छत्तीसगढ़ में औषधीय खेती से बदली किसानों की किस्मत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती!
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों की खेती से किसानों को नया रास्ता मिल रहा हैं
- वन विभाग की मदद से लगातार औषधीय पौधों की खेती बढ़ रही हैं
- 2.8 करोड़ पौधों का उत्पादन, छत्तीसगढ़ की बड़ी सफलता हैं
- सरकार द्वारा औषधीय पौधों के लिए सब्सिडी और तकनीकी सहायता दी जाती हैं
- पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों को सशक्त बना रही औषधीय खेती
NEWS IN DETAIL
Raipur : छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों की खेती अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत साधन बन चुकी है। किसानों के लिए यह एक फायदेमंद विकल्प बनता जा रहा है, क्योंकि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है। पारंपरिक खेती से हटकर किसान अब औषधीय पौधों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
वन विभाग की पहल से हो रही है उन्नति
छत्तीसगढ़ वन विभाग किसानों को औषधीय पौधे निःशुल्क प्रदान कर रहा है। इन पौधों का वितरण न केवल ग्रामीण इलाकों में बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इसके अलावा, वन क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर पौधों का रोपण किया जा रहा है, जिससे हरियाली और जैव विविधता को बढ़ावा मिल रहा है।
औषधि पादप बोर्ड की भूमिका
इस दिशा में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा और औषधि पादप बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2025-26 में राज्य की 11 नर्सरियों के माध्यम से 9 प्रकार के औषधीय पौधों के करीब 2.8 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं।
इनमें वच, ब्राह्मी, सतावर, गुंजा, अनंतमूल, मंडूकपर्णी, स्टीविया, कुलंजन और सर्पगंधा जैसे प्रमुख पौधे शामिल हैं, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि कर रहे हैं।
सरकार की सहायता और सब्सिडी
सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सब्सिडी, ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता प्रदान की है। इन पौधों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज और मदर प्लांट का उपयोग किया गया है, जिससे उनकी जीवित रहने की क्षमता बढ़ी है। यह सहायता ग्रामीणों के लिए एक स्थायी आजीविका का साधन बन रहा है।
आगे का रास्ता
छत्तीसगढ़ वनमंत्री केदार कश्यप ने औषधीय पौधों की खेती को ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया हैं। उन्होंने बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम और उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। विकास मरकाम ने कहा कि इस पहल से न केवल किसानों की आय बढ़ रही है
बल्कि यह हमारी पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति को भी मजबूत कर रहा है। वे आगे और अधिक किसानों को इस परियोजना से जोड़ने की योजना बना रहे हैं, ताकि यह एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में स्थापित हो सके।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में औषधीय खेतीकिसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। सरकार की सहायता, बोर्ड की पहल और किसानों की मेहनत से यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और आने वाले समय में यह ग्रामीण (अर्थव्यवस्था को गति)अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।
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