CGPSC घोटाला: टूरिस्ट बनाकर चहेतों को बना दिया डिप्टी कलेक्टर, जंगल के बीच बनी होटल में करवा दी पीएससी की परीक्षा

छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी ने अपने कार्यकाल में बड़ी कारस्तानी की है। सीजीपीएससी को अपने घर की संस्था बना दिया। अपने भाई,भतीजों, बहुओं और चहेतों को डिप्टी कलेक्टर से लेकर राज्य सेवा के अलग अलग पदों पर चयन करवा दिया।

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Arun Tiwari
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Raipur. छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी ने अपने कार्यकाल में बड़ी कारस्तानी की है। सीजीपीएससी को अपने घर की संस्था बना दिया। अपने भाई,भतीजों, बहुओं और चहेतों को डिप्टी कलेक्टर से लेकर राज्य सेवा के अलग अलग पदों पर चयन करवा दिया।

यहां तक कि अपने चहेतों को टूरिस्ट बनाकर रायपुर से सवा सौ किलोमीटर दूर जंगल के बीच बनी होटल में ठहरा दिया और वहीं परीक्षा करा दी। सीबीआई की कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है। सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।    

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टामन सोनवानी की कारस्तानी : 

सीबीआई की चार्जशीट में CGPSC परीक्षा घोटाले से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि बारनवापारा के एक रिसॉर्ट में 11 से 24 मई 2022 के बीच 35 परीक्षार्थियों को पर्यटक बताकर ठहराया गया था। ये सभी अभ्यर्थी कारोबारी, राजनीतिक और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े बताए गए हैं।

चार्जशीट के अनुसार इन सभी की बुकिंग राहुल हरपाल द्वारा कराई गई थी। आरोप है कि अभ्यर्थियों को राज्य सेवा परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और उन्हें अपने-अपने कमरों में ही परीक्षा हल कराने की व्यवस्था की गई। आरोपियों ने परीक्षा से लेकर अंतिम चयन तक की पूरी प्रक्रिया के कई अहम राज सीबीआई के सामने उजागर किए हैं।

 चार्जशीट में बताया गया है कि विकास और उत्कर्ष चंद्राकर ने CGPSC मेंस परीक्षा का प्रश्नपत्र सॉल्वर को सौंपा था। इसके अलावा जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि पीएससी में चयन के लिए पदों के अनुसार मोटी रकम तय थी। चार्जशीट के मुताबिक डिप्टी कलेक्टर जैसे पद के लिए करीब एक करोड़ रुपये तक की डील की जाती थी।

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टामन और आरती की सांठगांठ :

जांच से पता चला कि जुलाई 2020 में टामन सिंह सोनवानी और तत्कालीन एग्जाम कंट्रोलर आरती वासनिक ने  एकेडी प्रिंटर्स प्रायवेट लिमिटेड के संचालक अरुण कुमार द्विवेदी के साथ मुलाकात की और पीएससी के पेपर छापने पर चर्चा की। इसके अनुसार, CGPSC और एकेडी के बीच एक समझौता हुआ, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि प्रश्न-पत्र छपाई की जिम्मेदारी एकेडी को सौंपी गई।

इसके बाद, आरती वासनिक ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। जांच से पता चला कि आरती वासनिक ने  एक साल तक एकेडी के संचालक अरुण कुमार द्विवेदी के पास प्रश्न-पत्रों को रखा। यह भी सामने आया कि आरती वासनिक और टामन सिंह सोनवानी को पीएससी की 2020-21 की परीक्षा के प्रश्न-पत्रों की जानकारी थी।

दोनों को यह जानकारी थी कि मुख्य परीक्षा के सभी पेपर्स में पूछे जाने वाले प्रश्न क्या थे। जीवन किशोर ध्रुव के आवासीय परिसर की तलाशी में सुमित ध्रुव के पास प्रश्न-पत्र और उत्तरों की फोटोकॉपी थी। जिसमें अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल थे। इससे यह पता चला कि सुमित को अपने पिता की मदद से पेपर नं 07 के प्रश्नों की जानकारी मुख्य परीक्षा से पहले प्राप्त हुई।

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घोटाले के मुख्य किरदार :

जांच के आधार पर यह पाया गया कि तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव,आरती वासनिक,टामन सिंह सोनवानी और ललित गणवीर ने इस पूरी साजिश को अंजाम दियाा।  इस साजिश का उद्देश्य CGPSC 2020 और 2021 की परीक्षाओं में धोखाधड़ी करना था। पीएससी 2021 की परीक्षा के प्रश्न-पत्रों की गोपनीयता भंग होने के लिए यह सभी लोग जिम्मेदार थे।

आरती वासनिक ने प्रश्न-पत्र नं 02 और 07 पर कंट्रोल किया तो जीवन किशोर ध्रुव के पुत्र सुमित ने उन प्रश्नों को हल करने का अभ्यास किया और CGPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त की, जिससे उनको डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित किया गया।

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