छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों के लिए वीडियो कॉलिंग शुरू
Raipur। छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों को अब अपने परिजनों से मिलने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। देश में पहली बार छग सरकार ने जेलों में बंद कैदियों को वीडियो कॉलिंग सुविधा देने की शुरुआत कर दी है। गृह एवं जेल विभाग ने इसके लिए भारत संचार निगम लिमिटेड यानी BSNL के साथ तीन साल का अनुबंध किया है। नई व्यवस्था के तहत कैदी अब वीडियो कॉलिंग के जरिए अपने परिवार और वकीलों से बात कर सकेंगे।
सरकार ने इस सुविधा की शुरुआत मदर्स डे के मौके पर की है। सबसे पहले रायपुर महिला केंद्रीय जेल में बंद महिला कैदियों को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम की सुविधा दी गई। विभाग का दावा है कि इससे दूर-दराज में रहने वाले परिवारों को राहत मिलेगी और कैदियों का मानसिक तनाव भी कम होगा।
सप्ताह में केवल एक बार मिलेगी सुविधा
जेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कैदियों को सप्ताह में केवल एक बार वीडियो कॉलिंग की अनुमति होगी। बातचीत की अधिकतम समय सीमा 5 मिनट तय की गई है। इस दौरान कैदी अपने परिजनों या वकीलों से बात कर सकेंगे।
हालांकि इसके लिए पहले से प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कैदी जिन लोगों से बात करना चाहते हैं, उनके मोबाइल नंबर पहले जेल प्रशासन को देने होंगे। इसके बाद विभाग संबंधित व्यक्ति का सत्यापन करेगा। पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज मांगे जाएंगे। पुष्टि होने के बाद संबंधित व्यक्ति को वीडियो कॉलिंग के लिए लिंक भेजा जाएगा। तय समय पर जेल से वीडियो कॉल कनेक्ट किया जाएगा।
पूरी कॉल होगी रिकॉर्ड
जेल विभाग ने सुरक्षा को देखते हुए इस व्यवस्था में कई नियंत्रण भी रखे हैं। वीडियो कॉलिंग के दौरान पूरी बातचीत रिकॉर्ड होगी। कॉल के समय एक जेल कर्मचारी भी वहां मौजूद रहेगा, जो बातचीत पर नजर रखेगा। यदि किसी तरह की नियम विरुद्ध या संदिग्ध बातचीत होती है तो जेल कर्मी कॉल को तत्काल डिस्कनेक्ट भी कर सकेगा। विभाग का कहना है कि इस तकनीक से जेल सुरक्षा से समझौता किए बिना कैदियों को मानवीय सुविधा दी जा रही है।
बीएसएनल देगा मुफ्त सुविधा
बड़ी बात यह है कि प्रदेश के जिलों में वीडियो कॉलिंग सिस्टम लगाने के बीएसएनल कोई भी चार्ज नहीं लेगा। गृह एवं जल विभाग के अनुसार यह अनुबंध 3 साल के लिए है। जो की पूरी तरह से फ्री है।
क्यों पड़ी इस सुविधा की जरूरत
अब तक प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को अपने परिजनों से मिलने के लिए सप्ताह में केवल एक दिन की मुलाकात की अनुमति मिलती थी। कई बार दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले माता-पिता, छोटे बच्चे या बीमार परिजन जेल तक पहुंच ही नहीं पाते थे। आर्थिक परेशानी भी बड़ी वजह थी।
ऐसे में लंबे समय से जेल विभाग के पास ऐसी व्यवस्था शुरू करने की मांग आ रही थी, जिससे कैदी अपने परिवार से संपर्क में रह सकें। विभाग का मानना है कि परिवार से संपर्क बने रहने से कैदियों के व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव आता है।
पहले चरण में 7 जेलों में सुविधा
जेल विभाग के अनुसार योजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के पांच संभागीय मुख्यालयों की केंद्रीय जेलों में यह सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा कवर्धा और जशपुर जिला जेल में भी वीडियो कॉलिंग सिस्टम लगाया गया है। दूसरे चरण में प्रदेश की 18 जिला जेलों और 8 उप जेलों में यह सुविधा शुरू की जाएगी।
प्रदेश में कुल 33 जेल
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कुल 33 जेल संचालित हैं। इनमें 5 केंद्रीय जेल, 20 जिला जेल और 8 उप जेल शामिल हैं। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में प्रदेश की सभी जेलों को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि कैदियों और उनके परिजनों के बीच संवाद आसान हो सके।
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