EOW ने पेश किया 9500 पन्नों का पूरक चालान,रामगोपाल,देवेंद्र यादव और विनोद तिवारी समेत 12 आरोपी
मामला कोयला परिवहन से अवैध वसूली, रकम के वितरण, राजनीतिक गतिविधियों में इस्तेमाल और संपत्तियों में निवेश से जुड़ा है।
ईओडब्ल्यू का चालान
EOW के मुताबिक मामले में 500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कोल लेवी और अन्य वसूली की जांच की गई है। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B, 420, 384, 467, 468, 471 और 109 समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत यह पूरक चालान पेश किया है। जांच में जब्त डायरियों, व्हाट्सऐप चैट, बैंक लेन-देन, संपत्ति दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विवरण दिया गया है।
25 रुपये प्रति टन की वसूली
EOW की जांच के अनुसार कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि 15 जुलाई 2020 के एक आदेश के बाद कोयला परिवहन के लिए जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी को अनिवार्य किया गया। आरोप है कि इसी व्यवस्था का इस्तेमाल अवैध रकम की वसूली के लिए किया गया।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि अलग-अलग जिलों से एकत्र रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी। यहां इसका हिसाब रखने के बाद रकम को आगे वितरित किया जाता था। EOW ने इस पैसे के राजनीतिक और व्यक्तिगत कार्यों में इस्तेमाल के साथ ही जमीन, वाशरी और दूसरी संपत्तियों में निवेश के साक्ष्य जुटाए हैं।
आयरन पैलेट से भी 100 रुपये प्रति टन वसूली का आरोप
चालान में कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन से 100 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली का भी उल्लेख है। EOW के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य की भूमिका की जांच की गई है। एजेंसी का दावा है कि पैलेट उद्योग से संबंधित लोगों को सूर्यकांत तिवारी या उसके सहयोगियों को रकम देने के निर्देश दिए जाने के तथ्य मिले हैं। डायरियों में भी वसूली की प्रविष्टियां मिलने की बात कही गई है।
डायरियों में करोड़ों रुपये की प्रविष्टियां
चालान में राम गोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव प्रसाद राय, जयप्रकाश मौर्य, पियूष कुमार साहू, जोगेन्दर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा की भूमिकाओं का उल्लेख है।
इनका कोल कनेक्शन
EOW के अनुसार जब्त डायरियों में राम गोपाल अग्रवाल से संबंधित भवन और C PARTY नाम से दर्ज 32 प्रविष्टियों में करीब 104.20 करोड़ रुपये का उल्लेख मिला है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस रकम को पार्टी से जुड़े कामों तक पहुंचाए जाने के तथ्य सामने आए हैं।
इसी तरह भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में करीब 3 करोड़ रुपये दर्ज होने की बात कही गई है। EOW के अनुसार, इसमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल थी। तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार प्रविष्टियों में करीब 49.50 लाख रुपये दर्ज होने का दावा किया गया है।
विनोद तिवारी से जुड़ी 22 प्रविष्टियों में करीब 2.12 करोड़ रुपये, रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में करीब 2.93 करोड़ रुपये और जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो प्रविष्टियों में करीब 1 करोड़ रुपये दर्ज होने की बात चालान में कही गई है।
संपत्तियों और कारोबार में निवेश की भी जांच
चालान में रानू साहू के भाई पियूष कुमार साहू की भूमिका को लेकर भी आरोप दर्ज किए गए हैं। EOW का कहना है कि कोल लेवी से कथित तौर पर प्राप्त रकम को परिवार के नाम संपत्तियों में निवेश किया गया। वहीं, अनुराग चौरसिया पर सौम्या चौरसिया से संबंधित रकम को फ्लैट और जमीन की खरीद में लगाने का आरोप जांच में सामने आने की बात कही गई है।
व्यवसायी जोगेन्दर सिंह से जुड़े मामलों में करीब 40 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन का उल्लेख है। सुनील कुमार अग्रवाल के मामले में नकदी रखने, आगे भुगतान करने और वाशरी खरीद में निवेश से संबंधित तथ्यों की जांच की गई है। वहीं राहुल मिश्रा के पास कथित तौर पर बड़ी नकदी रखे जाने और जरूरत के अनुसार उसे वापस उपलब्ध कराने की बात चालान में कही गई है।
9500 पन्नों का पूरक चालान
EOW ने यह भी बताया है कि इस मामले में इससे पहले एक मुख्य और पांच पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं। अब 9500 पन्नों के नए पूरक चालान में जांच से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए हैं। चालान में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और आरोपियों की दोषसिद्धि अदालत में सुनवाई के बाद ही तय होगी।
FAQs
- ईओडब्ल्यू ने कोयला परिवहन से संबंधित मामले में कितनी अवैध वसूली की जांच की है?
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, मामले में 500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कोल लेवी और अन्य वसूली की जांच की गई है। - इस मामले में किस तरह के साक्ष्य जुटाए गए हैं?
जांच में जब्त डायरियों, व्हाट्सऐप चैट, बैंक लेन-देन, संपत्ति दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विवरण दिया गया है। - क्या जांच में किसी राजनीतिक जुड़ाव का पता चला है?
जी हां, जांच में यह सामने आया है कि एकत्र की गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक और व्यक्तिगत कार्यों में किया गया, साथ ही जमीन और अन्य संपत्तियों में निवेश के साक्ष्य भी मिले हैं।