स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बयान पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने पूछा मोदी की गारंटी लागू क्यों नहीं कर रहे?

VINAY VERMA | Mar 18, 2026, 19:44 IST
Photograph: (the sootr)
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अतिथि शिक्षकों को लेकर हंगामा हुआ। शिक्षक नियमितीकरण का मुद्दा उठाते रहे, जबकि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव नियमों का हवाला दे रहे हैं। चुनाव से पहले भाजपा ने इसे लागू करने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

Raipur. छत्तीसगढ़ विधानसभा कार्रवाई के दौरान आज अतिथि शिक्षकों को लेकर खूब हंगामा हुआ। विपक्ष का रहा था कि जब नियमितीकरण का वादा मोदी की गारंटी में था। तो, सरकार उसे लागू क्यों नहीं कर रही? स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कहना था कि अतिथि शिक्षक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी नहीं है।



इसलिए उनका नियमितीकरण संभव नहीं होगा। जबकि गजेंद्र यादव ने मंत्री बनने से पहले स्कूल शिक्षा सचिव को इनके नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को पूरा करने को लेकर अनुशंसा की थी। अतिथि शिक्षक पूछ रहे हैं कि गजेंद्र यादव क्यों पलट गए?



प्रदेश में 1538 है अतिथि शिक्षक

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षकों की कमी को देखते हुए तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने अतिथि शिक्षकों की भर्ती की थी। इन अतिथि शिक्षकों को विद्यामितान का नाम दिया गया था। साल 2018 से ही यह नियमितीकरण की मांग कर रहे थे 2023 चुनाव से पहले भाजपा ने सरकार बनने के बाद उनके नियमितीकरण का वादा किया था।



अतिथि शिक्षकों का कहना है कि मोदी की गारंटी में इस बात का जिक्र था। लोकसभा चुनाव से पहले दुर्ग सांसद विजय बघेल ने अपने वचन पत्र में भी इनके नियमितीकरण के लिए कमेटी बनाने का वादा किया था। लेकिन 3 साल बाद भी ना तो कमेटी बनी और नहीं इनकी नियमितीकरण की प्रक्रिया हुई।



Modi's guarantee


गजेंद्र यादव ने खुद लिखा था लेटर

2023 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी दुर्ग से गजेंद्र यादव विधायक चुने गए इसके बाद गजेंद्र यादव ने स्कूल शिक्षा सच्ची को पत्र लिखकर अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की अनुशंसा की थी। लेकिन अब जब वे स्कूल शिक्षा मंत्री हैं तो नियमों का हवाला दे रहे हैं।



अब अतिथि शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा पाण्डेय का कहना है कि मंत्री क्यों पलट गए, हमे उनसे उम्मीदें हैं। इसके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव सिंह, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए, स्कूल शिक्षा सचिव को नियमित करने कहा था।



Education minister


2022 में बढ़ा था वेतन..

साल 2018 में अतिथि शिक्षकों की तरफ से नियमितीकरण की मांग उठी। जिसे 2019 चुनाव से पहले कांग्रेस ने भरपूर समर्थन दिया था। साल 2022 में इनके वेतन में 2000 रुपए की बढ़ोतरी जरूर की गई थी। लेकिन, नियमितीकरण फिर भी नहीं हुआ। हालांकि कांग्रेस के समय स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति की गई। जिसमें सैकड़ो की संख्या में अतिथि शिक्षक नौकरी पा गए।



निजी संस्था कर रही थी वेतन घोटाला

2016 में इनकी नियुक्ति नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लिए की गई थी। लेकिन तत्काल सरकार ने योजना का संचालन एक निजी कंपनी को दे दिया। इसके बाद यह ठेका कर्मचारियों के रूप में सेवा देने लगे। सरकार प्रति अतिथि शिक्षक के अनुसार ठेका कंपनी को पैसा देती। फिर बाद में ठेका कंपनी अतिथि शिक्षकों को भुगतान करती।



लेकिन, खुलासा हुआ कि ठेका कंपनी सरकार के द्वारा दिए गए पैसे में से लगभग 50% राशि खुद रख ले रही है। जिसके कारण से कंपनी को सालाना करीब 100 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा हो रहा है। कांग्रेस सरकार ने ठेका कंपनी को हटाकर इन्हें शाला विकास समिति के अंदर ला दिया।



दिन के हिसाब से मिलती है सैलरी

वैसे तो अतिथि शिक्षकों के लिए 20 हजार रुपए मासिक वेतन तय है। लेकिन, इनसे दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम लिया जा रहा है। इन्हें ना तो छुट्टी मिलती है और ना ही अन्य भत्ते दिए जाते हैं। अटेंडेंस नहीं मिलने होने पर 600 रु प्रतिदिन के हिसाब से काट लिए जाते हैं। गर्मी के 45 दिन भी इन्हें सैलरी नहीं दी जाती है।



अतिथि शिक्षकों की मांगे

  • इनकी 4 मांगो में पूरे 12 महीने का वेतन है।
  • प्रति महीने 2 सी एल अवकाश की पात्रता हो। जिसके कारण मनमाना बधुआ मजदूर की तरह सैलरी न काटा जाए।कैशबुक का संधारण हो..
  • 10 साल सेवा पूरी करने वालों को नियमित किया जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार महिला अतिथि शिक्षकों को मातृत्व अवकाश भी नहीं मिलता।

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