हनुमान जयंती पर छत्तीसगढ़ में उमड़ा आस्था का सैलाब, मुस्लिम युवकों ने बांटी शरबत, दिखी सामाजिक एकता की मिसाल
NEWS IN SHORT
- हनुमान जयंती पर छत्तीसगढ़ में उमड़ी आस्था, मंदिरों में लगी लंबी कतारें
- रायपुर से भिलाई तक भक्ति का माहौल, जगह-जगह भंडारे और प्रसाद वितरण
- भिलाई में मुस्लिम युवाओं ने बांटी खिचड़ी-शरबत, दिया एकता का संदेश
- सेक्टर-9 हनुमान मंदिर में 1 किमी लंबी लाइन, सुबह से जुटे श्रद्धालु
- बिलासपुर का बजरंग पंचायत मंदिर बना आस्था और सामाजिक न्याय का प्रतीक
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में हनुमान जयंती का पर्व इस वर्ष पूरे उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। राजधानी रायपुर सहित दुर्ग, अंबिकापुर और बिलासपुर में सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्री संकट मोचन वीर हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।
दूधाधारी मंदिर में हनुमान जी का विशेष श्रृंगार
रायपुर के दूधाधारी मंदिर में हनुमान जी का विशेष श्रृंगार किया गया। यहां 108 कमल फूलों और “जय श्री राम” लिखे पत्तों की माला अर्पित की गई, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही। वहीं, राजीव गांधी चौक स्थित श्री संकट मोचन सेवा समिति छोटापारा द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर में 1 किमी लंबी कतार
भिलाई के सेक्टर-9 हनुमान मंदिर में दोपहर के समय एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतार लग गई। दूर-दराज से आए श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए पहुंचे। शहर के विभिन्न हिस्सों में भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन दिनभर चलता रहा।
मुस्लिम युवाओं ने शरबत और खिचड़ी का किया वितरण
इस अवसर पर सामाजिक सौहार्द की अनोखी मिसाल भी देखने को मिली। भिलाई के घड़ी चौक पर मुस्लिम युवाओं ने शरबत और खिचड़ी का वितरण कर भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने “जय श्री राम” के नारे लगाए और भगवा गमछा पहनकर हिंदू-मुस्लिम एकता का उदाहरण प्रस्तुत किया। यह पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
श्री बजरंग पंचायत मंदिर
वहीं, बिलासपुर का ऐतिहासिक श्री बजरंग पंचायत मंदिर एक बार फिर अपनी अनूठी परंपरा के कारण चर्चा में रहा। लगभग 100 साल पुराने इस मंदिर में अंग्रेजी शासनकाल से हनुमान जी को साक्षी मानकर पंचायत लगती थी। उस समय यहां दिए गए फैसले अंतिम माने जाते थे, जिन्हें सभी धर्मों और जातियों के लोग स्वीकार करते थे। यह मंदिर आज भी आस्था के साथ-साथ सामाजिक न्याय और एकता का प्रतीक बना हुआ है।
हनुमान जयंती
हनुमान जयंती के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज में भाईचारे, एकता और पारस्परिक सम्मान का संदेश भी दिया। पूरे प्रदेश में भक्ति और सद्भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
निष्कर्ष
हनुमान जयंती पर छत्तीसगढ़ में भक्ति और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और भंडारे आयोजित हुए। भिलाई में मुस्लिम युवाओं ने सेवा कर भाईचारे का संदेश दिया। यह पर्व आस्था के साथ सामाजिक एकता और सौहार्द की मिसाल बनकर सामने आया।
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