अबूझमाड़ में कॉफी की खेती , विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी

Arun Tiwari | Jul 09, 2026, 11:04 IST
अबूझमाड़ में कॉफी की खेती
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाने और आजीविका के लिए बड़े पैमाने पर कॉफी की खेती की तैयारी चल रही है। सफलता मिलने पर यहाँ चाय उत्पादन की भी योजना है।

RAIPUR : कभी नक्सल हिंसा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। यहां पहली बार बड़े पैमाने पर कॉफी की खेती शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का मक़सद आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाना, टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना और क्षेत्र को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। जिला प्रशासन ने कॉफी उत्पादन के लिए व्यापक योजना बनाई है।



कोरापुट जाएगी टीम:

अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों की एक टीम को ओडिशा के कोरापुट भेजा जाएगा, जहां वे कॉफी की खेती, पौध तैयार करने और रखरखाव के तरीके सीखेंगे। इसके अलावा कॉफ़ी की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग भी लेंगे। कोरापुट देश के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है और वहां की जलवायु अबूझमाड़ से काफी मिलती-जुलती है।



अबूझमाड़ ही क्यों:

विशेषज्ञों का मानना है कि अबूझमाड़ की पहाड़ी जलवायु, घने वन और उपजाऊ भूमि कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में हजारों आदिवासी परिवारों के लिए रोजगार और आय का नया स्रोत तैयार हो सकता है। प्रशासन की योजना केवल खेती तक सीमित नहीं है। कॉफी की नर्सरी तैयार करने, किसानों को प्रशिक्षण देने, उत्पादन बढ़ाने और बाद में प्रसंस्करण एवं विपणन की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होगा और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।



कॉफ़ी से होगी अबूझमाड़ की पहचान:

पिछले कुछ वर्षों में अबूझमाड़ में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ने से अब यह इलाका धीरे-धीरे विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। कॉफी की खेती इसी बदलाव का एक नया अध्याय मानी जा रही है। राज्य सरकार का मानना है कि कॉफी जैसी नकदी फसलें आदिवासी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ जंगलों के संरक्षण में भी मददगार साबित हो सकती हैं। इससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए स्थानीय लोगों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।



कॉफ़ी के बाद चाय का उत्पादन:

यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो अबूझमाड़ भविष्य में छत्तीसगढ़ के नए कॉफी उत्पादक क्षेत्र के रूप में उभर सकता है। इससे न केवल राज्य की कृषि में विविधता आएगी, बल्कि लंबे समय तक संघर्ष और पिछड़ेपन की पहचान रहे इस क्षेत्र की तस्वीर भी बदल सकती है। वहीं आने वाले दिनों में यहां कॉफ़ी के बाद चाय का उत्पादन भी किया जा सकता है।



FAQ

  1. अबूझमाड़ में कॉफी की खेती क्यों शुरू की जा रही है?
    उत्तर: इसका मकसद आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाना और क्षेत्र को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
  2. क्या अबूझमाड़ में आगे और फसलें भी उगाई जाएंगी?
    उत्तर: हां, कॉफी की खेती सफल होने के बाद यहां चाय का उत्पादन भी शुरू किया जा सकता है। यह भविष्य की योजना का हिस्सा है।

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