छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; वॉक टेस्ट में फेल अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगा दूसरा मौका

Umeshwari Baghel | May 03, 2026, 15:58 IST
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सीजी हाई कोर्ट ने वन विभाग भर्ती में वॉक टेस्ट में फेल अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन सर्वोपरि है।

NEWS IN SHORT

  • हाई कोर्ट ने फेल अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देने से इनकार किया
  • कोर्ट ने नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है
  • वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों को मिलेगा मौका
  • सरकार ने वापस लिया दूसरा मौका देने का आदेश
  • हाई कोर्ट ने फिजिकल परीक्षा की पारदर्शिता पर जोर दिया है

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने वन विभाग की 2020 की भर्ती प्रक्रिया के तहत शारीरिक दक्षता परीक्षा (वॉक टेस्ट) में फेल होने वाले अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देने से



इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का पालन सर्वोपरि है, और नियमों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।



क्या है मामला?

सीजी पीएससी (cgpsc) ने जून 2020 में छत्तीसगढ़ वन सेवा (राजपत्रित) के तहत असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और फॉरेस्ट रेंजर के पदों के लिए भर्ती का विज्ञापन जारी किया था।



नियमों के अनुसार, पुरुष अभ्यर्थियों को 4 घंटे में 26 किलोमीटर और महिला अभ्यर्थियों को 4 घंटे में 16 किलोमीटर पैदल चलना अनिवार्य था।



यह वॉक टेस्ट 12 सितंबर 2023 को आयोजित किया गया, जिसमें कई अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर वॉक पूरा नहीं कर पाए थे और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।



(वन विभाग भर्ती परीक्षा) इन अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दायर की और गर्मी, सड़कों पर भारी ट्रैफिक और पानी की कमी जैसी समस्याओं का हवाला देते हुए दूसरे मौके की मांग की थी।



सरकार का आदेश और हाई कोर्ट का निर्णय

(वन विभाग भर्ती छत्तीसगढ़) शुरुआत में राज्य सरकार ने 18 जनवरी 2024 को इन अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देने का आदेश जारी किया था। लेकिन बाद में इस निर्णय को प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।



अंततः सामान्य प्रशासन विभाग की सलाह और भर्ती नियमों में ऐसा कोई प्रावधान न होने के कारण सरकार ने 20 जून 2024 को अपना आदेश वापस ले लिया।



हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भर्ती नियमों में वॉक टेस्ट के लिए दूसरा अवसर देने का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि खेल के नियम परीक्षा के दौरान नहीं बदले जा सकते।



सभी 211 अभ्यर्थियों ने एक ही परिस्थितियों में परीक्षा दी थी, इसलिए केवल असफल अभ्यर्थियों को दूसरा मौका देना पारदर्शी चयन प्रक्रिया के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।



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आगे क्या होगा?

अब, उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, जो पद शारीरिक परीक्षा में अनुपस्थित रहने या फेल होने के कारण रिक्त हो गए थे, उन्हें वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों से भरा जाएगा।



हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि पीएससी की सिफारिशों के आधार पर इन पदों को जल्द से जल्द वेटिंग लिस्ट से भरा जाए।



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