छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : निजी स्कूलों को RTI से मिली बड़ी राहत

Umeshwari Baghel | Jun 21, 2026, 14:59 IST
Share
निजी स्कूलों को आरटीआई से बड़ी राहत
निजी स्कूलों को आरटीआई से बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CIC का आदेश रद्द करते हुए कहा कि केवल फीस प्रतिपूर्ति या सीमित सरकारी मदद से निजी स्कूल RTI के दायरे में नहीं आते। इसके लिए सरकारी नियंत्रण या पर्याप्त वित्तपोषण जरूरी है। यह फैसला निजी शिक्षण संस्थानों के लिए बड़ी राहत है।

समझें क्या है पूरा मामला

Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में निजी स्कूलों को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे से जुड़ी बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि हर निजी शिक्षण संस्था को आरटीआई के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता।

इसके लिए जरूरी है कि संस्था पर सरकार का व्यापक नियंत्रण हो या उसे पर्याप्त सरकारी वित्तपोषण मिल रहा हो। केवल फीस प्रतिपूर्ति या सीमित वित्तीय सहायता के आधार पर किसी स्कूल को RTI के दायरे में नहीं लाया जा सकता।

यह फैसला कोरबा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल से जुड़े एक मामले में आया है, जिसे अब देशभर के निजी और स्व-वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मामला कैसे शुरू हुआ और विवाद क्यों बढ़ा

पूरा विवाद एक पूर्व कर्मचारी की सेवा समाप्ति के बाद शुरू हुआ था। कर्मचारी के परिजनों ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत स्कूल से प्रशासनिक और सेवा संबंधी जानकारी मांगी थी। लेकिन स्कूल की ओर से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद मामला केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) तक पहुंच गया।

CIC ने सुनवाई के बाद यह माना कि स्कूल को सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में रखा जा सकता है और इसी आधार पर उसके प्राचार्य को डीम्ड पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर घोषित कर दिया गया था। इसके साथ ही सूचना न देने पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।

स्कूल प्रबंधन ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया और कहा कि संस्था एक निजी, स्व-वित्तपोषित इकाई है, जिसे सरकारी संस्था की तरह बाध्य नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट की टिप्पणी और कानूनी आधार

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी संस्था को RTI के दायरे में लाने के लिए केवल वित्तीय संबंध पर्याप्त नहीं होते। अदालत ने कहा कि यह देखा जाना जरूरी है कि क्या संस्था पर सरकार का गहरा और वास्तविक नियंत्रण है या उसे पर्याप्त सरकारी सहायता मिल रही है।

कोर्ट ने पाया कि डीएवी पब्लिक स्कूल का संचालन दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसाइटी द्वारा किया जाता है और यह पूरी तरह से निजी प्रबंधन के तहत काम करता है। स्कूल को जो सहायता मिलती है, वह केवल कर्मचारियों के बच्चों को रियायती शिक्षा देने या सीमित वित्तीय समायोजन तक ही सीमित है।

अदालत ने यह भी माना कि इस तरह की सहायता को पर्याप्त सरकारी वित्तपोषण नहीं कहा जा सकता। इसलिए RTI अधिनियम की धारा 2(एच) के तहत इसे सार्वजनिक प्राधिकरण मानना गलत होगा।

CIC का आदेश क्यों पलटा गया

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को कानूनी रूप से असंगत माना। अदालत ने कहा कि CIC ने संस्था की प्रकृति और वित्तीय संरचना को ठीक से परखे बिना उसे RTI के दायरे में शामिल कर दिया था।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने न केवल CIC का आदेश रद्द किया, बल्कि लगाए गए जुर्माने को भी निरस्त कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार क़ानूनी पारदर्शिता के लिए है, लेकिन इसे हर निजी संस्था पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

फैसले का व्यापक प्रभाव और कानूनी संकेत

यह निर्णय देशभर के निजी स्कूलों और स्व-वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल सरकारी सहयोग या सीमित वित्तीय व्यवस्था के आधार पर किसी निजी संस्था को सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला RTI कानून की व्याख्या को और स्पष्ट करता है और यह भी तय करता है कि सरकारी नियंत्रण और वित्तीय निर्भरता की सीमा क्या होगी। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी भ्रम की स्थिति कम होने की संभावना है।

शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता के बीच संतुलन

इस फैसले ने एक बार फिर यह परेशानी खड़ी कर दी है कि निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता की सीमा क्या होनी चाहिए। एक तरफ सूचना का अधिकार नागरिकों को पारदर्शिता देता है, वहीं दूसरी तरफ निजी संस्थानों की स्वायत्तता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हाईकोर्ट का यह फैसला इसी संतुलन की ओर इशारा करता है, जहां पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता दोनों के बीच स्पष्ट कानूनी रेखा खींची गई है।

यह निर्णय आने वाले समय में RTI से जुड़े कई मामलों की दिशा तय कर सकता है, खासकर उन मामलों में जहां निजी संस्थानों और सरकारी सहायता के बीच सीमित वित्तीय संबंध होते हैं।

IMP FACTS

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CIC का आदेश रद्द किया
निजी स्कूल केवल फीस प्रतिपूर्ति से RTI में नहीं आएंगे
RTI लागू करने के लिए सरकारी नियंत्रण या पर्याप्त वित्तपोषण जरूरी
डीएवी पब्लिक स्कूल को लेकर यह मामला था
CIC ने स्कूल को public authority माना था, जिसे कोर्ट ने गलत ठहराया
सूचना न देने पर लगाया गया 5000 रुपए का जुर्माना भी हटाया गया
फैसला निजी व स्व-वित्तपोषित स्कूलों के लिए अहम मिसाल बना

FAQ

  1. क्या सभी निजी स्कूल RTI के दायरे में आते हैं?
    नहीं, केवल वे स्कूल आते हैं जिन पर सरकार का नियंत्रण या पर्याप्त वित्तीय सहायता हो।
  2. इस मामले में हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CIC का आदेश रद्द कर दिया और कहा कि केवल फीस प्रतिपूर्ति से स्कूल RTI में नहीं आते।
  3. इस फैसले का क्या असर होगा?
    यह फैसला निजी और स्व-वित्तपोषित स्कूलों को RTI से जुड़ी कानूनी बाध्यताओं से बड़ी राहत देता है।

यह खबरें भी पढ़े...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; लव मैरिज करने वाले जोड़े को सुरक्षा देने के लिए SP को निर्देश

सैलरी डेटा देने में NTA के छूटे पसीने, RTI में कानून का हवाला देकर पल्ला झाड़ा

बिलासपुर में भीषण ट्रेन हादसा: मालगाड़ी से टकराई कोरबा लोकल, 8 की मौत, कई लोग घायल

1 जुलाई से बिना टिकट सफर करने पर दोगुना जुर्माना: जानें रेलवे के नए नियम

Tags:
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • कोरबा
  • स्वतंत्रता
  • जुर्माना
  • RTI
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा