।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केवल यही कह रहे हैं कि आज नहीं हो सकेगा बुधवार (4 फरवरी) को होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम कई बार सुन चुके हैं, फिर वही बात। अगला केस 107 सुनेंगे।
- इस पर अधिवक्ता ठाकुर ने कहा था कि इसे टॉप ऑफ लिस्ट रखा जाए।
- इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यही कहा था कि अगला केस 107 नंबर है।
- फिर वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी ने कहा था कि इसे टॉप ऑफ लिस्ट रखा जाए।
फिर कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम क्या कर सकते हैं? हर बार आप लोग समय लेते हैं और एडजर्न होता है। जब भी केस लगता है तो आप समय मांगते हैं। केवल आप नहीं, आपके सभी साथी भी समय मांग लेते हैं। तो फिर कोर्ट क्या कर सकता हैं, आप कोर्ट को नहीं अपने साथियों से कहिए।
ओबीसी वेलफेयर कमेटी के आरोप
ओबीसी वेलफेयर कमेटी ने आरोप लगाया कि हमारी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता जून चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर और अधिवक्ता वरुण ठाकुर मौजूद थे।
सरकार की ओर से जो नियुक्त अधिवक्ता हैं, वह शामिल नहीं हुए। वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी ने कहा कि ओबीसी केस 106 नंबर पर लगा था, लेकिन एमपी स्टेट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कोई वकील नहीं था।
इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा था कि स्टेट काउंसिंल को बुलाइए। वह तो आते नहीं हैं। इसके बाद अगले बुधवार, 04 फरवरी के लिए सुनवाई बढ़ गई है।
पूर्व सीएम कमलनाथ ने फिर घेरा
इसके बाद कांग्रेस सरकार में सीएम रहे कमलनाथ और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी सरकार को घेरा। कमलनाथ ने कहा कि एमपी की बीजेपी सरकार का दोहरा चेहरा फिर बेनकाब हुआ है।
प्रदेश सरकार की ओर से कोई शीर्ष वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ है। अपने मुख्यमंत्री काल में 27 फीसदी आरक्षण का कानून बनाया था, लेकिन बीजेपी सरकार इससे वंचित कर रही है। इस पर लगातार टालमटोल की जा रही है।
इधर बीजेपी ने वीडियो जारी कर दिया जवाब
वहीं कांग्रेस के हमलावर होते ही बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता आशीष उषा अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का एक मिनट का वीडियो अपलोड कर दिया।
साथ ही कहा कि झूठ बेनकाब हो गया है। बिल्कुल साफ है कि ओबीसी मामले की सुनवाई में सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज, स्टेंडिंग काउंसिल मृणाल अलंकार, एएजी धीरेंद्र परमार पूरी मजबूती से उपस्थित थे।
झूठ का झुनझुना बजाकर ओबीसी समाज को गुमराह करने की साजिश हो रही है। जो कांग्रेस ओबीसी आरक्षण रोकने की दोषी है, वहीं आज ओबीसी के हितैषी का नाटक कर रही है।
सरकार से नियुक्त वकील में कौन आया, कौन नहीं
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी एस नरसिम्हा व जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच में यह केस 106 वें नंबर पर था। इसमें ओबीसी समाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता जून चौधरी व अधिवक्ता वरुण ठाकुर थे। वहीं सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज, स्टेंडिंग काउंसिल मृणाल अंलाकरक, रुप्राह और एएजी धीरेंद्र परमार थे।
लेकिन एमपी सरकार ने 22 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन को नियुक्त किया है। उन्हें प्रति पेशी 5 लाख रुपए और वीसी के जरिए पेशी पर 1.5 लाख रुपए फीस तय की है।
वहीं 7 अक्टूबर को एक और आदेश जारी कर अटॉर्नी जनरल R. Venkataramani, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज और मध्यप्रदेश के एडिवोकेट जनरल प्रशांत सिंह को नियुक्त किया है। लेकिन यह सभी उपस्थित नहीं थे।
कांग्रेस के अधिवक्ता भी नहीं थे
इस मामले में ओबीसी की लड़ाई का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अगस्त 2025 में घोषणा की थी। कहा था कि कांग्रेस यह लड़ाई लड़ेगी। आगे कहा था कि अभिषेक मनु संघवी व विवेक तन्खा ओबीसी की पैरवी करेंगे। एक सुनवाई में संघवी उपस्थित भी हुए थे। इसके बाद कांग्रेस की ओर से भी तय अधिवक्ता किसी सुनवाई में नहीं गए हैं।
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