CGPSC घोटाला : पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी 31 जुलाई तक ED की रिमांड पर

Aishwarya Dwivedi | Jul 26, 2026, 14:36 IST
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CGPSC भर्ती घोटाले में ED ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उन्हें 31 जुलाई तक रिमांड पर भेजा। अब मनी लॉन्ड्रिंग और सिंडिकेट की जांच तेज होगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सीजीपीएससी भर्ती घोटाला साल 2020 से 2022 के बीच हुआ था।
  • परीक्षा और इंटरव्यू में पारदर्शिता को ताक पर रखा गया था।
  • रसूखदार परिवारों के लोगों को उच्च पदों पर चुना गया था।
  • सीबीआई ने जांच के बाद 29 लोगों को आरोपी बनाया था।
  • अब ईडी इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है।

ED की रिमांड में टामन सोनवानी

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC – Chhattisgarh Public Service Commission) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED – Enforcement Directorate) ने एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। एजेंसी ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर शनिवार को सीबीआई (CBI – Central Bureau of Investigation) की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें 31 जुलाई तक 7 दिनों की ईडी रिमांड पर भेज दिया है।



ईडी ने अदालत में दलील दी कि इस योजनाबद्ध घोटाले के पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसमें रसूखदार और करीबी लोगों के बीच भारी वित्तीय लेन-देन हुआ है। अब ईडी सोनवानी से रिमांड के दौरान पूछताछ करके यह पता लगाएगी कि घोटाले की रकम को कैसे मैनेज किया गया और यह राशि किन-किन लोगों तक पहुंचाई गई।



घर से बांटे गए परीक्षा के पर्चे

सीबीआई द्वारा इस मामले में दायर की गई चार्जशीट से कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के मुताबिक, पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने आयोग की निष्पक्षता को ताक पर रखकर परीक्षा के पर्चे अपने ही घर पर अपने नजदीकी रिश्तेदारों को उपलब्ध कराए थे। इनमें उनके रिश्तेदार साहिल, नीतेश, निशा कोसले और दीपा आडिल शामिल थे, जिन्हें पेपर देकर डिप्टी कलेक्टर जैसे उच्च पदों पर चयनित करवाया गया। इसके अलावा, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने भी लीक हुआ पर्चा बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा था, जिससे उनके बेटे शशांक और बहू भूमिका ने तैयारी की और बाद में दोनों का चयन भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर हो गया।



CGPSC घोटाला


कोलकाता की कंपनी से लीक हुआ पेपर

CGPSC घोटाला का जाल सिर्फ अधिकारियों के घर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि प्रश्नपत्र छपाई के स्तर पर भी बड़ी गड़बड़ी की गई थी। उक्त परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था, जहां से जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास 7 सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर पहुंचा था।



उसने ये सभी पर्चे आरती वासनिक को सौंपे, जो उन्हें सीधे अपने घर ले गई। वहां टामन सोनवानी और ललित गणवीर के साथ मिलकर प्रश्नों की कॉपियां तैयार की गईं और फिर पर्चों को दोबारा सील करके प्रिंटिंग के लिए वापस भेज दिया गया। इस तरह योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करके अपनों को अफसर बनाया गया।



मनी लॉन्ड्रिंग की जांच हुई तेज

सीबीआई की शुरुआती आपराधिक जांच के बाद अब ईडी की एंट्री से इस घोटाले के आर्थिक पहलुओं का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है। जांच एजेंसी अब उन वित्तीय रास्तों को खंगाल रही है जिनके जरिए रिश्वत और अवैध लेन-देन का खेल खेला गया। ईडी का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि घोटाले से कमाए गए काले धन को कहां-कहां निवेश किया गया और इससे कौन-कौन सी अचल संपत्तियां खरीदी गईं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सोनवानी से होने वाली पूछताछ के आधार पर इस घोटाले में शामिल कई अन्य रसूखदार चेहरों और अधिकारियों को भी समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।



FAQ

  1. CGPSC भर्ती घोटाला किस अवधि का है?
    उत्तर: यह घोटाला साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित की गई भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है।
  2. ED ने पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को कब तक रिमांड पर लिया है?
    उत्तर: अदालत ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को 31 जुलाई तक ED की रिमांड पर भेजा है।
  3. CGPSC भर्ती घोटाला की जांच कौन-कौन सी एजेंसियां कर रही हैं?
    उत्तर: इस मामले की जांच पहले CBI कर रही थी और अब मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू पर ED जांच कर रही है।

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