छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रद्द की राजस्व अफसर की 12 साल पुरानी नियुक्ति, CMO पिता ने बेटे को दी थी नौकरी
NEWS IN SHORT
- राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति को हाई कोर्ट ने निरस्त किया।
- CMO पिता ने खुद जारी किया बेटे का अनुभव प्रमाण पत्र।
- याचिकाकर्ता का आवेदन मिलने के बावजूद चयन सूची में शामिल नहीं किया गया।
- कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को संदिग्ध और सवाल खड़े करने वाला माना।
- हाईकोर्ट ने नई चयन प्रक्रिया शुरू कर करने का निर्देश दिया।
NEWS IN DETAIL
नियुक्ति प्रक्रिया को हाई कोर्ट में चुनौती
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा नगर पालिका में राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। यह मामला 2013 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसका आवेदन होने के बावजूद चयन सूची में नाम नहीं जोड़ा गया। मामला सामने आते ही चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे।
2012 में जारी हुआ था भर्ती का विज्ञापन
नगर पालिका परिषद भाटापारा ने 16 नवंबर 2012 को राजस्व उप निरीक्षक (अनारक्षित) पद के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस पद के लिए स्नातक एवं पीजीडीसीए अनिवार्य योग्यता तय की गई थी।
भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था, लेकिन पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
2013 में जारी हुआ नियुक्ति आदेश
नगर पालिका परिषद भाटापारा ने 23 मार्च 2013 को सतीश सिंह चौहान को राजस्व उप निरीक्षक पद पर नियुक्ति आदेश जारी कर दिया। इसके बाद देवेंद्र कुमार साहू ने अधिवक्ता मीन सिद्धीकी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई।
CMO पिता ने जारी किया बेटे का अनुभव प्रमाण पत्र
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ईशान सलूजा ने कोर्ट को बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों से स्पष्ट है कि देवेंद्र साहू का आवेदन विधिवत प्राप्त हुआ था।
साथ ही यह भी सामने आया कि, सतीश सिंह चौहान के पिता उस समय नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के पद पर पदस्थ थे, और उन्होंने ही अपने बेटे का अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया था, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (CG High Court)ने पाया कि याचिकाकर्ता का आवेदन उपलब्ध होने के बावजूद उसे पात्र या अपात्र सूची में शामिल नहीं करना गंभीर त्रुटि है।
कोर्ट ने यह भी माना कि सतीश सिंह चौहान के पक्ष में उनके पिता द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र चयन प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है और इससे पक्षपात की संभावना प्रबल होती है।
इसी आधार पर कोर्ट ने नियुक्ति आदेश को निरस्त कर नई और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं।
IMP FACTS
मामला: नगर पालिका परिषद भाटापारा
पद: राजस्व उप निरीक्षक
नियुक्ति वर्ष: 2013
विज्ञापन जारी: 16 नवंबर 2012
याचिकाकर्ता: देवेंद्र कुमार साहू
नियुक्त अभ्यर्थी: सतीश सिंह चौहान
आदेश: हाई कोर्ट ने नियुक्ति निरस्त की
निर्देश: नई चयन प्रक्रिया और याचिकाकर्ता पर विचार
आगे क्या
अब नगर पालिका परिषद भाटापारा को हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार नई और पारदर्शी चयन प्रक्रिया शुरू करनी होगी। साथ ही देवेंद्र कुमार साहू की उम्मीदवारी पर विधिवत विचार कर नया नियुक्ति आदेश जारी करना होगा।
निष्कर्ष
भाटापारा नगर पालिका की राजस्व उप निरीक्षक नियुक्ति में सामने आए पद के दुरुपयोग के मामले पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी नियुक्तियों में निष्पक्षता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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