छत्तीसगढ़ की चिट्ठी : ईडी का अफसर को डंडा, युवाओं को लुभाने का नया फंडा
छत्तीसगढ़ में बीता सप्ताह कई मायनों में बेहद अहम रहा। एक तरफ पुलिस विभाग से जुड़े मामले में अदालत ने इतना सख्त रुख अपनाया कि DGP और SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने के निर्देश देने पड़े, तो दूसरी ओर बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में ED की एंट्री ने जांच को एक नई दिशा दे दी है।
हसदेव-अरण्य में तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी ने पर्यावरण, आदिवासी अधिकार और सरकार की पुरानी प्रतिबद्धताओं पर बहस फिर तेज कर दी। इसी बीच कैबिनेट ने युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़े फैसले किए, जबकि दुर्ग में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने मौत की सजा सुनाई। यानी इस सप्ताह छत्तीसगढ़ में व्यवस्था पर सवाल भी उठे और व्यवस्था को बदलने वाले फैसले भी हुए।
DGP के नाम की बस, दो मौतें और सरकारी दफ्तर की कुर्की
इस सप्ताह सबसे गंभीर सवाल पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर उठा। मामला 27 सितंबर 2023 का है, जब रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र में पुलिस विभाग की मिनी बस की बाइक से जोरदार टक्कर हो गई थी। हादसे में बैजनाथ कंवर की मौके पर मौत हो गई, जबकि रवि यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
दोनों परिवारों ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने 14 जनवरी 2026 को बैजनाथ कंवर के आश्रितों को 26 लाख 9 हजार 200 रुपये और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया। अदालत ने भुगतान के लिए एक महीने की समयसीमा भी तय की थी।
लेकिन पीड़ित पक्ष के मुताबिक पांच महीने से ज्यादा समय बीतने के बावजूद मुआवजा नहीं मिला। इससे मामला और गंभीर इसलिए हो गया क्योंकि दुर्घटनाग्रस्त मिनी बस DGP, छत्तीसगढ़ के नाम पर पंजीकृत थी और हादसे के समय उसका बीमा भी समाप्त हो चुका था। अब अदालत ने DGP और कोरबा SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है।
सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं है,अगर पुलिस विभाग अदालत के आदेश का समय पर पालन नहीं करता, तो आम नागरिक न्याय व्यवस्था पर भरोसा कैसे बनाए रखे? और VIP ड्यूटी में इस्तेमाल होने वाले सरकारी वाहन का बीमा समाप्त होने के बाद भी वह सड़क पर कैसे चल रहा था?
CGPSC घोटाले में ED की एंट्री, अब खुलेगा पैसों का खेल?
छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित भर्ती विवादों में शामिल CGPSC घोटाला अब एक और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है और विशेष अदालत ने उन्हें छह दिन की ED रिमांड पर भेजा है। जांच में उत्कर्ष चंद्राकर के साथ उनकी WhatsApp चैट को अहम कड़ी माना जा रहा है।
ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या उसका कथित भर्ती घोटाले से कोई संबंध था। जांच में 2020 और 2021 की परीक्षाओं के पेपर कुछ लोगों तक पहुंचाने और इसके बदले पैसे लेने के आरोप भी सामने आए हैं।
एजेंसी करीब 3 करोड़ रुपये के कैश ट्रेल की भी जांच कर रही है। इससे पहले CBI तत्कालीन CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जनवरी 2026 में CBI ने करीब 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर 29 लोगों को आरोपी बनाया था।
अब ED की कार्रवाई से मामला चयन प्रक्रिया से आगे बढ़कर पैसे, संपर्क और कथित पेपर लीक के नेटवर्क तक पहुंचता दिख रहा है। बड़ा सवाल है,छह दिन की पूछताछ में क्या ऐसी कड़ी सामने आएगी, जो पूरे घोटाले के आर्थिक नेटवर्क को जोड़ सके?
तारा कोल ब्लॉक पर सरकार से सवाल
हसदेव अरण्य में तारा रिवाइज्ड कोयला ब्लॉक की नीलामी ने छत्तीसगढ़ की पुरानी पर्यावरणीय और राजनीतिक बहस को फिर जिंदा कर दिया है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने नीलामी रद्द करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि हसदेव का क्षेत्र जैव-विविधता से समृद्ध है, हाथियों के महत्वपूर्ण आवास का हिस्सा है और यहां आदिवासी तथा वन-निर्भर समुदायों की आजीविका जुड़ी हुई है।
विरोध करने वाले संगठन भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा कर रहे हैं कि खनन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे से हाथियों के आवास का विखंडन बढ़ सकता है और मानव-हाथी संघर्ष भी बढ़ सकता है। सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल 2022 में विधानसभा द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव को लेकर है, जिसमें हसदेव क्षेत्र को खनन से बचाने की मांग की गई थी।
अब संगठन पूछ रहे हैं कि अगर पहले नए खनन विस्तार की जरूरत नहीं बताई गई थी, तो तारा ब्लॉक की नीलामी क्यों हुई? सफल बोली लगाने वाली कंपनी को अडानी समूह से जोड़कर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या विकास और ऊर्जा जरूरतों के बीच जंगल और स्थानीय समुदायों के हितों के लिए कोई स्पष्ट सीमा तय है?
युवाओं के लिए 500 करोड़, कर्मचारियों को 45 साल तक मौका
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन पर अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और पांच इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर बनाने की योजना है।
सरकार का लक्ष्य युवाओं को नौकरी खोजने वाले के बजाय रोजगार पैदा करने वाला बनाना है। इसके साथ ही सरकारी, निगम-मंडल, संविदा और अन्य संबंधित कर्मचारियों के लिए दूसरी सरकारी सेवा या ऊंचे पद पर आवेदन की अधिकतम उम्र सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी गई है। छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी मिली है।
नवा रायपुर में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से NSTI बनाने की तैयारी है, जहां हर साल हजारों युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। फैसले महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन असली चुनौती उनका जमीन पर उतरना है। 500 करोड़ के मिशन से कितने युवाओं को वास्तविक रोजगार मिलेगा और कितने नए उद्यम खड़े होंगे,इसका जवाब आने वाले वर्षों में मिलेगा।
दुर्ग में मासूम की हत्या, आरोपी को मौत की सजा
दुर्ग में छह साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी सोमेश यादव को मौत की सजा सुनाई है। बच्ची 6 अप्रैल 2025 को लापता हुई थी। पुलिस ने तलाश शुरू की और बाद में बच्ची को एक वाहन से बरामद किया गया, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जांच में पुलिस ने CCTV, DVR, जैविक नमूने, DNA और FSL रिपोर्ट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों को जोड़ा।
अदालत ने 10 सितंबर 2026 को आरोपी को पॉक्सो एक्ट और BNS की संबंधित धाराओं में दोषी माना और अपराध को “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का माना। दो धाराओं में मृत्युदंड के साथ जुर्माना भी लगाया गया है, हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि हाईकोर्ट की प्रक्रिया के बाद होगी। अ
दालत ने पीड़ित परिवार को सात लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का निर्देश भी दिया। इस फैसले से न्याय मिलने का संदेश जरूर जाता है, लेकिन सवाल यह भी है कि सख्त सजा के साथ बच्चों को ऐसी घटनाओं से बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत किया जा रहा है?
अब प्राचार्य पढ़ाएंगे, रोज दो क्लास लेना जरूरी
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए अब प्राचार्यों को रोज दो कक्षाएं लेना अनिवार्य किया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के औचक निरीक्षण के दौरान कुछ स्कूलों में प्राचार्यों के चैंबर क्लासरूम से बड़े पाए गए थे। इसके बाद विभाग ने निर्देश जारी कर कहा कि क्लासरूम का इस्तेमाल प्रशासनिक कार्यालय के रूप में नहीं किया जाएगा और हर कर्मचारी के बैठने की जगह तय होगी।
प्राचार्यों के कक्षा लेने से विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों का लाभ मिलने की उम्मीद है और शिक्षकों की कमी भी कुछ हद तक दूर हो सकती है। लेकिन यह आदेश तभी सफल माना जाएगा, जब पढ़ाई की गुणवत्ता वास्तव में बेहतर हो। क्या दो क्लास लेने से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलेगी, या इसके लिए शिक्षक संख्या, संसाधन और निगरानी में भी बड़े सुधार की जरूरत होगी?
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