स्कूलों से आवारा कुत्ते हटाएं, सरकार को देनी है रिपोर्ट, शासन में बेचैनी

VINAY VERMA | Jul 22, 2026, 20:05 IST
छत्तीसगढ़ के स्कूलों से आवारा कुत्ते हटाने के सख्त निर्देश
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्ते हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। सभी DEO को जुलाई अंत तक SAMIS पोर्टल पर जिलावार रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। 22 सितंबर को हाईकोर्ट में सरकार हलफनामा पेश करेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। छत्तीसगढ़ में स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा अब सीधे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर न्यायपालिका की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को जुलाई के अंत तक विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, क्योंकि सितंबर में हाईकोर्ट में सरकार को हलफनामा पेश करना है। यानी अब जिलों की लापरवाही सीधे अदालत के सामने उजागर होगी।



हाईकोर्ट ने मांगा अपडेट, सरकार ने जिलों को दौड़ाया

सामान्य प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने जिले की जानकारी SAMIS पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करें। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित सुओ मोटू रिट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चल रही है। अदालत ने अगली सुनवाई से पहले जिलावार हलफनामा मांगा है।



1100 हेल्पलाइन से जुड़े सभी विभाग

सरकार ने आवारा कुत्तों से जुड़ी शिकायतों, प्राथमिक उपचार और त्वरित कार्रवाई के लिए 'निदान' हेल्पलाइन 1100 को प्रमुख माध्यम बनाया है। स्कूलों सहित सभी संबंधित विभागों को इस हेल्पलाइन से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी घटना की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसी तक पहुंचे और कार्रवाई में देरी न हो।



सरकार ने गिनाए अपने काम

सरकार ने अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों में दावा किया है कि प्रदेश में फिलहाल 34 एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर और 199 डॉग शेल्टर संचालित हो रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 4,340 पशुओं की है। 30 जून 2026 तक 30,651 कुत्तों का नसबंदी, 50,362 का एंटी-रेबीज टीकाकरण और 42,263 का डी-वॉर्मिंग किया जा चुका है।



स्कूलों की सुरक्षा पर भी फोकस

राज्य सरकार के मुताबिक प्रदेश के 51,160 चिन्हित संस्थानों में से 49,458 में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा चुके हैं और वहां चेतावनी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। वहीं 44,204 संस्थानों में बाउंड्रीवॉल या फेंसिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि आवारा पशु परिसर में प्रवेश न कर सकें। इसके अलावा छात्रों के लिए 7,126 और कर्मचारियों के लिए 5,663 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।



22 सितंबर को होगी अग्निपरीक्षा

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 से पहले जिलावार रिपोर्ट और शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाए। ऐसे में अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर है। यदि किसी जिले ने समय पर जानकारी नहीं दी या जमीनी स्तर पर निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो सरकार को अदालत में जवाब देना मुश्किल पड़ सकता है। यानी इस बार केवल कागजी रिपोर्ट नहीं, बल्कि स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था भी न्यायिक जांच के दायरे में रहेगी।



FAQ

  1. स्कूलों से आवारा कुत्ते हटाने के निर्देश क्यों दिए गए हैं?
    प्रदेश में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने स्कूल परिसरों की निगरानी बढ़ाई है।
  2. जिला शिक्षा अधिकारियों को रिपोर्ट कब तक देनी है?
    सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जुलाई 2026 के अंत तक जिलावार जानकारी देनी है। यह रिपोर्ट SAMIS पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड की जाएगी।
  3. सरकार हाईकोर्ट में कब हलफनामा पेश करेगी?
    राज्य सरकार को 22 सितंबर 2026 की सुनवाई से पहले हलफनामा पेश करना है। इसमें स्कूलों की सुरक्षा और आवारा कुत्तों पर की गई कार्रवाई का विवरण होगा।

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