छत्तीसगढ़ मनरेगा योजना का देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन : ई-केवायसी और जियो-टैगिंग में हासिल की 97% सफलता

Aishwarya Dwivedi | Apr 10, 2026, 12:05 IST
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छत्तीसगढ़ ने मनरेगा योजना में ई-केवायसी, जियो-टैगिंग और क्यूआर कोड का सफलतापूर्वक उपयोग कर पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई है। 97% श्रमिकों का ई-केवायसी पूरा, 11 हजार 668 ग्राम पंचायतों में जीआईएस कार्य योजना तैयार की गई।

NEWS IN SHORT

  • 97% श्रमिकों का ई-केवायसी और जियो-टैगिंग पूरी हुई।
  • 11 हजार 668 ग्राम पंचायतों में दो लाख कार्यों की योजना तैयार।
  • उपस्थिति की निगरानी के लिए फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली का उपयोग।
  • नागरिकों को क्यूआर कोड से कार्यों की जानकारी मिल रही है।
  • महीने की सात तारीख को रोजगार और आवास दिवस आयोजित।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ राज्य ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में देशभर में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है। ई-केवायसी, जियो-टैगिंग और क्यूआर कोड जैसी तकनीकों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर राज्य ने पारदर्शिता और दक्षता को नई गति दी है।



ई-केवायसी और जियो-टैगिंग से पारदर्शिता में वृद्धि

1 अप्रैल 2026 तक राज्य ने 97% सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूरा कर लिया है। इससे मनरेगा की भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित हुई है। इसके साथ ही, प्रदेश के 58 लाख 16 हजार श्रमिकों का ई-केवायसी तथा 11 लाख 32 हजार निर्मित परिसंपत्तियों का जियो-टैगिंग कार्य भी पूर्ण हो चुका है, जिससे कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग संभव हो पाई है।



वैज्ञानिक तरीके से योजना निर्माण

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से 11 हजार 668 ग्राम पंचायतों में 2 लाख 86 हजार 975 कार्यों की जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम) आधारित कार्य योजना तैयार की गई है। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कार्यों की वैज्ञानिक योजना बनी है और विकास कार्यों की प्रगति को दिशा मिली है।



फेस ऑथेंटिकेशन और क्यूआर कोड से जानकारी की पारदर्शिता

मनरेगा कार्यस्थलों पर फेस ऑथेंटिकेशन आधारित एनएमएमएस प्रणाली से उपस्थिति की निगरानी में पारदर्शिता आई है। इसके अलावा, ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से नागरिक अब कार्यों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एक सितंबर से अब तक लगभग पांच लाख से अधिक क्यूआर कोड स्कैन किए गए हैं, जिससे पारदर्शिता में इजाफा हुआ है और नागरिकों को सीधे जानकारी मिल रही है।



रोजगार और आवास दिवस पर समस्याओं का समाधान

प्रदेश में हर महीने सात तारीख को “रोजगार दिवस” और “आवास दिवस” का आयोजन किया जाता है। इन दिवसों पर हितग्राहियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाता है और योजनाओं की जमीनी समीक्षा की जाती है। इसके साथ ही, चावल उत्सव का आयोजन भी किया जाता है, जो योजना की सफलता और पारदर्शिता को दर्शाता है।



निष्कर्ष

मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने अपनी तकनीकी पहल और पारदर्शिता से नए मानक स्थापित किए हैं। ई-केवायसी, जियो-टैगिंग, क्यूआर कोड, और वैज्ञानिक योजना निर्माण ने इस योजना को अधिक पारदर्शी, सटीक और कार्यक्षम बना दिया है। इस प्रकार, छत्तीसगढ़ राज्य ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को प्रभावी बनाने में अपनी भूमिका को और भी मजबूत किया है।



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