छत्तीसगढ़ की चिट्ठी: मृत्युदंड के बाद भी मुकम्मल नहीं झीरम, घर का जोगी जोगड़ा
झीरम से तारा तक पूरे सप्ताह छत्तीसगढ़ खूब गरमाया। छत्तीसगढ़ में बीता सप्ताह राजनीतिक और प्रशासनिक लिहाज से काफी हलचल भरा रहा। झीरम घाटी मामले में 13 साल बाद आया अदालत का फैसला जिसने सवाल खत्म होने की जगह और बढ़ गए।
कांग्रेस के छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ऐसे हो गए हैं जैसे घर का जोगी जोगड़ा की कहावत है। उनकी वापसी का मामला हर बार लटक जाता है। CGPSC गड़बड़ी मामले में ED की कार्रवाई, तारा कोल ब्लॉक को लेकर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने और PM आवास पर भूपेश बघेल और विजय शर्मा की खुली बहस प्रमुख मुद्दे रहे।
झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड :
सप्ताह की सबसे बड़ी खबर झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़ी रही। 16 सितंबर को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने इन सभी को दोषी ठहराया था। मामले में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।
25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। इनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल तक शामिल थे। झीरम कांड पर भले ही सजा सुना दी गई हो लेकिन इसको लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
फिर कटा अमित जोगी का पत्ता :
नगरीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस में संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अनुशासन समिति की बैठक में निष्कासित और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे 36 नेताओं के आवेदनों पर चर्चा हुई। कुछ मामलों में राहत दी गई, जबकि कुछ आवेदन खारिज किए गए। अमित जोगी, रेणु जोगी और पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह की वापसी के आवेदन विशेष रूप से चर्चा में रहे।
JCCJ के कांग्रेस में विलय की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हुई हैं। फिलहाल अमित जोगी के कांग्रेस में शामिल होने और उनकी पार्टी के विलय का मामला फिर लटक गया।
PM आवास पर 80 मिनट की खुली बहस:
रायपुर प्रेस क्लब में 15 सितंबर को प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा आमने-सामने आए। दोनों नेताओं ने योजना के तहत स्वीकृत और निर्मित मकानों के आंकड़ों को लेकर अपने-अपने दावे रखे। बहस करीब 80 मिनट चली।
बघेल ने आवासों की स्वीकृति और लक्ष्य को लेकर सवाल उठाए, जबकि विजय शर्मा ने सरकार की ओर से बनाए गए मकानों के आंकड़े सामने रखे। बहस के दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच प्रेस क्लब के बाहर विवाद की स्थिति भी बनी और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। लेकिन कुल मिलाकर वे सवाल जस के तस रहे जिनको लेकर यह खुली बहस हुई थी।
तारा कोल ब्लॉक पर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने :
हसदेव-अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक को लेकर राजनीतिक विवाद पूरे सप्ताह जारी रहा। कांग्रेस ने नीलामी और प्रस्तावित खनन को लेकर पर्यावरण और आदिवासी हितों के सवाल उठाए। बीजेपी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के पुराने रुख और तत्कालीन सरकार के फैसलों पर सवाल खड़े किए।
बीजेपी की ओर से कहा गया कि सफल बोलीदाता चुने जाने का अर्थ यह नहीं है कि तत्काल खनन शुरू हो जाएगा। वन स्वीकृति, पर्यावरणीय परीक्षण और अन्य वैधानिक अनुमतियां अभी जरूरी होंगी। दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर सरकार से स्पष्टता मांग रही है। कांग्रेस का कहना है कि 2023 में जब उनकी सरकार ने तारा कोल ब्लॉक को नीलामी प्रक्रिया से बाहर करवाया था तो बीजेपी ने सरकार अब नीलामी की अनुमति क्यों दी।
CGPSC मामले में ED की कार्रवाई तेज :
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच भी इस सप्ताह सुर्खियों में रही। ED ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD और वर्तमान बलरामपुर-रामानुजगंज अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया।
एजेंसी का आरोप है कि 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़े भ्रष्टाचार और चयन में हेरफेर के मामले में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। छह दिन की ED रिमांड पूरी होने के बाद 16 सितंबर को उन्हें 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले में जांच अभी जारी है।
पौने सात रुपए का मिडडे मील :
छत्तीसगढ़ के बच्चों के मिडडे मील का मुद्दा भी गरमाया। छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चे रोजाना पौने सात रुपए का खाना खाते हैं। छात्रों को सरकार स्कूल में मिडडे मील के नाम पर पौने सात रुपए की थाली परोसती है। इस पौष्टिक भोजन में दाल,चावल,सब्जी सब कुछ आ जाता है। सोचिए आखिर पौने सात रुपए में क्या आएगा और बच्चों को कितना पोषण मिलेगा। बच्चों की खुराक की कीमत गाय से भी कम है। साढ़े 17 रुपए गाय को एक समय की खुराक के लिए मिलते हैं।
ऐसे में मिडडे मील के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी ही लगती है। सरकार कहती है कि इसका फंड बढ़ाने के बारे में गंभीरता से विचार किया जा रहा है। बच्चों का पोषण हमारी पहली प्राथमिकता में शामिल है। साल में मिडडे मील में करीब 600 करोड़ रुपए खर्च होते हैं जिनमें 320 करोड़ रुपए केंद्र सरकार और 280 करोड़ रुपए राज्य सरकार मिलाती है।
ये खबरें भी पढ़ें...
फिर अटकी अमित जोगी की कांग्रेस में वापसी, 36 नेताओं के नाम पर मंथन
ब्रेकिंग न्यूज: झीरम घाटी नक्सली हमले के सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर बवाल, हसदेव बचाओ संगठनों ने उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी : ईडी का अफसर को डंडा, युवाओं को लुभाने का नया फंडा