सीजीएमसी पंजीयन नियम बदलने पर बवाल, छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा

Umeshwari Baghel | Jun 16, 2026, 15:00 IST
सीजीएमसी पंजीयन नियम बदलने पर बवाल
छत्तीसगढ़ में सीजीएमसी पंजीयन नियमों में बदलाव के बाद विवाद बढ़ गया है। अन्य राज्यों के डॉक्टरों को स्वप्रमाणन के आधार पर प्रैक्टिस की अनुमति मिलने पर स्थानीय डॉक्टर संगठनों ने विरोध जताया है। और आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी दी है।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ में मेडिकल पंजीयन नियमों में बदलाव से मचा बवाल
  • बाहरी डॉक्टरों को मिली राहत, स्थानीय संगठनों ने जताई नाराजगी
  • सीजीएमसी अधिसूचना के खिलाफ डॉक्टरों का विरोध तेज
  • रोजगार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर का जताया गया खतरा
  • राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी, सरकार पर बढ़ा दबाव

NEWS IN DETAIL

Raipur। छत्तीसगढ़ में चिकित्सकीय प्रैक्टिस से जुड़ा एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव अब विवाद का केंद्र बन गया है। राज्य में बाहर से आने वाले एलोपैथी डॉक्टरों के लिए सीजीएमसी (Chhattisgarh Medical Council) में पंजीयन की अनिवार्यता को लेकर जारी नए आदेश के बाद चिकित्सा समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। डॉक्टरों और मेडिकल छात्र संगठनों ने इस फैसले को स्थानीय रोजगार और चिकित्सा व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है।



बिना स्थानीय रजिस्ट्रेशन के डॉक्टरी की इजाजत पर सवाल

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी निर्देश के आधार पर सीजीएमसी ने नई अधिसूचना लागू की है। इसके अनुसार अब अन्य राज्यों के एलोपैथी डॉक्टरों को राज्य में प्रैक्टिस करने के लिए केवल निर्धारित प्रक्रियाओं और उनके स्वप्रमाणन (Self Certification) के आधार पर ही अनुमति मिल सकती है। इसका मतलब यह हुआ कि कई मामलों में अब स्थानीय स्तर पर विस्तृत पंजीयन प्रक्रिया अनिवार्य नहीं रहेगी।



इसी प्रावधान को लेकर राज्य के चिकित्सा संगठनों में असंतोष तेजी से बढ़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह फैसला न केवल नियामक व्यवस्था को कमजोर करता है बल्कि स्थानीय चिकित्सकों के अवसरों पर भी असर डाल सकता है।



चिकित्सा संगठनों का विरोध तेज, भविष्य पर संकट बताया

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन और जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने इस अधिसूचना का विरोध किया है। उनका कहना है कि प्रदेश में पहले से ही मेडिकल स्नातक, इंटर्न और जूनियर डॉक्टर सीमित पदों, भर्ती में देरी और कार्य परिस्थितियों की समस्याओं से जूझ रहे हैं।



ऐसे समय में बाहरी राज्यों के डॉक्टरों के लिए प्रवेश प्रक्रिया को आसान बनाना स्थानीय युवाओं के हितों के खिलाफ है। संगठनों का तर्क है कि यह निर्णय राज्य के हजारों चिकित्सकों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है और रोजगार अवसरों में असंतुलन पैदा कर सकता है।



नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र पर भी असर की आशंका

डॉक्टर संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस नीति का प्रभाव केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहेगा। नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों के रोजगार अवसर भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।



उनका कहना है कि नियमों में ढील देने से स्थानीय लोगों की भर्ती पर सीधा असर पड़ेगा। इससे राज्य के युवाओं में अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा और चिंता बढ़ेगी।



आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह, जेएनएम मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव और सीजीडीएफ के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।



डॉक्टर संगठनों ने साफ कहा है कि अगर उनके अधिकारों और भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ, तो वे आंदोलन और हड़ताल करने पर मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।



प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

इस विवाद ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य नीति और नियामक ढांचे को लेकर नई परेशानी खड़ी कर दी है। एक तरफ सरकार का उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुगम और उपलब्ध कराना बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय डॉक्टर संगठन इसे अपने हितों पर सीधा असर मान रहे हैं।



अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस विरोध के बीच इस नीति पर क्या रुख अपनाती है। क्या इसमें संशोधन किया जाएगा या मौजूदा आदेश को ही आगे बढ़ाया जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में सीजीएमसी पंजीयन नियमों में बदलाव ने स्वास्थ्य व्यवस्था, रोजगार और स्थानीय अधिकारों को लेकर विवाद खड़ी कर दी है। डॉक्टर संगठनों के विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बाद मामला अब सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि एक बड़े सामाजिक टकराव की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।



FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. सीजीएमसी पंजीयन नियम में क्या बदलाव हुआ है?
    अब अन्य राज्यों के डॉक्टरों को स्वप्रमाणन के आधार पर छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस की अनुमति मिल सकती है।
  2. डॉक्टर संगठनों को इस फैसले पर आपत्ति क्यों है?
    उनका कहना है कि इससे स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार अवसर प्रभावित होंगे और सिस्टम कमजोर होगा।
  3. क्या इस फैसले के खिलाफ आंदोलन हो सकता है?
    हां, डॉक्टर संगठनों ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर राज्यव्यापी आंदोलन और हड़ताल की जाएगी।

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