छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : ED की विशेष कोर्ट में 59 आरोपियों की पेशी, फैसला सुरक्षित
NEWS IN SHORT
- ED कोर्ट में पेश हुए 59 आरोपी शराब घोटाले का फैसला सुरक्षित
- शराब घोटाला में बड़े नामों पर ED की नजर, फैसला जल्द
- पूर्व मंत्री और अधिकारियों के खिलाफ ED ने पेश की चार्जशीट
- ACB ने 3200 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया
- ED की जांच में सामने आया शराब घोटाले का तीन चरणों में संचालन
NEWS IN DETAIL
Raipur : छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में आज एक बड़ा अपडेट सामने आया है। कुल 59 आरोपियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों की मौजूदगी में कोर्ट की कार्यवाही पूरी की गई, और बाद में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इसमें कई बड़े नाम शामिल हैं और राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।
क्या है शराब घोटाला?
ED द्वारा ACB में दर्ज FIR में बताया गया है कि इस घोटाले की राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। एजेंसी का दावा है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में एक सिंडिकेट के माध्यम से यह घोटाला अंजाम दिया गया। मामले में जिन प्रमुख नामों का जिक्र है, उनमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी, और कारोबारी अनवर ढेबर शामिल हैं।
जांच में सामने आए तीन प्रमुख बिंदु
1 : डिस्टलरी संचालकों से कमीशन वसूली
2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपये और बाद में 100 रुपये तक कमीशन लिया गया। साथ ही नए टेंडर में शराब की कीमतें बढ़ाकर ओवरबिलिंग की छूट दी गई ताकि लागत समायोजित की जा सके।
2 : नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों से बिक्री
जांच में यह सामने आया कि अतिरिक्त शराब बनाई गई और उस पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों पर बेची गई। इसमें विधु गुप्ता का नाम होलोग्राम सप्लायर के रूप में सामने आया है, और अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को खाली बोतलों की आपूर्ति और परिवहन की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके साथ ही 15 जिलों में शराब खपाने के लिए दुकानदारों को निर्देश दिए गए कि बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में न दर्ज करें।
3 : सप्लाई जोन में हेरफेर से अवैध उगाही
आरोप है कि CSMCL की दुकानों को 8 जोन में बांटने का कार्य कमीशन के आधार पर किया गया। एपी त्रिपाठी द्वारा जोन-वार विश्लेषण उपलब्ध कराए गए थे ताकि अवैध धन वसूली की जा सके। EOW की जांच में तीन वित्तीय वर्षों में 52 करोड़ रुपये पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिए जाने के साक्ष्य मिले हैं।
बड़ी साजिश का पर्दाफाश
यह शराब घोटाला किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अधिकारियों और नेताओं का नाम सामने आया है। ED और ACB की जांच में यह साबित हो रहा है कि यह एक बड़े स्तर की साजिश थी, जिसे अब तक कई लोगों ने मिलकर अंजाम दिया। मामले में बड़े नामों के सामने आने से इसकी राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभावों का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में कोर्ट जल्द ही अपना फैसला सुनाएगा। फैसले के बाद यह साफ हो सकेगा कि क्या बड़े नामों पर आरोप साबित होते हैं और किस तरह से इस घोटाले में लिप्त लोगों को सजा मिल सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें इस पर हैं, क्योंकि छत्तीसगढ़ की राजनीति में इसका बड़ा असर हो सकता है।
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