भूपेश बघेल और परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेना के जवान की याचिका खारिज की

Arun Tiwari | May 01, 2026, 18:03 IST
chhattisgarh-high-court-dismissed-petition-army-soldier-objectionable-post-bhupesh-baghel
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके परिवार के खिलाफ व्हाट्सएप स्टेटस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक आर्मी सिपाही के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है।

Raipur : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel और उनके परिवार के खिलाफ व्हाट्सएप स्टेटस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक आर्मी सिपाही के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया



है। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में साक्ष्यों का मूल्यांकन ट्रायल के दौरान होगा न कि इस चरण में। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा



कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे जैसे स्क्रीनशॉट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड पर निर्भरता या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जब्ती न होना यह साक्ष्य से जुड़े हैं जिनका परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाएगा।



सिपाही ने कहा तनाव में ऐसा हुआ

अदालत ने यह भी माना कि सिपाही का यह दावा कि व्हाट्सएप स्टेटस गलती से अपलोड हुआ और वह मानसिक तनाव में था। जिसे साक्ष्यों के आधार पर ही परखा जा सकता है।



Chhattisgarh High Court :ऐसे में इस आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने एक सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक सार्वजनिक व्यक्ति और उनके परिवार के खिलाफ



आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी शेयर की थी जिसे कई लोगों ने देखा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता है इसलिए याचिका खारिज की जाती है।



याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेंदु पंड्या ने दलील दी कि बयान गंभीर मानसिक तनाव में दिया गया था। उन्होंने कहा कि वीडियो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड किया गया था



और बाद में याचिकाकर्ता को भेजा गया जो तकनीकी त्रुटि के कारण अनजाने में व्हाट्सएप स्टेटस पर अपलोड हो गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर राजनीतिक दबाव और लाभ के उद्देश्य से दर्ज की गई है



और गलत तरीके से फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले में कोई प्राथमिक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जैसे पेनड्राइव, मेमोरी कार्ड या मूल डिवाइस जब्त नहीं किया गया है। और पूरा मामला केवल एक स्क्रीनशॉट और CDR पर आधारित है जिसकी साक्ष्य वैधता संदिग्ध है।



यह भी कहा गया कि यदि कार्यवाही रद्द नहीं की गई तो इससे याचिकाकर्ता के करियर और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति होगी। साथ ही वह केरल में तैनात है और कोर्ट में उपस्थित होना भी उसके लिए कठिन हो सकता है।



गंभीर हैं आरोप

वैशाली महिलांग ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक सार्वजनिक व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर उसे व्यापक रूप से प्रसारित किया



जिससे सार्वजनिक शांति और व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। राज्य पक्ष ने तर्क दिया कि एफआईआर में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है, इसलिए याचिका खारिज की जानी चाहिए।



क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार 28 अप्रैल 2023 को आरोपी आर्मी सिपाही ने व्हाट्सएप स्टेटस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट की थी।



यह स्टेटस कई लोगों द्वारा देखा गया और बाद में एक व्यक्ति जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ा था उसने इसे नोटिस किया। इसके बाद 28 अप्रैल 2023 को थाना में लिखित शिकायत दी गई



जिसके आधार पर 29 अप्रैल को पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रसारित करने) के तहत मामला दर्ज किया।



हाईकोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट है कि इस मामले में अब ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।



यह खबरें भी पढ़े...

मजदूर दिवस पर भूपेश बघेल ने खाया बोरे - बासी तो बीजेपी के पेट में हुआ दर्द, पूछा आठ करोड़ का हिसाब



भूपेश बघेल फेक वीडियो मामला; छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने लिया संज्ञान, FIR दर्ज करने के आदेश



छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यौन शोषण पीड़िता दिव्यांग युवती को मिली गर्भपात की अनुमति



छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हेडमास्टर प्रमोशन पर लगाई रोक, 2019 नियमों पर उठे सवाल





Tags:
  • भूपेश बघेल
  • Bhupesh Baghel
  • Chhattisgarh High Court
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • व्हाट्सएप