बिलासपुर के पूर्व डीईओ अनिल तिवारी को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की अर्जी

Pravesh Shukla | Aug 25, 2025, 17:25 IST
chhattisgarh-high-court-deo-transfer-case-anil-tiwari the sootr
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रहे डॉ. अनिल तिवारी को राहत देने से इनकार कर दिया है। डॉ. तिवारी ने छह माह के भीतर अपने ट्रांसफर और सहायक संचालक पद पर नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

छत्तीसगढ़हाईकोर्टनेबिलासपुरकेजिलाशिक्षाअधिकारी(DEO)रहे डॉ. अनिल तिवारी को राहत देने से इनकार कर दिया है। डॉ. तिवारी ने छह माह के भीतर अपनेट्रांसफरऔर सहायक संचालक पद पर नियुक्ति के खिलाफहाईकोर्टमें याचिका दायर की थी।



पढ़ें: राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष का बड़ा खुलासा, छत्तीसगढ़ में वीरेंद्र तोमर चला रहा था फर्जी संगठन



कमेटी के सामने पक्ष रखने का निर्देश

कोर्ट ने उन्हेंट्रांसफरकमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। साथ ही शासन को कहा है कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीशरविंद्रकुमारअग्रवालकीसिंगलबेंच में हुई।



विजय कुमार टांडे नए DEOबनाए गए

दरअसल, शिक्षा विभाग ने बीते 10 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहतबिलासपुरके तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. पद से हटाकर अनिल तिवारी कोसंभागीयसंयुक्त संचालक, शिक्षा कार्यालयबिलासपुरमें बतौर सहायक संचालक के पद पर तैनात किया गया। उनकी जगह कोटाविकासखंडके शिक्षा अधिकारी विजय कुमारटांडेकोबिलासपुरको नयाDEOनियुक्त किया गया। इसट्रांसफरआदेश को डॉ. तिवारी ने अपने वकीलअम्रितोदास के माध्यम सेहाईकोर्टमें चुनौती दी और इसके खिलाफ याचिका दायर की।



पढ़ें: रिटायर्ड अग्निवीरों की मेंटरशिप करेगी केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय के पास भविष्य की जिम्मेदारी



याचिकाकर्ता ने कहा- जूनियर को बनाया DEO

याचिकाकर्ताडॉ. तिवारी की तरफ से तर्क दिया गया कि वरिष्ठता सूची में उनका नाम 237वें क्रम पर है। जबकि, विजयटांडेका नाम 330वें क्रम पर है। इसके बाद भीजूनियरको यहांDEOबना दिया गया है। याचिका में यह भी बताया किटांडेके खिलाफ रिश्वत लेने सहित कई गंभीर शिकायतें दर्ज हैं, जिसकी जांच रिपोर्ट भी आ चुकी है। इसके बावजूद उन्हेंपदस्थापनादी गई है।



पढ़ें: हाईकोर्ट का अहम फैसला: आपसी सहमति से तलाक, हर सुनवाई में पति-पत्नी की मौजूदगी जरूरी



ट्रांसफर कमेटी में दिया है आवेदन

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्तमहाधिवक्ताएसपीकाले ने तर्क देते हुए कहा कि तबादला प्रशासनिक आदेश के तहत किया गया है। दोनों अधिकारियों को उनके नए पद पर कार्यभार भी सौंपा जा चुका है।



इस खबर को पांच प्वॉइंट में समझाएं

  1. राहत से इनकार, पर दंडात्मक कार्रवाई से रोक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. अनिल तिवारी को उनके ट्रांसफर मामले में सीधे तौर पर कोई राहत नहीं दी है। हालांकि, कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
  2. ट्रांसफर कमेटी में सुनवाई का निर्देश: हाईकोर्ट ने डॉ. तिवारी को अपनी याचिका और तर्कों को ट्रांसफर कमेटी के सामने रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कमेटी तीन हफ्ते के भीतर इस मामले की सुनवाई करे और अपना फैसला सुनाए।
  3. जूनियर को DEO बनाने का आरोप: डॉ. तिवारी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनसे जूनियर अधिकारी विजय कुमार टांडे को बिलासपुर का नया DEO नियुक्त किया गया है, जबकि वरिष्ठता सूची (Seniority List) में उनका नाम टांडे से ऊपर है।
  4. रिश्वतखोरी के आरोप: याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि विजय कुमार टांडे के खिलाफ रिश्वत लेने सहित कई गंभीर शिकायतें दर्ज हैं, जिनकी जांच रिपोर्ट भी आ चुकी है। इसके बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण पद दिया गया है।
  5. कानूनी रास्ता खुला: कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ट्रांसफर कमेटी के फैसले के बाद डॉ. तिवारी आगे कानूनी मदद लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।

पढ़ें: शराब घोटाले में बढ़ीं चैतन्य बघेल की मुश्किलें, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका



हाईकोर्ट ने दखल से किया इंकार

इस परहाईकोर्टने कहा कियाचिकाकर्तापहले हीट्रांसफरकमेटी के समक्ष अपनाआदेवनपेश कर चुका है। ऐसे मेंहाईकोर्टइस स्तर परमेरिटमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। कोर्ट ने साफ कहा कि कमेटी तीन हफ्तों में सुनवाई कर आदेश पारितकरे। आदेश मिलने के बादयाचिकाकर्ताआगे कानूनी उपाय करने के लिए स्वतंत्र होंगे।



FAQ

  1. सवाल 1: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. अनिल तिवारी की याचिका पर क्या फैसला सुनाया है?
    जवाब: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. अनिल तिवारी की याचिका को सीधे तौर पर स्वीकार या खारिज नहीं किया है। कोर्ट ने उन्हें ट्रांसफर कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने कमेटी को तीन हफ्तों के भीतर इस मामले पर सुनवाई कर आदेश जारी करने को कहा है।
  2. सवाल 2: क्या विजय कुमार टांडे का DEO पद पर ट्रांसफर रद्द हो जाएगा?
    जवाब: फिलहाल, विजय कुमार टांडे का DEO पद पर ट्रांसफर रद्द नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने इस स्तर पर सीधे तौर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। कोर्ट के निर्देशानुसार, ट्रांसफर कमेटी इस मामले की समीक्षा करेगी और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
  3. सवाल 3: इस मामले में वरिष्ठता का क्या महत्व है?
    जवाब: इस मामले में वरिष्ठता (Seniority) एक महत्वपूर्ण बिंदु है। याचिकाकर्ता डॉ. अनिल तिवारी ने तर्क दिया है कि वह विजय कुमार टांडे से वरिष्ठ हैं, और इसके बावजूद एक कनिष्ठ (Junior) अधिकारी को उनसे ऊपर के पद पर नियुक्त किया गया है। कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा वरिष्ठता के आधार पर प्रशासनिक फैसलों की वैधता पर सवाल उठाता है।

District Education Officer | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्देश | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट आदेश | Chhattisgarh High Court | Chhattisgarh High Court decision | transfer not present in content



Tags:
  • Chhattisgarh High Court
  • Chhattisgarh High Court decision
  • transfer
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्देश
  • जिला शिक्षा अधिकारी
  • District Education Officer
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट आदेश