छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व IAS समेत 30 अधिकारियों की संपत्ति कुर्क

Harrison Masih | Jan 05, 2026, 14:44 IST
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED ने IAS निरंजन दास समेत 30 आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। एजेंसी का दावा है कि घोटाले से सरकारी खजाने को करीब 2,800 करोड़ का नुकसान हुआ। जांच में बड़े सिंडिकेट और अवैध निवेश का खुलासा हुआ है।

Raipur. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। तत्कालीन आबकारी आयुक्त IAS निरंजन दास समेत 30 आबकारी अधिकारियों की करीब 38.21 करोड़ रुपए की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।



2,800 करोड़ के नुकसान का दावा

ED के अनुसार, शराब घोटाले के कारण छत्तीसगढ़ सरकार के आबकारी खजाने को करीब 2,800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह आंकड़ा नए तथ्यों, डिजिटल सबूतों और मनी ट्रेल के आधार पर सामने आया है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ नुकसान की राशि और बढ़ सकती है।



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275 चल-अचल संपत्तियां अब तक जब्त

ED की जांच में खुलासा हुआ है कि घोटाले से अर्जित अवैध धन को सरकारी सिस्टम को दरकिनार कर संपत्तियों और निवेश में लगाया गया। अब तक एजेंसी 275 चल और अचल संपत्तियों को कुर्क कर चुकी है।



कुर्क की गई अचल संपत्तियों में आलीशान बंगले, पॉश कॉलोनियों में फ्लैट, व्यवसायिक परिसरों की दुकानें, बड़ी मात्रा में कृषि भूमि है। वहीं, चल संपत्तियों में करोड़ों की FD, कई बैंक खातों में जमा राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां, शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश शामिल बताए जा रहे हैं।



अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियां

ED अधिकारियों के मुताबिक, कुर्क की गई सभी संपत्तियां शराब घोटाले से अर्जित अवैध आय से खरीदी गई थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकारियों और कारोबारियों के एक संगठित नेटवर्क के जरिए पूरे सिस्टम को प्रभावित किया गया।



आगे और भी कार्रवाई के संकेत

जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अंतिम नहीं है। कई वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका अभी जांच के दायरे में है। आने वाले दिनों में और कुर्की, पूछताछ और गिरफ्तारी जैसी बड़ी कार्रवाई संभव बताई जा रही है।



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जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले की जांच ED कर रही है। एजेंसी ने इस संबंध में ACB में FIR दर्ज कराई है, जिसमें 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का उल्लेख किया गया है।



ED की FIR के अनुसार, इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, शराब कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद आरोप लगाए गए हैं।



ED का दावा: सिंडिकेट के जरिए हुआ घोटाला

ED की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में यह घोटाला एक सिंडिकेट मॉडल के तहत संचालित किया गया। इस सिंडिकेट में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD AP त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर की अहम भूमिका बताई गई है। इसी नेटवर्क के जरिए शराब कारोबार से अवैध वसूली कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।



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