अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा : छत्तीसगढ़ में 7 साल की जेल और 1 लाख जुर्माना
समझें क्या है पूरा मामला
- अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
- प्लॉट खरीदने से पहले जरूर जांचें जरूरी दस्तावेज
- नियम तोड़े तो 7 साल तक हो सकती है जेल
- कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन और विकास अनुमति जरूरी
- EWS के लिए 15 प्रतिशत जमीन रखना अनिवार्य
छत्तीसगढ़ में अवैध तरीके से कॉलोनी विकसित करने वालों पर सरकार और जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। बिना जरूरी अनुमति जमीन को छोटे प्लॉट में बांटकर बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नियमों का उल्लंघन गंभीर मिलने पर संबंधित कॉलोनाइजर को तीन से सात साल तक जेल और कम से कम एक लाख रुपए जुर्माना हो सकता है।
प्रशासन ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। प्लॉट या मकान खरीदने से पहले केवल विज्ञापन और कॉलोनाइजर के दावों पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। खरीदारों को रजिस्ट्रेशन, विकास अनुमति और स्वीकृत ले-आउट जैसे दस्तावेज जरूर देखने चाहिए।
कॉलोनी बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी
नगरपालिका परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में कॉलोनी विकसित करने के लिए तय प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। कोई व्यक्ति जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर बेचना चाहता है तो उसे कॉलोनाइजर के रूप में पंजीयन कराना होगा।
इसी तरह मकान या अपार्टमेंट बनाकर बेचने वाले बिल्डर के लिए भी जरूरी पंजीयन प्रमाण-पत्र होना चाहिए। बिना रजिस्ट्रेशन और अनुमति के कॉलोनी विकसित करने पर संबंधित निकाय कार्रवाई कर सकता है। यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 और कॉलोनाइजर से संबंधित नियमों के तहत लागू की गई है।
अवैध कॉलोनी पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई
नियमों के मुताबिक अवैध तरीके से जमीन का व्यपवर्तन कराने या बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने पर मामला गंभीर माना जाएगा। अधिनियम की धारा 339-ग के तहत दोषी पाए जाने पर तीन से सात वर्ष तक कारावास का प्रावधान है।
इसके साथ कम से कम एक लाख रुपए जुर्माना भी लगाया जा सकता है। न्यायालय परिस्थितियों के आधार पर प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर राशि देने का आदेश भी दे सकता है। इसलिए केवल जमीन की रजिस्ट्री हो जाना किसी कॉलोनी को पूरी तरह वैध साबित नहीं करता।
पांच साल तक मान्य रहता है कॉलोनाइजर का पंजीयन
कॉलोनाइजर को दिया गया पंजीयन प्रमाण-पत्र पांच साल के लिए वैध रहता है। हालांकि पंजीयन मिलने के बाद भी वह अपनी मर्जी से प्लॉट नहीं बेच सकता।
हर कॉलोनी के लिए सक्षम अधिकारी से अलग विकास अनुमति लेना जरूरी होता है। स्वीकृति में कॉलोनी का ले-आउट, सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं का विवरण शामिल होता है। इसका उद्देश्य यह है कि लोगों को प्लॉट बेचने के बाद जरूरी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े।
EWS के लिए 15 प्रतिशत जमीन का प्रावधान
आवासीय कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए भी व्यवस्था की गई है। नियमों के अनुसार कुल जमीन का 15 प्रतिशत हिस्सा इस वर्ग के लिए आरक्षित रखना जरूरी है।
इसके अलावा कॉलोनी के कुछ भूखंड संबंधित नगरपालिका के पास बंधक रखे जाते हैं। ये भूखंड विकास कार्य पूरे होने तक सुरक्षा के तौर पर रखे जाते हैं। इस व्यवस्था से कॉलोनाइजर पर सड़क, पानी, नाली और दूसरी सुविधाएं पूरी करने का दबाव बना रहता है।
प्लॉट खरीदने से पहले क्या जांचें
जिला प्रशासन ने खरीदारों से कहा है कि जमीन खरीदने से पहले संबंधित नगरीय निकाय से पूरी जानकारी लें। कॉलोनाइजर का पंजीयन प्रमाण-पत्र वैध है या नहीं, इसकी पुष्टि सबसे पहले करनी चाहिए।
इसके बाद कॉलोनी की विकास अनुमति और स्वीकृत ले-आउट जांचना जरूरी है। खरीदार को यह भी देखना चाहिए कि जिस प्लॉट की खरीद की जा रही है, वह नगरपालिका के पास बंधक तो नहीं है।
इसके अलावा कॉलोनी में मंजूर विकास कार्य वास्तव में पूरे हुए हैं या केवल कागजों पर दिखाए गए हैं, इसकी जानकारी भी लेनी चाहिए।
सिर्फ सस्ता प्लॉट देखकर फैसला न करें
अवैध कॉलोनियों में कई बार कम कीमत और आसान किस्तों का लालच देकर प्लॉट बेचे जाते हैं। बाद में सड़क, बिजली, पानी, नक्शा पास कराने और मकान निर्माण की अनुमति को लेकर खरीदार परेशानी में फंस सकता है।
ऐसे मामलों में वर्षों तक कानूनी विवाद भी चल सकते हैं। इसलिए जमीन खरीदते समय जल्दबाजी करने के बजाय दस्तावेजों की सरकारी स्तर पर जांच करवाना सुरक्षित तरीका है।
सूरजपुर जिला प्रशासन ने भी कॉलोनाइजरों और बिल्डरों से नियमों का पालन करने को कहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में अवैध कॉलोनी बनाने पर कितनी सजा हो सकती है?
दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक जेल और कम से कम 1 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। - प्लॉट खरीदने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज जांचने चाहिए?
कॉलोनाइजर रजिस्ट्रेशन, विकास अनुमति, स्वीकृत ले-आउट और प्लॉट की बंधक स्थिति जरूर जांचें। - क्या सिर्फ रजिस्ट्री होने से प्लॉट पूरी तरह वैध माना जाता है?
नहीं, रजिस्ट्री के साथ कॉलोनी की जरूरी सरकारी मंजूरी और विकास अनुमति भी होना जरूरी है।
ये खबरें भी पढ़े...
तीन महीने में सख्त कानून: अवैध कॉलोनियों पर सरकार का बड़ा एक्शन प्लान
ग्वालियर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा, तीन माह के अंदर वसूल करें राशि
सूरजपुर में स्कूल गेट पर छात्रों का प्रदर्शन, प्राचार्य पर अभद्रता के आरोप
संविदा-प्लेसमेंट कर्मियों को iGOT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य