CGPSC मेंस पर संकट! इंटरव्यू और पोस्टिंग रोकने की मांग, हाईकोर्ट ने थमाया नोटिस
Raipur. छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC) की मुख्य परीक्षा एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा के मूल्यांकन, तेजी से जारी किए गए परिणाम और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, जहां आयोग से विस्तृत जवाब मांगा गया है।
सिर्फ 7 दिनों में परिणाम पर सवाल
19 अप्रैल 2026 को आयोजित CGPSC मुख्य परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा का परिणाम मात्र सात दिनों के भीतर जारी कर देना कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि इतनी कम अवधि में मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है।
इसके साथ ही कई परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच और ड्रेस कोड के पालन में भी असमानता की शिकायतें सामने आई हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिकायतें दिए जाने के बावजूद आयोग ने उन पर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की।
हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई जस्टिस एन.के. व्यास की वेकेशन कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संतोषजनक जवाब न मिलने पर CGPSC को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित सिंह राठौर और दीपा श्रीवास ने पक्ष रखा।
इंटरव्यू और पोस्टिंग रोकने की मांग
अभ्यर्थियों ने कोर्ट में यह भी मांग रखी है कि जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक इंटरव्यू और पोस्टिंग प्रक्रिया को रोका जाए। जानकारी के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों के इंटरव्यू 21 मई को प्रस्तावित हैं, जिसके बाद पोस्टिंग की प्रक्रिया शुरू होनी है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगर जल्दबाजी में आगे की प्रक्रिया पूरी की गई तो गलत चयन को रोकना मुश्किल हो जाएगा।
चयन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
याचिका में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है-
कुछ अभ्यर्थियों ने लगभग खाली उत्तर पुस्तिका छोड़ी, फिर भी उन्हें इंटरव्यू के लिए चयनित किया गया
एक ही परीक्षा केंद्र से असामान्य रूप से अधिक चयन होने पर सवाल उठे
कुछ अभ्यर्थियों को विशेष छूट मिलने और दूसरों पर सख्त नियम लागू होने के आरोप
इन आरोपों ने पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर संदेह खड़ा कर दिया है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
अभ्यर्थियों ने कोर्ट से मांग की है कि-
मुख्य परीक्षा की न्यायिक जांच कराई जाए
सभी उत्तर पुस्तिकाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
इंटरव्यू प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए
पूरी मेरिट प्रणाली को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाया जाए
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो
आगे क्या होगा
अब सभी की नजर 5 अगस्त 2026 की अगली सुनवाई पर टिकी है। कोर्ट के अगले आदेश से तय होगा कि CGPSC की आगे की चयन प्रक्रिया (CGPSC Controversy) जारी रहेगी या उस पर रोक लगाई जाएगी।
FAQ
- CGPSC परीक्षा विवाद क्या है?
CGPSC मुख्य परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया, तेजी से जारी परिणाम और चयन प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में अनियमितताएं हो सकती हैं, जिसके चलते मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। - CGPSC विवाद में हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान CGPSC को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और नियमों के अनुसार की गई है। अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को तय की गई है। - अभ्यर्थी CGPSC परीक्षा में क्या मांग कर रहे हैं?
अभ्यर्थियों की मांग है कि मुख्य परीक्षा की न्यायिक जांच हो, इंटरव्यू और पोस्टिंग प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए, उत्तर पुस्तिकाओं को सार्वजनिक किया जाए और पूरी चयन प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए।
यह खबरें भी पढ़ें...
CGPSC और D.El.Ed परीक्षा एक साथ, परेशान अभ्यर्थियों ने की डेट बदलने की मांग
CGPSC : टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को मिले 21 नए अधिकारी
CGPSC Mains Exam का रिजल्ट हुआ जारी, इतने अभ्यर्थियों का हुआ सेलेक्शन, देखें लिस्ट
CGPSC 2003 घोटाला: 23 साल बाद लोक अदालत में समझौते की कोशिश, याचिकाकर्ता बोलीं- कॉम्प्रोमाइज नामंजूर