छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती पर बड़ा विवाद: निजी कोचिंग का 7 महीने पुराना ड्राफ्ट सरकारी परीक्षा के दस्तावेज से हू-ब-हू मिला

Umeshwari Baghel | Oct 03, 2026, 16:26 IST
निजी कोचिंग और सरकारी दस्तावेज में समानता पर सवाल।
छत्तीसगढ़ में व्याख्याता भर्ती परीक्षा से पहले सिलेबस को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। रायपुर की एक निजी कोचिंग संस्था ने दावा किया है कि उसने फरवरी में जो सिलेबस अपने छात्रों को दिया था, वही पाठ्यक्रम सितंबर में सरकारी भर्ती एजेंसी ने जारी किया है। कई विषयों में शब्द, क्रम और यहां तक कि कुछ गलतियां भी समान मिलने का दावा किया गया है।

हिंदी के सिलेबस में समानता का दावा

सबसे ज्यादा सवाल हिंदी व्याख्याताके सिलेबस को लेकर उठे हैं। दोनों पाठ्यक्रमों में कवियों और लेखकों के नाम लगभग एक ही क्रम में बताए गए हैं। दावा है कि विराम चिह्न और शब्दों की बनावट तक काफी समान है। कुछ स्थानों पर शब्द बदले गए हैं। विषय और क्रम लगभग वही रखा गया है।



निजी अकादमी के सिलेबस में जहां कुछ जगह एवं लिखा है, वहीं सरकारी सिलेबस में और इस्तेमाल किया गया है। इसी तरह मार्गदर्शन की जगह निर्देशन और प्रेरणा की जगह अभिप्रेरणा लिखा गया है। कई दूसरे शब्द भी बदले गए हैं। इसके बावजूद पाठ्यक्रम का मूल ढांचा काफी समान बताया जा रहा है।



गलत नाम भी दोनों जगह मिलने का दावा

सिलेबस की तुलना में एक और बात सामने आई है। रीतिकाल के कवि घनानंद का नाम निजी सिलेबस में धनानंद लिखा गया था। दावा है कि यही गलती सरकारी सिलेबस में भी दिखाई देती है।




इसी तरह कुछ हिस्सों में सामग्री हटाई गई है। गद्य खंड से शेखर जोशी और विष्णु खरे के नाम सरकारी सिलेबस में शामिल नहीं किए गए हैं। कई जगह शब्दों को सिर्फ दूसरी भाषा में लिखा गया है। छात्र की जगह शिक्षार्थी जैसे शब्द इस्तेमाल हुए हैं।



भूगोल और संस्कृत में भी समानता

मामला केवल हिंदी विषय तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। जांच में भूगोल और संस्कृत के सिलेबस में भी काफी समानता मिलने का दावा किया गया है। निजी अकादमी की ओर से भी इन विषयों को लेकर यही बात कही गई है। अकादमी का कहना है कि उसके छात्रों को कई महीने पहले यही पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा था।हालांकि सरकारी विभाग ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।



छात्रों को तैयारी के लिए मिले सिर्फ 60 दिन

भर्ती परीक्षा 29 नवंबर 2026 को प्रस्तावित है। सरकारी सिलेबस 29 सितंबर को जारी किया गया है। ऐसे में सामान्य अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए करीब 60 दिन मिल रहे हैं।



दूसरी ओर निजी कोचिंग का दावा है कि उसके छात्रों को फरवरी से यही पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा था। अगर यह दावा सही माना जाए तो वहां पढ़ने वाले छात्रों को करीब 270 दिन की तैयारी मिली। इस हिसाब से दोनों वर्गों के छात्रों के बीच लगभग 210 दिन का अंतर बनता है। यही कारण है कि कई अभ्यर्थी पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।



854 पदों पर होनी है भर्ती

छत्तीसगढ़ में व्याख्याता के कुल 854 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 29 सितंबर से आवेदन शुरू हुए हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 26 अक्टूबर 2026 तय की गई है। लिखित परीक्षा 29 नवंबर को आयोजित होने वाली है।



भर्ती हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और भौतिकी विषयों में होगी। इसके अलावा राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल और अर्थशास्त्र विषय भी शामिल हैं।




सिलेबस कैसे तैयार होता है

व्याख्याता भर्ती का सिलेबस सामान्य तौर पर स्कूल शिक्षा विभाग की प्रक्रिया से तैयार होता है। इसमें एससीईआरटी की भूमिका भी रहती है। विशेषज्ञ शिक्षकों को पाठ्यक्रम तैयार करने के काम में लगाया जाता है। इसके लिए विषयवार बैठकों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है।



सिलेबस तैयार होने के बाद संबंधित विभाग से इसे परीक्षा कराने वाली नोडल एजेंसी तक भेजा जाता है। इसके बाद आधिकारिक सिलेबस वेबसाइट पर जारी किया जाता है। इसी प्रक्रिया को देखते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि सरकारी सिलेबस जैसी सामग्री निजी संस्था के पास पहले कैसे पहुंची।



अकादमी के वीडियो से बढ़ा विवाद

साध्य पीएससी अकादमी ने अपने यूट्यूब चैनल पर भी इस समानता का दावा किया है। हिंदी पढ़ाने वाली शिक्षिका ने एक वीडियो में कहा कि सात महीने पहले दिया गया पाठ्यक्रम नए सरकारी सिलेबस से लगभग मिलता है।



वीडियो में कई कवियों और पाठ्यक्रम के हिस्सों का उदाहरण दिया गया है। शिक्षक ने कहा कि छात्रों को उसी सामग्री की तैयारी जारी रखने के लिए कहा गया है।अकादमी की ओर से भूगोल और संस्कृत को लेकर भी इसी तरह के दावे किए गए हैं।



शिक्षाविद् ने जांच की जरूरत बताई

शिक्षाविद् डॉ. सुरीसेट्टी ने मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि अलग-अलग सिलेबस में कुछ विषय समान हो सकते हैं। उनके मुताबिक पूरा क्रम और गलतियां भी समान मिलना सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को समय-समय पर अपडेट भी किया जाना चाहिए।



यह उनका आकलन है। पूरे मामले की आधिकारिक जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति साफ होगी।



विभाग ने आरोपों को किया खारिज

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने निजी कोचिंग के दावों को उसका अपना आकलन बताया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी सिलेबस ही आधिकारिक और प्रामाणिक दस्तावेज है।



विभाग के मुताबिक किसी निजी कोचिंग के पाठ्यक्रम या उसके दावे के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है। आधिकारिक सिलेबस सभी अभ्यर्थियों के लिए वेबसाइट पर एक ही समय जारी किया गया है।



अब जांच की मांग क्यों उठ रही है

पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल समय को लेकर है। एक निजी संस्था के पास सरकारी सिलेबस से मिलता-जुलता पाठ्यक्रम सात महीने पहले मौजूद होने का दावा किया जा रहा है।



दूसरी तरफ सामान्य छात्रों को आधिकारिक सिलेबस परीक्षा से केवल दो महीने पहले मिला है। इसी अंतर के कारण अभ्यर्थी समान अवसर को लेकर सवाल उठा रहे हैं।फिलहाल विभाग ने किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है। आगे जांच या आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही यह साफ होगा कि दोनों सिलेबस में इतनी समानता कैसे आई।



FAQ



  1. हिंदी सिलेबस में समानता का क्या मतलब है?
    हिंदी सिलेबस में समानता का मतलब है कि निजी अकादमियों और सरकारी सिलेबस में कवियों और लेखकों के नाम, विषयों का क्रम, और सामग्री लगभग एक जैसी हो सकती है, जिससे यह आरोप लग रहे हैं कि दोनों सिलेबस एक दूसरे से मिलते हैं।
  2. छत्तीसगढ़ में व्याख्याताओं की भर्ती के लिए सिलेबस कब जारी किया गया था?
    छत्तीसगढ़ में व्याख्याताओं की भर्ती के लिए सिलेबस 29 सितंबर 2026 को जारी किया गया था।
  3. छत्तीसगढ़ में व्याख्याता पदों की भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?
    छत्तीसगढ़ में व्याख्याता पदों की भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
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