पीएससी पेपर लीक में ED का बड़ा खुलासा, OSD के नाम से वसूले 3 करोड़
Raipur। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सत्ता के कथित रसूख के इस्तेमाल का बड़ा खुलासा किया है। ED के मुताबिक, CGPSC-2021 के प्रश्न-पत्र निजी दलालों के जरिए रिश्वत लेकर आरोपियों के रिश्तेदारों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। इसी नेटवर्क के जरिए डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे बड़े पदों पर चयन प्रभावित करने का खेल चला।
3 करोड़ की वसूली
जांच के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 के लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद जुटाए। ED का दावा है कि यह रकम अपराध से अर्जित आय यानी Proceeds of Crime थी। इसमें से करीब 2.80 करोड़ रुपए अनिल चंद्राकर को सौंपे गए।
OSD के नाम का इस्तेमाल
ED की जांच में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को प्रभावित करने और उनसे पैसे वसूलने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के तत्कालीन निज सहायक (PA) के.के. चंद्रवंशी और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। यानी नौकरी के नाम पर रसूख का ऐसा दावा बनाया गया, जिससे अभ्यर्थियों को चयन पक्का होने का भरोसा दिलाया जा सके।
5 ठिकानों पर छापा
ED रायपुर जोनल कार्यालय ने 1 सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में पांच अलग-अलग परिसरों पर तलाशी ली। कार्रवाई के बाद उत्कर्ष चंद्राकर को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य अहम साक्ष्य जब्त किए गए।
CBI-EOW की FIR से जांच
ED की कार्रवाई EOW/ACB रायपुर और CBI रायपुर की अलग-अलग FIR के आधार पर चल रही जांच का हिस्सा है। दोनों मामलों में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत अन्य लोगों के खिलाफ 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित हेराफेरी, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप हैं।
मोबाइल ने खोले राज
ED ने इससे पहले 3 जून 2026 को भी तलाशी कार्रवाई की थी। जांच के दौरान PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, मोबाइल से मिले डिजिटल डेटा और बैंक खातों के विश्लेषण से उत्कर्ष की कथित भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। ED के मुताबिक, वह अपराध की आय हासिल करने, उसे छिपाने, लेयरिंग करने और बाद में वैध संपत्ति के रूप में पेश करने की प्रक्रिया में सीधे शामिल था।
सवाल बड़ा है
CGPSC जैसी संवैधानिक भर्ती संस्था की परीक्षा में अगर पेपर लीक कर करोड़ों रुपए वसूले गए और अफसरों के पद तक बेचने का खेल चला, तो सवाल सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि किसके भरोसे अभ्यर्थियों से करोड़ों लिए गए और सत्ता के नाम का इस्तेमाल कर उन्हें चयन का भरोसा किसने दिलाया? ED की आगे की जांच इन कड़ियों को जोड़ने में अहम हो सकती है।
FAQ
- CGPSC पेपर लीक मामले में ED ने क्या खुलासा किया है?
ED के अनुसार CGPSC-2021 के पेपर लीक के जरिए अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की वसूली की गई। - CGPSC घोटाले में OSD के नाम का इस्तेमाल कैसे हुआ?
ED का दावा है कि आरोपियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD और PA के नाम व प्रभाव का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को चयन पक्का होने का भरोसा दिलाया। - CGPSC मामले में ED ने किसे गिरफ्तार किया है?
ED ने जांच के बाद उत्कर्ष चंद्राकर को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। तलाशी में कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
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