आरटीई फंड पर गरमाई सियासत: 31 हजार बच्चों के 1.84 करोड़ की जांच के आदेश

Umeshwari Baghel | Aug 10, 2026, 18:03 IST
बिलासपुर में RTE फंड का बड़ा खेल
छत्तीसगढ़ के एक जिले में RTE के 31,191 बच्चों की ड्रेस और किताबों के लिए जारी 1.84 करोड़ रुपए की राशि जांच के घेरे में है। 562 निजी स्कूलों में फंड के उपयोग और बच्चों तक लाभ पहुंचने की स्थिति की पड़ताल की जाएगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • RTE फंड की होगी जांच, 1.84 करोड़ रुपए पर सवाल
  • 31 हजार बच्चों की राशि पर उठे सवाल, स्कूल जांच में
  • RTE के पैसे का हिसाब देंगे 562 निजी स्कूल
  • ड्रेस-किताब के फंड में गड़बड़ी की आशंका, जांच शुरू
  • बच्चों के हक की राशि पहुंची या नहीं, होगी पड़ताल

छत्तीसगढ़ के एक जिले में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले RTE बच्चों के लिए जारी राशि को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत ड्रेस और किताबों के लिए तय करीब 1.84 करोड़ रुपए के उपयोग की जांच की तैयारी शुरू हो गई है। इस मामले में जिले के 562 निजी स्कूलों की भूमिका की जांच होगी।



वर्ष 2025-26 में जिले के निजी स्कूलों में RTE के तहत 31,191 विद्यार्थी पढ़ रहे थे। शासन की ओर से प्रत्येक विद्यार्थी के लिए गणवेश और किताबों की राशि निर्धारित की गई थी। अब यह पता लगाया जाएगा कि यह राशि वास्तव में बच्चों तक पहुंची या नहीं।



प्रति बच्चे 791 रुपए का प्रावधान

RTE के तहत पढ़ने वाले बच्चों के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग मद में सहायता राशि दी जाती है। इसमें प्रत्येक विद्यार्थी के लिए गणवेश के लिए 541 रुपए और किताबों के लिए 250 रुपए तय हैं।



इस हिसाब से एक बच्चे के लिए कुल 791 रुपए की राशि निर्धारित होती है। जिले में 31,191 बच्चों के अनुसार यह राशि करीब 1.84 करोड़ रुपए तक पहुंचती है। इतनी बड़ी राशि को लेकर अब स्कूलवार रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।



स्कूलों के खातों में पहुंचती है राशि

जानकारी के अनुसार RTE बच्चों से जुड़ी राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित निजी स्कूलों को जारी की जाती है। इसके बाद स्कूल प्रबंधन को बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों पर इसका उपयोग करना होता है।



अब जांच में यह देखा जाएगा कि स्कूलों ने राशि का उपयोग किस तरह किया। क्या बच्चों को ड्रेस और किताबों का लाभ मिला या नहीं, इसकी भी जानकारी जुटाई जाएगी।



अभिभावकों ने उठाए सवाल

कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें ड्रेस और किताबों के लिए मिलने वाली सहायता राशि की जानकारी नहीं दी गई। कई पालकों का कहना है कि उन्हें अपनी जेब से बच्चों के लिए जरूरी सामग्री खरीदनी पड़ी।



ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि सरकार की ओर से सहायता राशि जारी की गई थी तो उसका लाभ बच्चों तक क्यों नहीं पहुंचा। अब जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।



बड़े स्कूलों में हजारों रुपए की राशि

जिले के कई बड़े निजी स्कूलों में RTE विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। ऐसे स्कूलों में ड्रेस और किताबों की राशि भी काफी ज्यादा बनती है। कुछ स्कूलों में यह राशि 40 हजार रुपए से लेकर 62 हजार रुपए तक होने की जानकारी सामने आई है। इसलिए सभी स्कूलों से भुगतान और खर्च से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।



सत्यापन प्रक्रिया पर भी नजर

RTE के तहत प्रवेश और भुगतान की प्रक्रिया में सत्यापन महत्वपूर्ण चरण होता है। नोडल अधिकारियों के सत्यापन के बाद ही राशि जारी की जाती है। अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि सत्यापन के दौरान किन दस्तावेजों की जांच हुई। साथ ही राशि जारी होने के बाद निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।



नए सत्र में भी जारी है प्रवेश प्रक्रिया

वर्ष 2026-27 के लिए भी RTE प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। जिले के 562 निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए 4,241 आवेदन मिले हैं। इन स्कूलों में RTE के तहत 2,237 सीटें निर्धारित हैं। इनमें से अब तक 1,404 बच्चों का प्रवेश हो चुका है। वहीं 833 सीटें अभी खाली हैं।



जांच के बाद सामने आएगी हकीकत

RTE योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर देना है। इसके लिए सरकार स्कूलों को सहायता राशि उपलब्ध कराती है।



अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि 1.84 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग तय उद्देश्य के अनुसार हुआ या नहीं। यदि गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित स्कूलों पर कार्रवाई की जा सकती है।



FAQ

  1. RTE फंड मामले में कितनी राशि की जांच हो रही है?
    इस मामले में करीब 1.84 करोड़ रुपए की राशि के उपयोग की जांच होगी।
  2. RTE फंड की जांच किन स्कूलों में की जाएगी?
    जिले के 562 निजी स्कूलों में राशि के उपयोग की पड़ताल की जाएगी।
  3. RTE बच्चों के लिए कितनी राशि निर्धारित है?
    प्रत्येक बच्चे के लिए ड्रेस और किताबों के लिए कुल 791 रुपए तय हैं।

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