CGPSC घोटाला; आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
NEWS IN SHORT
- CGPSC घोटाला: 25 लाख रुपये लेकर पेपर लीक करने वाले आरोपी की जमानत खारिज
- उत्कर्ष चंद्राकर पर 30-35 उम्मीदवारों को लीक पेपर देने का आरोप
- CBI जांच में बड़े खुलासे: 50-60 लाख रुपये लेकर उम्मीदवारों से परीक्षा पास कराने की साजिश
- गवाह ने बताया: बारनवापारा रिजॉर्ट में उम्मीदवारों को दिए गए लीक प्रश्नपत्र
- CGPSC भर्ती घोटाले में 29 आरोपी, टामन सिंह सोनवानी सहित कई नाम शामिल
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2022 के परीक्षा घोटाले में एक और बड़ा मोड़ सामने आया है। रायपुर के शांति नगर निवासी उत्कर्ष चंद्राकर पर आरोप है कि उसने 30-35 उम्मीदवारों को 25 लाख रुपये लेकर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए थे। इस मामले में CBI ने जांच की और आरोपी को फरार घोषित कर दिया। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की अग्रिम जमानत खारिज कर दिया, और कहा कि पेपर लीक करना मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।
बड़ी रकम लेने के बाद चंद्राकर ने कई उम्मीदवारों को लीक प्रश्नपत्र दिए
CBI जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उत्कर्ष चंद्राकर ने उम्मीदवारों से 50 से 60 लाख रुपये की रकम की मांग की थी, और उन्हें रायपुर के विभिन्न होटलों और रिजॉर्ट्स में ठहरा कर परीक्षा की तैयारी करवाई थी। 12 फरवरी 2022 को, प्रारंभिक परीक्षा से एक दिन पहले, उत्कर्ष ने प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उम्मीदवारों को दिए थे।
गवाह ने खुलासा किया
मामले की प्रमुख गवाह सुषमा अग्रवाल ने धारा 164 के तहत अपने बयान में बताया कि उत्कर्ष चंद्राकर ने उनसे 25 लाख रुपये लेकर, 8 मई 2022 को एक बस बुक की थी, जिसमें उम्मीदवारों को बारनवापारा रिजॉर्ट ले जाया गया था, जहां प्रश्नपत्र के माध्यम से परीक्षा की तैयारी कराई गई।
क्या है CGPSC घोटाला?
यह घोटाला 2020 से 2022 के बीच CGPSC की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और साक्षात्कारों में पारदर्शिता की अनदेखी कर, कुछ रसूखदार उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। इस दौरान योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने रिश्तेदारों को नियुक्ति दिलवाने का खेल हुआ।
पश्चिम बंगाल से रायपुर तक साजिश
जांच में यह भी सामने आया कि प्रश्नपत्र कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी से छापे गए थे। महेश दास नामक कर्मचारी जनवरी 2021 में रायपुर आया और उसने प्रश्नपत्र के 7 सेट आरती वासनिक को सौंपे, जिन्होंने इसे टामन सिंह और ललित के साथ मिलकर कॉपी किया। इसके बाद इन पर्चों को सील कर प्रिंटिंग के लिए भेज दिया गया।
CBI की जांच
CBI ने अपनी जांच में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और दस्तावेज बरामद किए हैं, जो इस घोटाले की साजिश को उजागर करते हैं। CBI ने अपनी चार्जशीट में 29 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी भी शामिल हैं।
171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा
CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में कुल 2,565 उम्मीदवारों ने प्री-एग्जाम पास किया था। इसके बाद 26-29 मई 2022 को मुख्य परीक्षा हुई, जिसमें 509 उम्मीदवारों ने सफलता प्राप्त की।
अंतिम परिणाम और नियुक्ति
11 मई 2023 को, 170 उम्मीदवारों की चयन सूची जारी की गई, लेकिन इस घोटाले के बाद पूरे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। CBI ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को आगे बढ़ाया है।यह घोटाला छत्तीसगढ़ की सरकारी सेवाओं की चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली का उदाहरण है।
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