छत्तीसगढ़ के शक्कर मिलों पर 267 करोड़ का बोझ; किसानों का 83 करोड़ बकाया, 10 दिन में भुगतान नहीं तो तालाबंदी की चेतावनी
NEWS IN SHORT
- सहकारी शक्कर मिलों में 267 करोड़ का घाटा, किसानों ने दिया अल्टीमेटम
- 83 करोड़ की बकाया राशि, 10 दिन में भुगतान नहीं तो होगा विरोध प्रदर्शन
- शक्कर उत्पादन में भारी गिरावट, उचित मूल्य दुकानों में संकट
- केंद्र सरकार के नियमों का उल्लंघन, 15 दिन में भुगतान की अनिवार्यता
- भोरमदेव और पंडरिया मिलों में करोड़ों का बकाया, किसानों को नहीं मिला पूरा भुगतान
NEWS IN DETAIL
Raipur। छत्तीसगढ़ में संचालित सहकारी (sugar mill )शक्कर कारखाने इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इन कारखानों में इस समय 267 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है
जिससे इनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई है। पहले से ही बंद होने की कगार पर खड़े इन कारखानों को अब गन्ना आपूर्ति करने वाले कई किसान भी अपने गन्ने की आपूर्ति से हाथ खींच चुके हैं।
किसानों ने दिया 10 दिनों का अल्टीमेटम
मिलों पर किसानों का 83 करोड़ 39 लाख रुपए का बकाया है, जो कई वर्षों से चुकता नहीं किया गया है। इसका असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है, और वे लगातार दबाव बना रहे हैं।
किसानों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 10 दिनों के अंदर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वे राज्य के सभी शक्कर कारखानों में ताला लगाकर (किसान आंदोलन)विरोध प्रदर्शन करेंगे।
किसानों के बकाया भुगतान का आंकड़ा
भोरमदेव शुगर मिल : 25,58,188.87 मीट्रिक टन गन्ना खरीदा गया था, जिसमें 84.18 करोड़ रुपए की खरीदारी हुई, जबकि 57.49 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। अब भी 26.69 करोड़ रुपए बकाया हैं।
पंडरिया शक्कर कारखाना : 1,21,721.64 मीट्रिक टन गन्ना खरीदा गया, जिसमें 40.05 करोड़ रुपए में से 13.73 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। 26.32 करोड़ रुपए अब भी बकाया हैं।
15 दिनों के अंदर भुगतान वरना तालाबंदी
शक्कर कारखाना घाटा :केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, किसानों को 15 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है। लेकिन राज्य के शक्कर कारखानों द्वारा भुगतान में कई महीनों की देरी हो चुकी है।
प्रदेश महामंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के अंदर भुगतान नहीं किया गया, तो राज्य की चारों शक्कर मिलों में ताले लगाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
शक्कर उत्पादन में भारी गिरावट
कारखानों के घाटे के कारण गन्ना आपूर्ति में कमी आई है, जिससे शक्कर उत्पादन में भी भारी गिरावट आई है। इसका असर प्रदेश की उचित मूल्य दुकानों पर भी पड़ा है।
इन दुकानों में अब शक्कर का भंडारण नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण प्रदेश के 50-60 प्रतिशत हितग्राहियों को शक्कर नहीं मिल रही है।
इस वर्ष शक्कर उत्पादन में आई गिरावट
इस वर्ष 2025-26 में शक्कर उत्पादन का लक्ष्य 12 लाख 64 हजार मीट्रिक टन था, लेकिन अब तक केवल 56,707 मीट्रिक टन शक्कर ही उत्पादन हुआ है। विभिन्न कारखानों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
भोरमदेव शुगर मिल : 2022 में 4 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 38,552 मीट्रिक टन शक्कर का उत्पादन हुआ, 2023 में 43,393.4 मीट्रिक टन और 2024 में 25,901.4 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ।
सरदार पटेल शुगर मिल : 2022 में 4 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 33,690 मीट्रिक टन शक्कर, 2023 में 3 लाख 50 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 43,393 मीट्रिक टन, और 2024 में 4 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 16,451.95 मीट्रिक टन शक्कर उत्पादन हुआ।
मां महामाया शुगर मिल: 2022 में 3.5 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 23,807.35 मीट्रिक टन, 2023 में 26,030 मीट्रिक टन, और 2024 में 18,398 मीट्रिक टन शक्कर का उत्पादन हुआ।
दंतेश्वरी शुगर मिल : 2022 में 65 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 6,334.5 मीट्रिक टन, 2023 में 70 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 7,513.25 मीट्रिक टन, और 2024 में 70 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 6,668.25 मीट्रिक टन शक्कर का उत्पादन हुआ।
निष्कर्ष
प्रदेश में शक्कर कारखानों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। घाटे में चल रहे इन कारखानों के कारण किसानों की स्थिति भी बिगड़ चुकी है, और गन्ना आपूर्ति में भी कमी आई है। यदि जल्द ही बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
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