RTE एडमिशन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा 25 हजार बच्चों का डेटा
NEWS IN SHORT
- RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया सत्र शुरू होने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है।
- हाईकोर्ट ने अधूरी जानकारी देने पर राज्य सरकार पर नाराजगी जताई।
- कोर्ट ने सभी स्कूलों के बच्चों की पूरी सूची पेश करने के निर्देश दिए।
- राज्य में 6,861 स्कूलों में 38,439 आवेदन आए, जबकि 21,698 सीटें उपलब्ध।
- मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को तय की गई।
NEWS IN DETAIL
सत्र शुरू, लेकिन RTE प्रवेश प्रक्रिया अधूरी
छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है, लेकिन शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत प्रवेश प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इससे गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष संयुक्त सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि अब तक करीब 25 हजार बच्चों को प्रवेश दिया जा चुका है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सभी बच्चों का पूरा डेटा मांगा है।।
हाईकोर्ट ने मांगी पूरी सूची
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल आंकड़ों से काम नहीं चलेगा। किन बच्चों को किस स्कूल में प्रवेश दिया गया है, इसकी पूरी सूची कोर्ट में पेश करनी होगी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, तो अब तक सभी पात्र बच्चों का प्रवेश क्यों नहीं कराया गया। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
सरकार के शपथ पत्र में क्या जानकारी दी गई
राज्य सरकार द्वारा पेश शपथ पत्र के अनुसार
- प्रदेश के 6,861 स्कूलों में कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए
- RTE के तहत 21,698 सीटें उपलब्ध हैं
- 25,550 आवेदन स्वीकृत किए गए
- 7,066 आवेदन खारिज हुए
- 2,045 आवेदन लंबित हैं
कई जिलों में सत्यापन की प्रक्रिया बेहद धीमी है, जहां 10% से भी कम आवेदन सत्यापित हो सके हैं। सरकार ने पहले 80,000 सीटों की बात कही थी, लेकिन बाद में कोर्ट में बताया गया कि केवल 21,698 सीटें ही उपलब्ध हैं, जिससे हजारों सीटें खाली होने का मुद्दा उठा।
निजी स्कूलों पर मनमानी के आरोप
एक स्कूली छात्रा ने हस्तक्षेप याचिका में सेंट जेवियर्स स्कूल पर आरोप लगाया कि RTE के तहत प्रवेश लेने आने वाले बच्चों को सरकारी स्कूल जाने की सलाह दी जाती है।
वहीं, डीईओ दुर्ग की रिपोर्ट में बताया गया कि श्री शंकरा विद्यालय भिलाई के खिलाफ शिकायतों की जांच की गई। कुल 118 शिकायतों में से 77 का निराकरण किया जा चुका है।
नारायणा स्कूल बिलासपुर की मान्यता का मामला
शपथ पत्र में बताया गया कि नारायणा स्कूल बिलासपुर को नर्सरी से कक्षा 8 तक मान्यता प्राप्त है और 1 अप्रैल 2026 से स्कूल को CBSE से संबद्धता मिल चुकी है। इससे जुड़े मामलों की जांच के लिए जॉइंट डायरेक्टर स्तर की समिति गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट अभी लंबित है।
Sootr Knowledge
- RTE अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं।
- RTE का लाभ 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मिलता है।
- निजी स्कूलों को RTE सीटों पर प्रवेश देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- RTE के तहत पढ़ने वाले बच्चों की फीस सरकार द्वारा वहन की जाती है।
- प्रवेश से इनकार करने पर स्कूल की मान्यता तक रद्द हो सकती है।
आगे क्या
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सभी स्कूलों और प्रवेशित बच्चों की पूरी सूची अगली सुनवाई से पहले पेश की जाए। इसके आधार पर कोर्ट आगे सख्त निर्देश जारी कर सकता है।
निष्कर्ष
RTE प्रवेश प्रक्रिया (CG RTE Admission) में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अधूरी जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि समय पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो सरकार और संबंधित विभागों पर सख्त कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
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