CGPSC Scam : CBI के बाद ED की एंट्री, 5 अफसरों के 10 ठिकानों पर छापेमारी
NEWS IN SHORT
- CGPSC Scam की जांच में अब ईडी की एंट्री हुई।
- पाँच आरोपी अफसरों के दस ठिकानों पर ईडी के छापे।
- हवाला नेटवर्क और एनजीओ के जरिए मनी ट्रेल का संदेह।
- तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी समेत मुख्य आरोपी जेल में।
- परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक पर प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती गड़बड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी अपनी कड़ा रुख अपना लिया है। बुधवार को ईडी ने मनी ट्रेल (धन के अवैध लेन-देन) की जांच के सिलसिले में रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी और राजनांदगांव में पांच आरोपी अधिकारियों के 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
हवाला और NGO के जरिए करोड़ों के लेन-देन का संदेह
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि CGPSC परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई थी। इस अवैध राशि को ठिकाने लगाने के लिए हवाला नेटवर्क, कारोबारियों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) का सहारा लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, तत्कालीन पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपनी पत्नी के एनजीओ के माध्यम से करीब 45 लाख रुपये प्राप्त किए थे। सीबीआई को जांच के दौरान आरोपियों की करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के सुराग मिले थे, जिसके बाद सीबीआई ने ईडी से मनी ट्रेल की जांच की सिफारिश की थी।
इन प्रमुख अधिकारियों पर कसा शिकंजा
ईडी की टीमों ने बुधवार सुबह तड़के 5 बजे से ही आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया था। इस कार्रवाई के दायरे में आए प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
- टामन सिंह सोनवानी (तत्कालीन पीएससी चेयरमैन)
- अमृत खलखो (तत्कालीन राज्यपाल के सचिव)
- जीवन किशोर ध्रुव (सेवानिवृत्त पीएससी सचिव/आईएएस)
- आरती वासनिक (परीक्षा नियंत्रक)
- गणवीर सिंह (उप परीक्षा नियंत्रक)
कार्रवाई के दौरान इन अधिकारियों के घरों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। वर्तमान में ये सभी मुख्य आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। इससे पहले सीबीआई इस मामले में सोनवानी और ध्रुव के रिश्तेदारों समेत कई करीबियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिन्हें फिलहाल जमानत मिल चुकी है।
प्री और मेंस दोनों के पेपर लीक
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर प्री और मेंस दोनों परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक किए थे। इसके लिए कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी के संचालक को रिव्यू के बहाने रायपुर बुलाकर प्रश्नपत्र वासनिक के घर पर रखवाए गए थे।
इस घोटाले के बीच, CGPSC-2021 परीक्षा में चयनित 18 संदिग्ध अभ्यर्थियों में से 9 को पिछले महीने नियुक्ति दे दी गई है। इनमें साक्षी ध्रुव, नेहा खलखो, प्रज्ञा और प्रखर जैसे नाम शामिल हैं। सीबीआई को इनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने के बाद इनके बयान दर्ज कर इन्हें छोड़ दिया गया था। अब ईडी इन सभी बेनामी संपत्तियों और हवाला नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
निष्कर्ष
CGPSC भर्ती घोटाला तंत्र की गहरी कमियों को उजागर करता है। इस मामले में सीबीआई के बाद ईडी की त्वरित कार्रवाई और वित्तीय कड़ियों की जांच ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क को बेनकाब किया है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई निष्पक्ष व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
FAQ
- CGPSC घोटाला मुख्य रूप से किस परीक्षा वर्ष से संबंधित है?
उत्तर: यह मुख्य रूप से CGPSC-2021 परीक्षा भर्ती से संबंधित है, जिसमें अधिकारियों, राजनेताओं और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों के गलत तरीके से चयन के आरोप लगे हैं। - सीबीआई (CBI) के बाद किस केंद्रीय एजेंसी ने इस मामले में 'मनी ट्रेल' की जांच शुरू की है?
उत्तर: प्रवर्तन निदेशालय (ED - Enforcement Directorate) ने। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला नेटवर्क और अवैध वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। - CGPSC घोटाले के समय छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष (Chairman) कौन थे, जिन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया है?
उत्तर: टामन सिंह सोनवानी। (इनके अलावा तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और उप परीक्षा नियंत्रक गणवीर सिंह पर भी प्रश्नपत्र लीक करने के मुख्य आरोप हैं)।
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