एक्सीडेंट क्लेम के लिए समय सीमा खत्म, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया पीड़ितों के हक में बड़ा फैसला
NEWS IN SHORT
- हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब समय सीमा से बाहर दावे नहीं होंगे खारिज
- मोटर दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा न्याय, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
- हाईकोर्ट का आदेश, बीमा कंपनियों को अब समय सीमा का हवाला देने से नहीं मिलेगा लाभ
- मोटर दुर्घटना के दावों पर अब कोर्ट समय सीमा का कोई असर नहीं पड़ेगा
- पीड़ितों के लिए राहत, दावे खारिज करने के नियमों को हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो पीड़ित परिवारों के हक में है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने यह आदेश दिया है
कि केवल आवेदन में देरी के आधार पर दावों को खारिज नहीं किया जाएगा। यह फैसला प्रदेश के सैकड़ों परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद लेकर आया है, जो किसी कारणवश समय सीमा के भीतर कोर्ट नहीं पहुंच पाए थे।
पीड़ितों को मिलेगी राहत
हाईकोर्ट का यह आदेश बीमा कंपनियों द्वारा दी गई याचिकाओं के खिलाफ था। इन कंपनियों ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 (3) का हवाला देते हुए कहा था कि समय सीमा खत्म होने के बाद क्लेम की सुनवाई का अधिकार विशेष अदालत के पास नहीं है।
इन कंपनियों ने 40 से अधिक याचिकाएं लगाई थीं। इन याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को केवल समय सीमा जैसी तकनीकी वजहों से न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता हैं।
बीमा कंपनियों को लगा झटका
अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद, बीमा कंपनियां पीड़ितों के आवेदन को समय सीमा का हवाला देकर रद्द नहीं कर सकेंगे। (मोटर दुर्घटना बीमा दावा का भुगतान)यह फैसला मोटर दुर्घटना के पीड़ित परिवारों के लिए राहत लेकर आया है
जो अपने हक के लिए सालों से संघर्ष कर रहे थे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि बीमा कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर अपने तर्क पेश करने का अधिकार रहेगा।
विशेष अदालत को मिलेगा निर्देश
हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सभी संबंधित मोटर एक्सीडेंट क्लेम विशेष अदालत को कानून के अनुसार इन मामलों की सुनवाई जारी रखनी चाहिए।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला अभी बाकी है, और जब तक वहां से फैसला नहीं आता, तब तक विशेष अदालतकोई अंतिम आदेश पारित नहीं करेंगे।
न्याय की राह में यह एक और कदम
इस फैसले से न केवल न्याय की उम्मीद बढ़ेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट हो गया है कि कानून में देरी के बावजूद पीड़ितों को न्याय मिलेगा। यह फैसला उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण लेकर आया है, जो समय सीमा के कारण न्याय से वंचित हो गए थे।
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