CGPSC घोटाला : सीबीआई की दलीलों के बाद पूर्व सचिव जीवन ध्रुव को नहीं मिली राहत

Umeshwari Baghel | Aug 05, 2026, 20:56 IST
CGPSC घोटाले में पूर्व सचिव को झटका
CGPSC घोटाले में हाईकोर्ट ने पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने पेपर लीक को लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए इसे गंभीर अपराध माना। सीबीआई ने उन पर बेटे को गोपनीय प्रश्नपत्र देने का आरोप लगाया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • CGPSC पेपर लीक केस में पूर्व सचिव को झटका
  • हाईकोर्ट ने खारिज की जीवन किशोर ध्रुव की जमानत
  • पेपर लीक पर कोर्ट सख्त, नहीं मिली राहत
  • CGPSC घोटाले में पूर्व सचिव की मुश्किलें बढ़ीं
  • लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ पर हाईकोर्ट सख्त

Bilaspur। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2021 में हुए कथित पेपर लीक और भर्ती घोटाले में गिरफ्तार पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए यह फैसला सुनाया।



कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। ऐसे अपराध का असर केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी व्यवस्था और समाज के भरोसे को नुकसान पहुंचाता है।



पेपर लीक को कोर्ट ने माना गंभीर अपराध

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विभू दत्त गुरु की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत और उम्मीदों को खत्म कर देती हैं।



अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब व्यवस्था संभालने वाले लोग ही इस तरह के मामलों में शामिल पाए जाते हैं तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक होती है। कोर्ट ने इसे "बाड़ ही खेत को खाने" जैसी स्थिति बताया।



बेटे को पेपर देने का लगा आरोप

सीबीआई की जांच के मुताबिक, जीवन किशोर ध्रुव साल 2020 से 2022 के बीच CGPSC के सचिव पद पर थे। इसी दौरान राज्य सेवा परीक्षा आयोजित हुई थी।



आरोप है कि सचिव पद की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव को उपलब्ध कराए। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी आधार पर सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ।



घर से मिले थे अहम दस्तावेज

सीबीआई ने जांच के दौरान जीवन किशोर ध्रुव के भिलाई स्थित घर पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, वहां से मुख्य परीक्षा के कुछ प्रश्नपत्र और उत्तर से जुड़े दस्तावेज मिले थे।



सीबीआई का कहना है कि जब्त दस्तावेजों में सामान्य अध्ययन के पेपर से जुड़े कई सवाल मौजूद थे। जांच में यह भी दावा किया गया कि परीक्षा में आए कई प्रश्न इन दस्तावेजों से मेल खाते थे।



बचाव पक्ष ने दी ये दलील

जमानत के लिए पूर्व सचिव की ओर से कई तर्क रखे गए थे। उनके वकीलों ने कहा कि उन्होंने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह गोपनीय कार्यों से खुद को अलग रखते थे।



बचाव पक्ष ने उनकी उम्र, सेवानिवृत्त अधिकारी होने और लंबे समय से जेल में रहने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी। उन्होंने अन्य आरोपियों के मामलों का भी उदाहरण दिया था।



CGPSC घोटाले में पूर्व सचिव को झटका


हाईकोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत

हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी उच्च प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी की जिम्मेदारी सामान्य व्यक्ति से अलग होती है। कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी के पास मौजूद दस्तावेज, बरामदगी और अन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया मामले में आरोपी की भूमिका की ओर इशारा करते हैं।



अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है। अगर ऐसी घटनाएं होती हैं तो युवाओं का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।



CGPSC भर्ती घोटाला बना बड़ा मुद्दा

CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2021 में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद प्रदेश में काफी विवाद हुआ था। युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।



मामले की जांच सीबीआई कर रही है। जांच के दौरान कई लोगों की भूमिका सामने आने के बाद कार्रवाई की गई है। अब पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज होने से मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है।



FAQ

  1. CGPSC पेपर लीक मामले में किसकी जमानत खारिज हुई है?
    CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2021 घोटाले में गिरफ्तार पूर्व सचिव और रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
  2. जीवन किशोर ध्रुव पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
    सीबीआई का आरोप है कि उन्होंने CGPSC की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे को उपलब्ध कराए। इसी पेपर लीक के जरिए चयन में मदद मिलने का आरोप है।
  3. हाईकोर्ट ने पेपर लीक मामले पर क्या टिप्पणी की?
    हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से लाखों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ता है। अदालत ने इसे बेहद गंभीर अपराध बताते हुए जमानत देने से इनकार किया।

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