धान छोड़ो, 15 हजार लो, स्कीम पर किसानों के सवाल, धान खरीदी खजाने पर पड़ी भारी?

VINAY VERMA | Aug 06, 2026, 19:51 IST
धान छोड़ दूसरी फसल पर 15 हजार प्रति एकड़
छत्तीसगढ़ सरकार धान की जगह दूसरी फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ देने की योजना ला रही है। लेकिन किसान सवाल उठा रहे हैं कि बिना बाजार, खरीदी व्यवस्था और सिंचाई बदलाव के क्या यह योजना जमीन पर सफल होगी?

5 बड़ी बातें

  • 32 लाख हेक्टेयर में धान की खेती।
  • 85% खेत धान के हिसाब से तैयार।
  • 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का बोझ।
  • दूसरी फसल के लिए बाजार और सिस्टम नहीं।
  • 15 हजार से ज्यादा चाहिए, पूरी व्यवस्था चाहिए।

Raipur : छत्तीसगढ़ सरकार अब किसानों से कह रही है कि धान छोड़िए और दूसरी फसल लीजिए। बदले में 15 हजार रुपए प्रति एकड़ मिलेंगे। सरकार इसे फसल चक्र सुधारने का बड़ा कदम बता रही है। लेकिन गांवों में चर्चा कुछ और है। किसान पूछ रहे हैं कि क्या सरकार वास्तव में खेती बदलना चाहती है या फिर धान खरीदी और बोनस के बढ़ते खर्च से राहत तलाश रही है? विधानसभा चुनाव में किए गए वादों का बोझ भी सरकार पर है। ऐसे में नई योजना पर राजनीति और अर्थशास्त्र दोनों के सवाल खड़े हो गए हैं।



धान के लिए बने खेत, दूसरी फसल कहां होगी?

किसान नेता सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि कागज पर योजना आसान दिखती है, लेकिन जमीन की तस्वीर अलग है। छत्तीसगढ़ के करीब 32 लाख हेक्टेयर में धान बोया जाता है। करीब 85 प्रतिशत खेत ऐसे बनाए गए हैं कि बारिश का पानी पूरे खेत में रुके। यही डिजाइन धान की जरूरत है। अब अगर किसान दलहन, तिलहन या दूसरी फसल लेना चाहें तो खेत दोबारा बनाने पड़ेंगे। समतलीकरण होगा। ड्रेनेज बनेगा। सिंचाई बदलेगी। पानी की अलग व्यवस्था करनी होगी। सवाल यही है कि क्या 15 हजार रुपए प्रति एकड़ इस पूरी लागत के सामने टिक पाएंगे?



पानी की हकीकत, घोषणा से नहीं बदलेगी

छत्तीसगढ़ की खेती आज भी पानी पर टिकी है। पहला विकल्प निजी बोर और ट्यूबवेल है, जो गिने-चुने किसानों के पास हैं। दूसरा नहर का पानी है, जो एक साथ बड़ी मात्रा में आता है और धान के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। तीसरा बारिश पर आधारित खेती है, जहां खेतों में पानी भर जाता है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही कहते हैं कि ऐसी जमीन पर दूसरी फसल लेना व्यवहारिक नहीं है। केवल ढलान वाले करीब पांच प्रतिशत क्षेत्र ही ऐसे हैं, जहां पानी निकल जाता है और दूसरी फसल की संभावना बनती है।



कोदो उगा भी लिया, खरीदेगा कौन?

सरकार कोदो, कुटकी, रागी और दूसरी मोटे अनाज वाली फसलों को बढ़ावा देना चाहती है। लेकिन किसान पूछ रहे हैं कि फसल बेचेंगे कहां? धान के लिए समर्थन मूल्य है। खरीदी केंद्र हैं। मंडियां हैं। राइस मिलें हैं। पूरी सप्लाई चेन तैयार है। दूसरी फसलों के लिए न खरीदी का सिस्टम है और न बाजार। ऐसे में किसान बिचौलियों के भरोसे रह जाएगा। कम कीमत मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ किसान नहीं, पूरे गांव को एक साथ फसल बदलनी होगी। तभी व्यवस्था खड़ी हो सकेगी।



क्या खजाना बचाने की कोशिश है

सरकार इस सवाल से बच नहीं सकती। खरीफ 2025-26 में प्रदेश ने करीब 142 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा। इसके बदले किसानों के खातों में 1.40 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंचे। हर साल इतनी बड़ी खरीदी सरकार के खजाने पर भारी पड़ रही है। ऊपर से बोनस और चुनावी वादों का दबाव अलग। ऐसे में किसानों के बीच यह धारणा बन रही है कि सरकार फसल विविधीकरण के नाम पर धान खरीदी का बोझ कम करना चाहती है। सरकार की मंशा चाहे जो हो, लेकिन सवाल अब खुलकर पूछे जा रहे हैं।



पहले सिस्टम बनाओ, फिर खेती बदलवाओ

धान के लिए पूरा तंत्र तैयार है। खाद है। बीज है। समर्थन मूल्य है। सरकारी खरीदी है। सैकड़ों राइस मिलें हैं। किसान को भरोसा है कि उसकी उपज बिक जाएगी। दूसरी फसल के लिए ऐसा कोई भरोसा नहीं। उनका कहना है कि सरकार केवल घोषणा न करे। पहले बाजार बनाए। प्रोसेसिंग यूनिट लगाए। खरीदी केंद्र खोले। फिर किसान खुद बदलाव करेगा। बिना व्यवस्था के खेती बदलने का जोखिम कोई नहीं उठाएगा।



वैज्ञानिक बोले- सिर्फ पैसा नहीं, पूरा मॉडल चाहिए

कृषि वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर कहते हैं कि फसल चक्र जरूरी है। लेकिन छत्तीसगढ़ की खेती वर्षों से धान पर आधारित हो चुकी है। खेतों की बनावट भी उसी हिसाब से बदल गई है। अब उन्हें सोयाबीन, दलहन, तिलहन या सब्जियों के अनुकूल बनाने में भारी निवेश लगेगा। किसान को तकनीकी प्रशिक्षण देना होगा। सिंचाई सुधारनी होगी। बाजार बनाना होगा। प्रोसेसिंग यूनिट लगानी होगी। तभी बदलाव सफल होगा। सिर्फ 15 हजार रुपए देकर खेती की दिशा नहीं बदली जा सकती।



सवाल सिर्फ 15 हजार का नहीं, पूरी नीति का है

सरकार की मंशा अच्छी हो सकती है। फसल चक्र की जरूरत से कोई इनकार नहीं करता। लेकिन जमीन की सच्चाई भी उतनी ही बड़ी है। जिस राज्य की खेती, बाजार, पानी और सरकारी व्यवस्था पूरी तरह धान पर टिकी हो, वहां सिर्फ प्रोत्साहन राशि से तस्वीर नहीं बदलती। अगर सरकार सच में किसान को धान से बाहर लाना चाहती है तो उसे खेत से लेकर बाजार तक पूरा ढांचा खड़ा करना होगा। वरना यह योजना भी उन घोषणाओं की सूची में शामिल हो जाएगी, जिनकी चर्चा ज्यादा हुई और असर कम दिखा।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ सरकार धान की जगह दूसरी फसल लेने पर कितनी राशि देगी?
    सरकार किसानों को धान छोड़कर दूसरी फसल अपनाने के लिए 15 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने की योजना बना रही है।
  2. किसान इस योजना को लेकर सवाल क्यों उठा रहे हैं?
    किसानों का कहना है कि केवल आर्थिक मदद से फसल बदलना आसान नहीं है। दूसरी फसलों के लिए बाजार, खरीदी व्यवस्था, सिंचाई और प्रोसेसिंग की सुविधा भी जरूरी है।
  3. छत्तीसगढ़ में धान की खेती इतनी ज्यादा क्यों होती है?
    छत्तीसगढ़ में करीब 32 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। यहां खेतों की बनावट, पानी की व्यवस्था और सरकारी खरीदी तंत्र लंबे समय से धान आधारित है।

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